भास्कर न्यूज|लोहरदगा सदर अस्पताल में सरकार सभी तरह की सुविधाएं होने का दावा करती है। लोहरदगा सदर अस्पताल में मरीजों को बेहतर सुविधा के नाम पर प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा ही मिल रही है। अत्याधुनिक सुविधाओं के लिए लोगों को जद्दोजहद करनी पड़ रही है। बाहर से अस्पताल बेहतर दिखता है। अंदर जाने पर व्यवस्था की पोल खुल जाती है। अस्पताल परिसर में मरीज के परिजनों के लिए विश्राम गृह नहीं है। इलाज के लिए आए मरीज के परिजनों को इधर-उधर रात गुजारनी पड़ती है। अस्पताल प्रशासन कहता है कि मरीज के साथ एक परिजन रह सकता है। मरीजों की संख्या बढ़ने पर परिजनों की संख्या भी बढ़ जाती है। सदर अस्पताल में गंभीर मरीजों को रिम्स रेफर करने की परंपरा कायम है। दुर्घटनाओं में कई लोगों की मौत सिर पर चोट के कारण हो जाती है। सिर पर चोट वाले मरीजों को डॉक्टर सबसे पहले सीटी स्कैन कराने को कहते हैं। सदर अस्पताल में आज तक सीटी स्कैन की व्यवस्था शुरू नहीं हो पाई है। पूरे जिले में सुभाष चौक स्थित राहुल लैब में निजी स्तर पर सीटी स्कैन की सुविधा है। वहां सीटी स्कैन का चार्ज 3500 रुपए लिया जाता है। संपन्न लोग खर्च उठा लेते हैं। ग्रामीण इलाके से आने वाले गरीब परिवार निजी सीटी स्कैन कराने में असमर्थ रहते हैं। कई लोग सीटी स्कैन करा नहीं पाते। कई लोग बाजार से कर्ज लेकर सीटी स्कैन कराते हैं। इससे इलाज का बोझ बढ़ जाता है। सदर अस्पताल में सीटी स्कैन नहीं होने से गंभीर मरीजों को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। मरीजों को रांची रिम्स भेजा जाता है। सदर अस्पताल में बिचौलिए सक्रिय हैं। इसका खामियाजा दूर-दराज से आए गरीब मरीजों को उठाना पड़ता है। मामले पर सदर अस्पताल के सीएस डॉ. राजू कच्छप ने बताया कि सीटी स्कैन को लेकर कई बार ऊपर मांग की जा चुकी है परंतु अस्पताल में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी होने के कारण मांग पूरी नहीं हो पाई है। इसके अलावा टेक्नीशियन की भी कमी है। फिलहाल सीटी स्कैन से जुड़े मरीजों को रांची सदर अस्पताल या रिम्स रेफर किया जा रहा है जहां सरकारी दर पर उनका स्कैन कराया जाता है। वहीं जिले में एकमात्र प्राइवेट लैब में सीटी स्कैन के लिए अत्यधिक राशि लिए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि प्राइवेट लैब से एमओयू करने को लेकर पूर्व में टेंडर निकाली गई थी जो किसी कारणवश नहीं हो पाई। पुनः टेंडर निकाली गई है। एमओयू हो जाने के बाद गरीब लोगों को भी सरकारी दर पर प्राइवेट स्तर से सीटी स्कैन का लाभ मिल सकेगा।
लोहरदगा सदर अस्पताल में सीटी स्कैन की सुविधा नहीं, प्राइवेट में देने पड़ रहे
भास्कर न्यूज|लोहरदगा सदर अस्पताल में सरकार सभी तरह की सुविधाएं होने का दावा करती है। लोहरदगा सदर अस्पताल में मरीजों को बेहतर सुविधा के नाम पर प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा ही मिल रही है। अत्याधुनिक सुविधाओं के लिए लोगों को जद्दोजहद करनी पड़ रही है। बाहर से अस्पताल बेहतर दिखता है। अंदर जाने पर व्यवस्था की पोल खुल जाती है। अस्पताल परिसर में मरीज के परिजनों के लिए विश्राम गृह नहीं है। इलाज के लिए आए मरीज के परिजनों को इधर-उधर रात गुजारनी पड़ती है। अस्पताल प्रशासन कहता है कि मरीज के साथ एक परिजन रह सकता है। मरीजों की संख्या बढ़ने पर परिजनों की संख्या भी बढ़ जाती है। सदर अस्पताल में गंभीर मरीजों को रिम्स रेफर करने की परंपरा कायम है। दुर्घटनाओं में कई लोगों की मौत सिर पर चोट के कारण हो जाती है। सिर पर चोट वाले मरीजों को डॉक्टर सबसे पहले सीटी स्कैन कराने को कहते हैं। सदर अस्पताल में आज तक सीटी स्कैन की व्यवस्था शुरू नहीं हो पाई है। पूरे जिले में सुभाष चौक स्थित राहुल लैब में निजी स्तर पर सीटी स्कैन की सुविधा है। वहां सीटी स्कैन का चार्ज 3500 रुपए लिया जाता है। संपन्न लोग खर्च उठा लेते हैं। ग्रामीण इलाके से आने वाले गरीब परिवार निजी सीटी स्कैन कराने में असमर्थ रहते हैं। कई लोग सीटी स्कैन करा नहीं पाते। कई लोग बाजार से कर्ज लेकर सीटी स्कैन कराते हैं। इससे इलाज का बोझ बढ़ जाता है। सदर अस्पताल में सीटी स्कैन नहीं होने से गंभीर मरीजों को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। मरीजों को रांची रिम्स भेजा जाता है। सदर अस्पताल में बिचौलिए सक्रिय हैं। इसका खामियाजा दूर-दराज से आए गरीब मरीजों को उठाना पड़ता है। मामले पर सदर अस्पताल के सीएस डॉ. राजू कच्छप ने बताया कि सीटी स्कैन को लेकर कई बार ऊपर मांग की जा चुकी है परंतु अस्पताल में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी होने के कारण मांग पूरी नहीं हो पाई है। इसके अलावा टेक्नीशियन की भी कमी है। फिलहाल सीटी स्कैन से जुड़े मरीजों को रांची सदर अस्पताल या रिम्स रेफर किया जा रहा है जहां सरकारी दर पर उनका स्कैन कराया जाता है। वहीं जिले में एकमात्र प्राइवेट लैब में सीटी स्कैन के लिए अत्यधिक राशि लिए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि प्राइवेट लैब से एमओयू करने को लेकर पूर्व में टेंडर निकाली गई थी जो किसी कारणवश नहीं हो पाई। पुनः टेंडर निकाली गई है। एमओयू हो जाने के बाद गरीब लोगों को भी सरकारी दर पर प्राइवेट स्तर से सीटी स्कैन का लाभ मिल सकेगा।
