रांची शिक्षक और कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके परिवार को आर्थिक संकट से उबारने के लिए बनाई गई अनुकंपा नियुक्ति व्यवस्था रांची यूनिवर्सिटी में खुद संकट का शिकार हो गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन वर्षों से अनुकंपा समिति की बैठक आयोजित नहीं कर पाया है। इस कारण अभी तक मृत कर्मचारियों के आश्रितों के प्रस्तावों पर निर्णय नहीं हो सका है। विवि आरयू मुख्यालय समेत विभिन्न कॉलेजों से जुड़े कार्यरत शिक्षक-कर्मचारियों की मृत्यु के बाद उनके आश्रितों ने नियम के अनुसार आवेदन दिया, लेकिन फाइलें कार्यालयों में ही अटक गईं। आश्रितों का कहना है कि पूर्व कुलपति के कार्यकाल से लंबित मामलों पर कोई ठोस पहल नहीं हुई। पूर्व वीसी के बाद दो प्रभारी कुलपतियों ने योगदान दिया, जो भी नियमित की तरह ट्रासफर-पोस्टिंग समेत अन्य निर्णय लिए, लेकिन अनुकंपा समिति की मीटिंग से दूर ही रहे। विलंब होने के कारण हर साल नए मामले जुड़ते जा रहे हैं और लंबित आवेदनों की संख्या बढ़ती जा रही है। {एसएस मेमोरियल कॉलेज के स्टाफ अनिल कुमार दास का निधन 16 अप्रैल 2021 को हुआ था। उनके पुत्र अभिषेक ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन दिया था, लेकिन पांच वर्ष बाद भी नियुक्ति नहीं हो सकी है। मुख्यालय में कार्यरत इंद्रदेव राम की मृत्यु 28 मई 2023 को हुई थी। इनके पुत्र विशाल कुमार नौकरी की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
आरयू मुख्यालय की कर्मचारी पुष्पा देवी के निधन के बाद उनके पुत्र रोहित कुमार ने भी आवेदन दिया, लेकिन मामला अब तक लंबित है।
केसीबी कॉलेज बेड़ों में कार्यरत डॉ राकेश कुमार का निधन 2 जनवरी 2024 को हुआ था। उनके पुत्र कुमार पराग ने नौकरी के लिए दावा किया है।
वीमेंस कॉलेज, रांची के कर्मचारी बिंदेश्वर भगत के निधन (2 दिसंबर 2023) के बाद उनके पुत्र रोहित कुमार ने आवेदन किया था।
पीके कॉलेज, बुंडू के कर्मचारी प्रेम सागर प्रमाणिक की 28 अगस्त 2024 को मृत्यु होने के बाद उनके पुत्र मिट्ठू प्रमाणिक ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन दिया है।
सिमडेगा कॉलेज के कर्मचारी शहरु केरकेट्टा का निधन 20 जुलाई 2025 को हुआ था, उनके पुत्र अश्विनी केरकेट्टा ने आवेदन किया।
वहीं जेएन कॉलेज, धुर्वा के कर्मचारी जितेंद्र कुमार सिंह की 18 फरवरी 2026 को मृत्यु के बाद उनकी पुत्री अर्जिता राज ने नौकरी के लिए दावा किया है।


