पेंशन नहीं मिलने से दो रिटायर्डकर्मी की इलाज के अभाव में हो गई मौत रांची को राजधानी बनाने में अपना जीवन लगाने वाले नगर निगम के पूर्व कर्मचारियों के ऊपर अचानक दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा है। क्योंकि, जिस नगर निगम में नौैकरी करते हुए वे सेवानिवृत्त हो गए, अब उसी निगम के अफसर रिटायर कर्मचारियों की पेंशन घटाने में जुट गए हैं। एक ओर महंगाई आसमान छू रही है, दूसरी ओर निगम में पिछले 10 सालों तक राज्यकर्मियों के बराबर पेंशन देने के बाद 400 से अधिक पेंशनभोगियों के पेंशन में 20 प्रतिशत तक की कटौती की तैयारी चल रही है। मतलब जिन कर्मचारियों को पहले 47 हजार रुपए पेंशन मिल रही थी, उसे घटाकर 39 हजार रुपए कर दिया है। पेंशनभोगियों की पेंशन घटाने के लिए नगर निगम के अधिकारियों ने नगर विकास विभाग द्वारा 17 साल पहले जारी किए गए पत्र आैर 11 साल पहले नगर निगम बोर्ड में लिए गए फैसले को आधार बनाया है। झारखंड म्यूनिसिपल एक्ट लागू होने के बावजूद सेवानिवृत्त निगमकर्मियों की पेंशन का नए सिरे से निर्धारण बिहार म्यूनिसिपल ऑफिसर एंड सर्वेंट पेंशन रूल्स-1987 के तहत कर दिया गया है। पेंशन में संशोधन करने के लिए निगम ने पिछले दो माह से 400 से अधिक सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन रोक दी है। इससे सभी पेंशनभोगियों की आर्थिक स्थिति चरमरा गई है। दो सेवानिवृत्त कर्मचारी पंकज यादव आैर भुवन केसरी की मौत पैसे के अभाव में बेहतर इलाज नहीं करा पाने से हो गई। जबकि, एक कर्मचारी लक्ष्मण रिम्स में इलाजरत है। परिजन लक्ष्मण को बेहतर इलाज के लिए बड़े हॉस्पिटल ले जाना चाहते हैं, पर पैसे के अभाव में नहीं जा पा रहे हैं। ऐसी ही स्थिति अन्य किर्मयों की भी है। हाईकोर्ट का आदेश भी किया दरकिनार, अब 16 को सुनवाई हाईकोर्ट के तत्कालीन जस्टिस एसएन. पाठक की अदालत ने सेवानिवृत्त कर्मचारी की एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए 21 अक्टूबर 2024 को वृहद आदेश पारित किया। अदालत ने बिहार म्यूनिसिपल ऑफिसर एंड सर्वेंट पेंशन रूल्स 1987 के प्रावधानों को हटा दिया। अदालत ने कहा कि जब-जब निगमकर्मियों की सैलरी रिवाइज होगी, तब-तब पेंशनरों की पेंशन भी रिवाइज होगी। लेकिन निगम ने अदालत के आदेश को नहीं माना। इसके खिलाफ सेवानिवृत्त कर्मचारियों की आेर से अदालत में अवमानना का केस किया गया। अब इस मामले में 16 जून को सुनवाई होगी। हाईकोर्ट के आदेश पर राज्य कर्मियों के बराबर पेंशन मिली रांची नगर निगम के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को वर्ष 2017 से पहले फोर्थ पे कमीशन के आधार पर काफी कम पेंशन मिलती थी। तृतीय वर्ग के कर्मचारी को अधिकतम 3400 रुपए मिलती थी। इसके बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने राज्यकर्मियों के बराबर पेंशन की मांग को लेकर हाईकोर्ट में रिट दाखिल की। हाईकोर्ट ने नगर निगम के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को राज्यकर्मियों के बराबर पेंशन देने का निर्देश दिया था। इसके बाद नवंबर 2017 में निगम के तत्कालीन नगर आयुक्त शांतनु अग्रहरि ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों को राज्यकर्मियों के समतुल्य पेंशन देना शुरू कर दिया। अब 9 साल तक पेंशन देने के बाद कटौती कर दी। वर्ष 2014 में निगम बोर्ड की बैठक के निर्णय का हवाला
सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन में कटौती के लिए एक कमेटी बनाई गई। इसमें अपर नगर आयुक्त संजय कुमार, उप नगर आयुक्त गौतम कुमार साहू, सहायक नगर आयुक्त दिलीप कुमार आदि शामिल थे। कमेटी ने 16 अक्टूबर 2014 को नगर निगम बोर्ड की बैठक में लिए गए निर्णय कि यदि राज्य सरकार स्थापना मद की तरह पेंशन मद में 70% की सहायता राशि देती है तो राज्यकर्मियों के समतुल्य पेंशन का लाभ दिया जाएगा। इसमें 30% राशि नगर निगम वहन करेगा। लेकिन राज्य सरकार से पेंशन मद में पैसा नहीं मिला तो इस आदेश को विलोपित कर दिया गया। कमेटी ने नगर विकास विभाग द्वारा 17 दिसंबर 2008 आैर 25 अप्रैल 2025 को भेजे गए पत्र का हवाला दिया, कहा कि बिहार म्यूनिसिपल ऑफिसर एंड सर्वेंट पेंशन रूल्स 1987 आैर पटना म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफिसर एंड सर्वेंट पेंशन रूल्स 1986 सामान्य रूप से प्रभावकारी हैं। इसी आधार पर पुरानी पेंशन व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया।
