राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की ताजा रिपोर्ट एनएफएचएस-6 ने झारखंड में पोषण की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में पांच वर्ष से कम उम्र के 41.1% यानी हर 10 में 4 बच्चे बच्चे कम वजन (अंडरवेट) के शिकार हैं। वहीं 29.2% महिलाओं का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) सामान्य से कम पाया गया है। इसके पीछे महिलाओं में कुपोषण और बच्चों को पर्याप्त पोषण नहीं मिलना बताया गया है। रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक पहलू 6 से 23 महीने की आयु के बच्चों के खानपान को लेकर सामने आया है। इस आयु वर्ग के केवल 13.3% बच्चों को ही पर्याप्त और संतुलित आहार मिल पा रहा है, 87% बच्चे उचित पोषण से वंचित हैं। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में जन्म के बाद बच्चों को पूरक आहार देने के बाद कुछ सुधार देखा गया है। 6 से 8 महीने के 62.8% बच्चों को मां के दूध के साथ ठोस आहार दिया जा रहा है, जबकि पिछले सर्वेक्षण में यह आंकड़ा 38.8% था।
महिलाओं का पोषण स्तर भी चिंता का कारण: एनएफएचएस-6 के मुताबिक 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 29.2 प्रतिशत महिलाएं अंडरवेट हैं। पिछले सर्वेक्षण में यह आंकड़ा 26.2% था। यानी महिलाओं के पोषण स्तर में सुधार की बजाय गिरावट दर्ज की गई है। 100 दिन या उससे अधिक समय तक आयरन की गोलियां लेने वाली महिलाओं का प्रतिशत केवल 30.6% है। डॉ. विनीता, डॉ. अर्चना पाठक, स्त्री रोग विशेषज्ञ बौनेपन में सुधार, कम वजन वाले बच्चे बढ़े: रिपोर्ट के अनुसार, पांच वर्ष से कम उम्र के 35 प्रतिशत बच्चे बौनापन (स्टंटिंग) के शिकार हैं। हालांकि यह आंकड़ा पिछले सर्वेक्षण (39.6 प्रतिशत) की तुलना में बेहतर है। लेकिन दूसरी ओर कम वजन वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 41.1 प्रतिशत पहुंच गई है, जो पिछले सर्वेक्षण में 39.4 प्रतिशत थी। इंटर्न: श्रुति कुमारी गर्भावस्था के दौरान नियमित स्वास्थ्य जांच से ही सुधार संभव बच्चों के स्वास्थ्य की नींव गर्भावस्था के दौरान ही पड़ जाती है। कुपोषण से निपटने के लिए केवल बच्चों पर नहीं, बल्कि मातृ स्वास्थ्य पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा। गर्भावस्था के दौरान उचित पोषण, आयरन- फोलिक एसिड का सेवन, नियमित स्वास्थ्य जांच, स्तनपान को बढ़ावा और समय पर पूरक आहार उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।

