महिलाओं को समानता का अधिकार देने की बात तो होती है, लेकिन इसके लिए धरातल पर काम नहीं किया जाता। इसलिए अब मानसिकता को बदलना होगा। जब महिलाओं को समान अधिकार मिलेगा तो उनका विकास होगा। राजनीतिक दलों को…
महिलाओं को समानता का अधिकार देने की बात तो होती है, लेकिन इसके लिए धरातल पर काम नहीं किया जाता। इसलिए अब मानसिकता को बदलना होगा। जब महिलाओं को समान अधिकार मिलेगा तो उनका विकास होगा। राजनीतिक दलों को चाहिए कि महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा और रोजगार पर विशेष ध्यान दें। ताकि वह भी राष्ट्र के विकास में मदद कर सकें।
आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान के आओ राजनीति करें अभियान के तहत मलदहिया स्थित एसपी ग्रेड गेस्ट हाउस में चाय चौपाल में महिलाओं ने ये विचार रखे। उन्होंने कहा कि महिलाओं के विकास की बात सरकारें कई दशकों से कर रही हैं। मगर उनको आजतक आरक्षण नहीं मिला। आज भी संसद में यह लटका है। उनके लिए अलग से कोई योजना नहीं चलाई जाती है, ताकि उनका उत्तरोत्तर विकास हो सके। महिलाओं ने कहा कि अगर हमें हर स्तर पर सुरक्षा मिले तो हम स्वतंत्र होकर काम कर सकती हैं।
उन्होंने सरकारी योजनाओं में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने, नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा, शिक्षा देने के अलावा महिला सुरक्षा के लिए बने कानून सख्त करने पर जोर दिया। महिलाओं ने 19 मई को होने वाले मतदान में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाने की शपथ ली। इस मौके पर प्रीति मलिक, पूनम सिंह, सरिता त्रिपाठी, ममता उपाध्याय, ऋचा पाठक, सुजाता यादव, तनु नवलानी, मधु तिवारी, पूजा श्रीवास्तव, रजनी पाण्डेय, वीभा तिवारी, जया श्रीवास्तव, शशि मिश्रा आदि रहीं।
यह भी बोलीं महिलाएं
सरकार महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए प्रयास करे। शिक्षित व गरीब महिलाओं को स्वरोजगार मिले, ताकि वह सशक्त हो सकें।
ममता उपाध्याय
महिलाओं में जागरूकता आई है। वह सामाजिक व राजनीतिक हर क्षेत्र में अपनी भागीदारी बढ़ा सकती हैं। इसके लिए सरकार उनका सहयोग करे।
प्रीति मलिक
महिलाओं की सुरक्षा सरकार सुनिश्चित करे। इसकी वजह से उनका विकास नहीं हो पाता है। वह विभिन्न क्षेत्र में इसलिए काम नहीं करना चाहती हैं कि वहां सुरक्षा नहीं है।
सरिता त्रिपाठी
महिलाओं को आरक्षण मिलना चाहिए। उनको आधी आबादी माना जाता है तो उनको 50 प्रतिशत आरक्षण क्यों नहीं दिया जाता है?
पूनम सिंह
महिलाएं राजनीति में कैसे आगे आएं। इसके लिए राजनीतिक दल उन्हें चुनाव में उतारें। अगर महिलाएं आगे आएंगी तो वह महिलाओं की जरूरतों को अच्छी तरह उठाएंगी।
सुजाता यादव
महिलाओं को कमजोर न समझा जाए। वह कुछ भी करने को तैयार हैं। सरकार उनको समानता के साथ सम्मान दे। उनके लिए बने कानून का सही से पालन करे।
तनु नवलानी
महिलाओं के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। उनके हर मुद्दे को नेता मजबूती से उठाएं। उसे संसद में पास करवाएं। तभी उनकी महिलाओं के प्रति सहयोग माना जा सकता हैं।
रजनी पाण्डेय
लड़के व लड़कियों में भेदभाव सही नहीं है। लड़कियां हर कार्य कर सकती हैं। परिवार के लोग इस भाव से ऊपर उठकर उन्हें हर अवसर मुहैया कराएं।
वीभा तिवारी


