पोठिया (किशनगंज) से विद्यानन्द मेहता की रिपोर्ट
NIA Raid: बिहार के सीमावर्ती किशनगंज जिले के पोठिया थाना क्षेत्र अंतर्गत मिर्जापुर पंचायत के जनता हाट इलाके में शुक्रवार की अहले सुबह राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की एक बड़ी और कथित गुप्त कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई. शुक्रवार सुबह करीब 04:00 बजे, जब पूरा इलाका गहरी नींद में सोया था, अचानक कई गाड़ियों में सवार होकर भारी सुरक्षा बलों के साथ पहुंची एनआईए की टीम ने स्थानीय निवासी मनोज रविदास के घर की घेराबंदी कर दी. अचानक हुई इस हाई-प्रोफाइल छापेमारी की भनक लगते ही आसपास के ग्रामीणों में अफरा-तफरी और हड़कंप मच गया. टीम कई घंटों की सघन तलाशी के बाद संदिग्ध युवक को पूछताछ के लिए अपने साथ लेकर रवाना हो गई है.
तड़के 4 बजे सुरक्षाबलों ने डाला डेरा, एनएसजी कमांडो के शामिल होने की चर्चा
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह का उजाला होने से पहले ही सुरक्षाबलों की गाड़ियों ने जनता हाट निवासी लखन रविदास के घर को चारों तरफ से घेर लिया था.
- सुरक्षा का कड़ा पहरा: छापेमारी की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय पुलिस के अलावा केंद्रीय सुरक्षा बलों और कथित तौर पर एनएसजी (NSG) के आधुनिक हथियारों से लैस जवानों को बाहरी सुरक्षा घेरे में तैनात किया गया था, ताकि कोई भी बाहरी व्यक्ति परिसर के भीतर या बाहर न जा सके.
- घंटों चली सर्च ऑपरेशन: जांच एजेंसी के अधिकारियों ने मनोज रविदास के घर के चप्पे-चप्पे, कमरों, बक्सों और डिजिटल उपकरणों की गहनता से जांच की. कई घंटों तक चली इस मैराथन कागजी और भौतिक छानबीन के बाद टीम ने मनोज रविदास (पिता- लखन रविदास) को कस्टडी में ले लिया और अपने साथ लेकर चली गई.
संदिग्ध कॉल रिकॉर्डिंग और इनपुट की चर्चा, चप्पल की दुकान चलाता है आरोपी
क्या है कार्रवाई की वजह: ग्रामीण स्तर पर और सुरक्षा गलियारों में यह तीव्र चर्चा है कि केंद्रीय जांच एजेंसियों को देश विरोधी गतिविधियों, संदिग्ध फंडिंग या किसी प्रतिबंधित संगठन से जुड़े कुछ बेहद संवेदनशील कॉल रिकॉर्डिंग (Call Recording) और संदिग्ध मोबाइल इनपुट मिले थे. इन तकनीकी साक्ष्यों के सत्यापन (Verification) और क्रॉस-क्वेश्चनिंग के लिए ही यह त्वरित कार्रवाई की गई है. हालांकि, यह मामला पूरी तरह गोपनीय होने के कारण एनआईए या किसी अन्य एजेंसी ने अभी तक इस इनपुट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.
पारिवारिक और सामाजिक पृष्ठभूमि:
स्थानीय लोगों ने बताया कि हिरासत में लिया गया मनोज रविदास जनता हाट मुख्य बाजार में एक छोटी सी चप्पल की दुकान चलाकर अपना जीवनयापन करता है, जबकि उसके पिता लखन रविदास सीधे-साधे किसान हैं जो खेती और मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं. एक बेहद सामान्य पृष्ठभूमि के परिवार में देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी की इस दबिश के बाद मनोज के परिजन और रिश्तेदार पूरी तरह स्तब्ध और सदमे में हैं.
जिला प्रशासन और एनआईए का आधिकारिक बयान आना बाकी
छापेमारी और गिरफ्तारी की खबर जैसे-जैसे सूरज चढ़ने के साथ आसपास के गांवों में फैली, जनता हाट बाजार में लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई. दिनभर चाय थड़ियों और चौपालों पर इसी बात को लेकर तरह-तरह के कयास और चर्चाओं का बाजार गर्म रहा.
फिलहाल, इस पूरे मामले पर किशनगंज जिला प्रशासन, स्थानीय पोठिया थाना पुलिस या एनआईए (NIA) के मुख्यालय की ओर से कोई भी आधिकारिक प्रेस नोट या बयान जारी नहीं किया गया है. सीमावर्ती जिला होने के कारण सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां इस पूरे मामले पर बेहद सतर्कता बरत रही हैं और माना जा रहा है कि प्रारंभिक पूछताछ के बाद ही एजेंसी किसी निष्कर्ष पर पहुंचेगी.
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