भास्कर न्यूज|लोहरदगा जिला राजी पड़हा व्यवस्था लोहरदगा द्वारा आयोजित पारंपरिक बिशु सेंदरा कार्यक्रम के सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद बुधवार को समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में कार्यक्रम की व्यवस्थाओं, सहभागिता एवं आयोजन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों व समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि बिशु सेंदरा आदिवासी समाज की परंपरा, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक है। कार्यक्रम को शांतिपूर्ण एवं अनुशासित तरीके से संपन्न कराने में सभी पड़हा प्रतिनिधियों, युवाओं और समाज के लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समीक्षा बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। तय किया गया कि आने वाले समय में समाज की पारंपरिक संस्कृति, रीति-रिवाज व भाषा के संरक्षण को लेकर गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। युवाओं को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने के लिए नियमित बैठक और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रत्येक गांव में पौधरोपण अभियान चलाने और पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने का निर्णय लिया गया। समाज में आपसी भाईचारा व एकता बनाए रखने के लिए विभिन्न पड़हा स्तर पर संवाद कार्यक्रम आयोजित करने पर भी सहमति बनी। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि अगला बिशु सेंदरा कार्यक्रम और अधिक व्यवस्थित व भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा, जिसके लिए अभी से तैयारी शुरू की जाएगी। साथ ही कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक नियमों एवं सामाजिक अनुशासन का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। बैठक में विभिन्न पड़हा के पाहन, पुजार, महतो, समाजसेवी एवं बड़ी संख्या में समाज के गणमान्य लोग उपस्थित थे। बैठक में मुख्य रूप से जिला राजी पड़हा व्यवस्था के जिला बेल लक्ष्मी नारायण भगत, देवान वीरेंद्र उरांव, कोटवार डोमना उरांव, भंडारी गोसाई भगत, उप बेल बुद्धेश्वर उरांव, उप देवान बजरंग कुमार उरांव, उप भंडारी नारायण कुमार उरांव, उप कोटवार सुखदेव कुमार उरांव, जोंक बेल मंजन उरांव, मीडिया प्रभारी जगदीप कुमार भगत, सुरेंद्र कुमार उरांव, सुखदेव कुमार उरांव, राजू कुमार बाखला, मधुसूदन टाना भगत, बिरी टाना भगत, रंजन कुमार उरांव सहित काफी संख्या में जिला राजी पड़हा व्यवस्था के पदाधिकारी एवं समाज के लोग शामिल थे।
रीति-रिवाज व भाषा के संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय
भास्कर न्यूज|लोहरदगा जिला राजी पड़हा व्यवस्था लोहरदगा द्वारा आयोजित पारंपरिक बिशु सेंदरा कार्यक्रम के सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद बुधवार को समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में कार्यक्रम की व्यवस्थाओं, सहभागिता एवं आयोजन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों व समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि बिशु सेंदरा आदिवासी समाज की परंपरा, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक है। कार्यक्रम को शांतिपूर्ण एवं अनुशासित तरीके से संपन्न कराने में सभी पड़हा प्रतिनिधियों, युवाओं और समाज के लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समीक्षा बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। तय किया गया कि आने वाले समय में समाज की पारंपरिक संस्कृति, रीति-रिवाज व भाषा के संरक्षण को लेकर गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। युवाओं को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने के लिए नियमित बैठक और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रत्येक गांव में पौधरोपण अभियान चलाने और पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने का निर्णय लिया गया। समाज में आपसी भाईचारा व एकता बनाए रखने के लिए विभिन्न पड़हा स्तर पर संवाद कार्यक्रम आयोजित करने पर भी सहमति बनी। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि अगला बिशु सेंदरा कार्यक्रम और अधिक व्यवस्थित व भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा, जिसके लिए अभी से तैयारी शुरू की जाएगी। साथ ही कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक नियमों एवं सामाजिक अनुशासन का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। बैठक में विभिन्न पड़हा के पाहन, पुजार, महतो, समाजसेवी एवं बड़ी संख्या में समाज के गणमान्य लोग उपस्थित थे। बैठक में मुख्य रूप से जिला राजी पड़हा व्यवस्था के जिला बेल लक्ष्मी नारायण भगत, देवान वीरेंद्र उरांव, कोटवार डोमना उरांव, भंडारी गोसाई भगत, उप बेल बुद्धेश्वर उरांव, उप देवान बजरंग कुमार उरांव, उप भंडारी नारायण कुमार उरांव, उप कोटवार सुखदेव कुमार उरांव, जोंक बेल मंजन उरांव, मीडिया प्रभारी जगदीप कुमार भगत, सुरेंद्र कुमार उरांव, सुखदेव कुमार उरांव, राजू कुमार बाखला, मधुसूदन टाना भगत, बिरी टाना भगत, रंजन कुमार उरांव सहित काफी संख्या में जिला राजी पड़हा व्यवस्था के पदाधिकारी एवं समाज के लोग शामिल थे।


