भारत में महंगाई का असर दिखने लगा है। गैस, पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से आम लोगों की जेब पर बोझ बढ़ा है। पिछले 15 दिनों में महंगाई तेजी से बढ़ी है। बीते 10 दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम में करीब चार रुपए प्रति लीटर से अधिक की बढ़ोतरी हुई है, जिसका सीधा असर रोजमर्रा की वस्तुओं पर दिख रहा है। कोडरमा के परचून दुकान संचालक अक्षय वसंत ने बताया कि पेट्रोल, डीजल और गैस के बढ़े दामों का सीधा असर खाद्य सामग्री पर पड़ा है। उन्होंने बताया कि कई खाद्य सामग्रियों में 10% से 12% तक की वृद्धि हुई है। नमकीन खाद्य पदार्थों के दाम में भी इजाफा
चावल के दाम में 5 से 10 रुपए प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, सरसों तेल भी प्रति लीटर 10 से 15 रुपए महंगा हो गया है। पिछले 10 दिनों में दूध के दाम में 4 रुपए की वृद्धि दर्ज की गई है। नमकीन खाद्य पदार्थों के प्रति पैकेट में भी 5 से 10 रुपए का इजाफा हुआ है। खाद्य पदार्थों के अलावा, साबुन, डिटर्जेंट पाउडर और बाथरूम में इस्तेमाल होने वाली सभी वस्तुओं के दाम भी बढ़े हैं। स्टेशनरी और महिलाओं के मेकअप उत्पादों की कीमतों में भी इजाफा हुआ है। लोग कर रहे सीमित खरीदारी
दुकानदार अक्षय वसंत ने यह भी बताया कि लगातार बढ़ती महंगाई के कारण लोग सीमित खरीदारी कर रहे हैं, जिससे उनके व्यापार पर भी नकारात्मक असर पड़ा है। इधर, राकेश शर्मा ने बताया कि युद्ध को लेकर सभी सामग्री महंगी हो गई है और लोग धीरे-धीरे खर्चे में कटौती करने पर मजबूर हो गए हैं।
उन्होंने बताया कि लोगों की आमदनी तो सीमित है, लेकिन महंगाई प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, जिसके कारण आम लोग खासकर मध्यम वर्गीय लोगों के पॉकेट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ने लगा है। घर में एक सब्जी बनाकर ही काम चला रही गृहणी
इधर, गृहणी किरण जैन ने बताया कि महंगाई का आलम यह है कि पहले जहां घर में नाश्ते और खाने के लिए दो से तीन प्रकार की सब्जियां बनाई जाती थी, अब उस पर अंकुश लग गया है और अब वह अपने घर में एक सब्जी बनाकर ही काम चला रही हैं। उन्होंने कहा कि महंगाई का सीधा असर रसोई पर पड़ा है। इसके कारण लोगों की परेशानी बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि वह एक मध्यम वर्गीय परिवार से आती हैं, ऐसे में उनके पति की जेब पर अतिरिक्त बोझ ना पड़े इसलिए वह खर्चे पर नियंत्रण कर रही है। कांसा, पीतल के बर्तनों पर भी महंगाई की मार
झुमरीतिलैया के स्टेशन रोड स्थित बर्तन विक्रेता विनोद कसेरा ने बताया कि महंगाई का असर सिर्फ खाद्य सामग्रियों पर नहीं बल्कि पूजन सामग्री और बर्तन पर भी पड़ने लगा है। उन्होंने कहा कि बीते एक महीने में कांसा, पीतल और तांबा जैसी धातुओं से बनने वाली बर्तनों की कीमतों में अपार वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि पहले जहां पीतल 700 रुपए प्रति किलो के दर पर उपलब्ध थी, वहीं अब इसकी कीमत 1 हजार रुपए प्रति किलो हो गई है। इसके अलावा कांसा के बर्तनों की कीमत 1000 प्रति किलो से बढ़कर 1400 रुपए प्रति किलो, जबकि तांबा से बने बर्तनों की कीमत 1400 से बढ़कर 1800 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि पहले जहां शादी विवाह के लग्न में उनके दुकान पर खरीदारों का मेला लगा रहता था, वहीं अब सीमित लोग खरीदारी करने आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि जो लोग 15 से 20 किलो तक के बर्तन की खरीदारी कर दान पुण्य किया करते थे, उसमें भी भारी गिरावट आई है और लोग जरूरत भर ही समान की खरीदारी कर रहे हैं। ऐसे में उनके व्यापार पर भी खासा असर पड़ा है। फल सब्जियों के भी बढ़े दाम बताते चलें कि बढ़ती महंगाई का असर फल तथा सब्जियों पर भी पड़ रहा है। पहले जहां सेब 80 से 90 रुपए प्रति किलो तक में उपलब्ध थे, वहीं अब इसका मूल्य बढ़ाकर 100 से 120 यूपी प्रति किलो तक पहुंच चुका है। इसके अलावा पहले जहां आम की कीमत 50 से 60 रुपए किलो तक होती थी, वहीं इस वर्ष आम की कीमत में भी भारी इजाफा हुआ है और हाल के दिनों में आम की कीमत 80 से 90 रुपए प्रति किलो तक पहुंच चुकी है, जो आने वाले समय में और भी बढ़ सकती है। कूरियर चार्ज भी हुआ मांगा
पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ने से कूरियर के भी चार्ज में वृद्धि हो गई है। झुमरीतिलैया के बिशनपुर रोड स्थित एक निजी पैकर्स एंड मूवर्स कंपनी के संचालक कुलदीप साव ने बताया कि पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ने के कारण ट्रांसपोर्टेशन चार्ज भी बढ़ा है, जिसके कारण कूरियर से आने वाले समान और यहां से दूसरे जगह भेजे जाने वाले वस्तुओं पर कूरियर चार्ज बढ़ा दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि पहके जहां इनके यहां किसी समान को मंगवाने या भेजने पर आधे किलो के समान पर 210 रुपए का शुल्क देना पड़ता था, वही अब आधे किलो वजन वाले सामानों की कोरियर चार्ज बढ़ाकर 220 रुपए कर दी गई है। इसी प्रकार से 1, 2 और 3 किलो के समान पर भी 10 रुपए का अतिरिक्त बोझ बढ़ा है। मिठाई की कीमतों में पहले ही हो चुकी है वृद्धि
बताते चलें कि मिठाई विक्रेताओं ने 20 दिन पूर्व ही बैठक कर मिठाई की कीमतों में 15 से 20% तक की वृद्धि कर दी है। कुल मिलाकर बढ़ती महंगाई ने खाने से नहाने, पूजा से श्राद्ध और पढ़ने से खेलने तक कि चीजों पर खासा प्रभाव डाला है।


