मधुबनी जिले के भैरवस्थान थाना क्षेत्र में करीब चार वर्ष पूर्व नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के मामले में न्यायालय ने आरोपी कमलेश मुखिया को दोषी करार दिया है। जिला अपर सत्र न्यायाधीश-सह-विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) नीरज कुमार त्यागी की अदालत ने मंगलवार को यह फैसला सुनाया। आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और पॉक्सो अधिनियम की धारा 4 के तहत दोषी पाया गया है। सजा के बिंदु पर अगली सुनवाई 12 जून को होगी। अस्पताल ले जाकर धोखे से गर्भपात करवा दिया
विशेष लोक अभियोजक कुमारी मधुरानी ने मंगलवार रात 8:00 बजे बताया कि आरोपी कमलेश मुखिया ने नाबालिग पीड़िता को शादी का झांसा देकर लंबे समय तक उसका यौन शोषण किया था। इस दौरान पीड़िता गर्भवती हो गई। जब पीड़िता ने आरोपी पर विवाह करने का दबाव बनाया, तो उसने उसे झंझारपुर स्थित एक अस्पताल ले जाकर धोखे से गर्भपात करवा दिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, गर्भपात के बाद पीड़िता और उसके परिजनों ने आरोपी से विवाह करने की बात कही। हालांकि, आरोपी ने शादी से इनकार कर दिया। इसके बाद उसने पीड़िता और उसके परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट और गाली-गलौज भी की। अधिनियम के तहत अपराधों का दोषी सिद्ध किया गया
इस घटना के बाद पीड़िता ने झंझारपुर थाना में आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की जांच पूरी कर न्यायालय में आरोप-पत्र दाखिल किया, जिसके बाद मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाया। उसे दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम के तहत अपराधों का दोषी सिद्ध किया गया। अब सभी की निगाहें 12 जून को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जब अदालत दोषी को सुनाई जाने वाली सजा का निर्धारण करेगी।
