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पश्चिम बंगाल कैबिनेट में आरा के अर्जुन सिंह:IPC के 236 केस; 5वीं बार विधायक-एक बार सांसद रह चुके, बेटा तीसरी बार MLA


पश्चिम बंगाल सरकार का पहला मंत्रिमंडल विस्तार हुआ। राज्यपाल आरएन रवि ने 35 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई। सीएम शुभेंदु अधिकारी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। भोजपुर जिले के बड़हरा के केवटिया के 62 साल के अर्जुन सिंह भी शुभेंदु सरकार में मंत्री बने हैं। आरएन रवि ने पश्चिम बंगाल के बैरकपुर लोकसभा की नोआपाड़ा विधानसभा सीट से पहली बार चुनाव लड़ते हुए तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी त्रिनंकुर भट्टाचार्जी को 17,656 वोटों के बड़े अंतर से हराया था। इस जीत को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह इलाका लंबे समय से वाम मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस के प्रभाव में रहा है। अर्जुन सिंह पर IPC के तहत 236 केस दर्ज हैं। जानिए आरा से पश्चिम बंगाल तक पहुंचने की पूरी कहानी… अब जानिए अर्जुन सिंह कौन हैं? अर्जुन सिंह का जन्म 2 अप्रैल 1962 को केवटिया गांव में हुआ था। उनके पिता सत्यनारायण सिंह कांग्रेस के सीनियर नेता थे और भाटपाड़ा विधानसभा से दो बार विधायक रह चुके थे। बचपन के बाद ही अर्जुन सिंह पश्चिम बंगाल चले गए और वहीं उनकी राजनीतिक जमीन तैयार हुई। उन्होंने 12वीं तक की शिक्षा प्राप्त की, लेकिन अपने पिता से मिली राजनीतिक समझ और सामाजिक कार्यों के अनुभव के दम पर उन्होंने बंगाल की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। 1995 में कांग्रेस से राजनीतिक करियर की शुरुआत अर्जुन सिंह ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1995 में कांग्रेस के काउंसलर के रूप में की। इसके बाद 1998 में वे तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए और पार्टी के संस्थापक सदस्यों में गिने गए। क्षेत्र में सक्रियता और मजबूत जनसंपर्क के बल पर उन्हें 2001 में भाटपारा विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया, जहां उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार को हराकर जीत हासिल की। 2001 के बाद अर्जुन सिंह लगातार 2016 तक भाटपाड़ा से विधायक रहे और इस दौरान उन्होंने अपने क्षेत्र में मजबूत पकड़ बनाए रखी। 2019 में अर्जुन सिंह ने बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए भाजपा का दामन थाम लिया। साल 2019 में ही हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अर्जुन सिंह को बैरकपुर लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया, जहां उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के सीनियर नेता दिनेश त्रिवेदी को 14,857 वोटों से हराकर जीत दर्ज की। इस जीत के बाद वे राष्ट्रीय राजनीति में भी सक्रिय हो गए। 2024 में लोकसभा का चुनाव हार गए थे साल 2024 में हुए लोकसभा सीट से एक बार भाजपा ने उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया, लेकिन वे चुनाव हार गए। दो साल बाद 2026 में एक बार फिर पार्टी ने उन पर भरोसा जताया और नोआपाड़ा से विधानसभा की टिकट दिया, जिसमें उन्होंने जीत दर्ज की। अर्जुन सिंह के खिलाफ 93 आपराधिक मामले और 236 आईपीसी के आरोप दर्ज हैं। TMC छोड़ने के बाद अक्टूबर 2024 में उनके घर पर देसी बम से हमला किया गया था। बराबर टीएमसी के नेताओं से झड़प की खबरें आती रही है। अर्जुन सिंह के बेटे पवन सिंह के बारे में जानिए, जो तीसरी बार विधायक बने हैं साल 2019 में अर्जुन सिंह सांसद बनने के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा ने उनके बेटे पवन कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया, जिन्होंने पहली बार चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की और अपने राजनीतिक करियर की सफल शुरुआत की। पवन कुमार सिंह ने भाटपाड़ा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ते हुए तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार अमित गुप्ता को 22,807 वोटों से हराकर अपनी राजनीतिक पकड़ का लोहा मनवाया है। यह सीट उनके परिवार की परंपरागत सीट मानी जाती रही है, जहां से उनके दादा और पिता का मजबूत जनाधार रहा है। यही नहीं बैरकपुर लोकसभा के सातों विधानसभा सीटों पर अर्जुन सिंह के मेहनत और प्रभाव के कारण भाजपा ने क्लीन स्वीप किया। अब जानिए, अर्जुन सिंह, पवन सिंह के गांव के लोगों का क्या कहना है? 3 मई को अर्जुन और पवन सिंह की जीत की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव केवटिया पहुंची, पूरे गांव में जश्न का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर खुशी का इजहार किया। गांव के काली मंदिर में महंत द्वारा शंखनाद कर इस जीत को देवी का आशीर्वाद बताया गया। मंदिर परिसर में लोगों की भीड़ जुटी रही और पूरे इलाके में उत्साह का माहौल देखने को मिला। गांव के लोग बताते हैं कि भले ही अर्जुन सिंह पश्चिम बंगाल की राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन वे जब भी गांव आते हैं, गांव के लिए कुछ न कुछ करते हैं। उन्होंने अपने बाढ़ प्रभावित केवटिया गांव में बांध का निर्माण कराया गया, जिससे गांव को काफी राहत मिली। गंगा कटाव में समा चुके प्राचीन काली मंदिर का पुनर्निर्माण भी उनके प्रयासों से संभव हो सका। इस मंदिर में उन्होंने अपने परिवार के साथ रहकर तीन दिनों तक पूजा-अर्चना की थी, जिसे ग्रामीण उनकी सफलता का एक प्रमुख कारण मानते हैं।

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