पटना में भाकपा-माले के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने पीसी की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने केवल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सत्ता से कमजोर नहीं किया, बल्कि उनके पूरे राजनीतिक विमर्श और शासन मॉडल को ही बदल दिया है। उन्होंने कहा कि बिहार में अब “सुशासन” की जगह “बुलडोजर और एनकाउंटर राज” को स्थापित किया जा रहा है। विकास की जगह विस्थापन, सामाजिक सद्भाव की जगह नफरत और हिंसा की राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है। दलितों, गरीबों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं, छात्र-युवाओं और मजदूरों के खिलाफ दमनकारी कार्रवाई को सामान्य बनाया जा रहा है। आइसा और आरवाइए की ओर से 24 मई को राज्यव्यापी प्रतिरोध दिवस मनाने का ऐलान किया गया है। छात्र-युवा अब सम्मान, रोजगार और शिक्षा के अधिकार के लिए सड़क पर उतरेंगे। सोशल मीडिया पर चल रहा छात्र-युवा विरोध अब जनआंदोलन का रूप लेगा। गरीबों और अल्पसंख्यकों पर चल रहा बुलडोजर दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि भाजपा शासन में बुलडोजर राजनीति का प्रतीक बन गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई बड़े अपराधियों या माफियाओं के खिलाफ नहीं, बल्कि गरीबों, फुटपाथ दुकानदारों, झुग्गीवासियों और मुसलमानों पर की जा रही है। उन्होंने कहा कि कानून और न्यायिक प्रक्रिया को दरकिनार कर लोगों को अतिक्रमणकारी, बांग्लादेशी या देशविरोधी बताकर निशाना बनाया जा रहा है। पिछले चार दिनों में पुलिस की ओर से बिना निष्पक्ष जांच के पांच लोगों को गोली मारी गई और इसमें एक खास समुदाय को निशाना बनाया गया।
पेपर लीक और बेरोजगारी पर सरकार को घेरा भाकपा-माले महासचिव ने कहा कि देश और बिहार के छात्र-युवा गहरे आक्रोश में हैं। बेरोजगारी चरम पर है और दूसरी ओर भर्ती परीक्षाएं लगातार पेपर लीक की शिकार हो रही है। नीट और एईडीईओ जैसी परीक्षाओं में पेपर लीक प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि संगठित अपराध और राजनीतिक संरक्षण का परिणाम है। लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद किया जा रहा है। दीपंकर भट्टाचार्य ने पटना में शिक्षक अभ्यर्थियों पर हुए लाठीचार्ज की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार संवाद और समाधान की जगह दमन का रास्ता अपना रही है। उन्होंने केंद्र और बिहार सरकार के शिक्षा मंत्रियों से इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने वालों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
मजदूर आंदोलनों पर दमन का आरोप भाकपा-माले नेता ने आरोप लगाया कि बिहार और देश में मजदूर आंदोलनों पर भी दमन तेज हो गया है। मजदूर नेता सत्यम वर्मा सहित कई जनपक्षधर कार्यकर्ताओं पर एनएसए जैसे कठोर कानून लगाकर जेल भेजा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में कृषि योग्य जमीनों को कॉरपोरेट कंपनियों के हवाले करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। उन्होंने भागलपुर में अदानी ग्रुप को कम कीमत पर जमीन दिए जाने और 11 जिलों में सैटेलाइट टाउनशिप के नाम पर जमीन खरीद-बिक्री रोकने के सरकारी आदेश का जिक्र करते हुए कहा कि भाकपा-माले कॉरपोरेट भूमि अधिग्रहण का विरोध करेगी।
दरभंगा सम्मेलन में नई राज्य कमेटी का गठन दीपंकर भट्टाचार्य ने बताया कि 16 से 18 मई तक दरभंगा में आयोजित भाकपा-माले के 12वें राज्य सम्मेलन में लोकतंत्र, संविधान, सामाजिक न्याय और जनाधिकारों के मुद्दों पर संघर्ष तेज करने का संकल्प लिया गया। सम्मेलन में एक बार फिर कुणाल को राज्य सचिव चुना गया। साथ ही 107 सदस्यीय नई राज्य कमिटी का गठन किया गया, जिसमें 27 नए चेहरों को शामिल किया गया है। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा कार्यकर्ता शामिल है।
