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Hemant Soren surprises by giving ticket to Dalit outside the family, Baijnath becomes candidate

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रांची20 घंटे पहले

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राजनीति में ट्विस्ट: कांग्रेस के प्रणव झा, भाजपा के गौरव वल्लभ, झामुमो से बैजनाथ राम और निर्दलीय के रूप में नाथवानी व साईं रेड्डी ने पर्चा खरीदा है, लेकिन भाजपा अभी भी चुप है।

झारखंड में दो सीटों पर होने वाले राज्यसभा चुनाव ने राज्य के सियासी पारे को गरमा दिया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने गुरुजी की खाली हुई सीट पर सोरेन परिवार से किसी को चुनाव मैदान में न उतारकर सबको चौंका दिया है। शुक्रवार तक दोनों सीटों पर दावा ठोकने वाले झामुमो ने शनिवार को पूर्व मंत्री और केंद्रीय उपाध्यक्ष बैजनाथ राम को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। हालांकि, दूसरी सीट पर उम्मीदवार उतारने के सवाल पर पार्टी ने अभी कोई ठोस जवाब नहीं दिया है।

उधर, विधानसभा में भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने शुक्रवार रात दावा किया था कि शनिवार सुबह पार्टी के प्रत्याशी की घोषणा कर दी जाएगी। भाजपा प्रत्याशी के रूप में गौरव वल्लभ ने पर्चा भी खरीद लिया है, लेकिन शनिवार देर शाम तक पार्टी ने उनके नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की।

वहीं, कांग्रेस से प्रणव झा और झामुमो से बैजनाथ राम ने नामांकन पत्र खरीद लिया है। झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि बैजनाथ राम सोमवार को नामांकन पत्र भरेंगे, और उस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी मौजूद रहेंगे।

सीएम से मिले परिमल नाथवानी, निर्दलीय लड़ेंगे चुनाव

परिमल नाथवानी शनिवार रात आठ बजे रांची पहुंचे। वे एयरपोर्ट से सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कांके रोड स्थित आवास गए, जहां दोनों नेताओं के बीच करीब आधे घंटे तक मुलाकात हुई। मुलाकात के बाद नाथवानी ने कहा कि यह सिर्फ एक शिष्टाचार मुलाकात थी और राज्यसभा चुनाव पर कोई बात नहीं हुई। उन्होंने साफ किया कि वे इस बार झारखंड से बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। उनका नामांकन पत्र खरीदा जा चुका है और वे सोमवार को पर्चा दाखिल करेंगे।

राज्यसभा चुनाव में ‘पर्दे के पीछे’ का खेल

1. प्रस्तावक कौन? 10 विधायकों की ‘मिस्ट्री’ और 2 दिग्गजों की एंट्री

राज्यसभा के रण में परिमल नाथवानी और विजय साईं रेड्डी जैसे हैवीवेट निर्दलीयों की एंट्री ने चुनाव को बेहद दिलचस्प बना दिया है। नियम के अनुसार, नामांकन के लिए कम से कम 10 विधायकों का बतौर प्रस्तावक होना अनिवार्य है।

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अंदर की बात: झारखंड विधानसभा में बिना किसी बड़े दल की मूक सहमति या भितरघात के 10 विधायक जुटाना लगभग असंभव है। ऐसे में सियासी गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि वो हिडन (छिपे हुए) विधायक कौन हैं, जो इन दिग्गजों का प्रस्तावक बनने को तैयार बैठे हैं? क्या सत्ता व विपक्ष के भीतर सुलग रहा कोई असंतोष इसका कारण बनेगा या फिर यह हॉर्स ट्रेडिंग की कोई नई बिसात बिछेगी?

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2. भाजपा का ‘डार्क हॉर्स’ प्लान: चुप्पी के पीछे सेंधमारी की बिसात

गौरव वल्लभ ने नामांकन पत्र खरीद लिया है, लेकिन भाजपा ने अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। अधिकृत घोषणा में यह देरी अकारण नहीं है।

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अंदर की बात: भाजपा की यह चुप्पी उसकी मजबूरी नहीं, बल्कि प्लान-बी का हिस्सा मानी जा रही है। अगर पार्टी आधिकारिक तौर पर अपना प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारती है, तो इसका सीधा अर्थ है कि वह पर्दे के पीछे से किसी मजबूत निर्दलीय को समर्थन देने का मन बना चुकी है। सीधे मुकाबले में हारने के बजाय निर्दलीय के माध्यम से महागठबंधन के vote bank में सेंधमारी की जाए और असंतुष्ट विधायकों को साधा जाए।

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सीएम से मिले भूपेश व अजय, कहा- ‘ऑल इज वेल’

राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के ऑब्जर्वर भूपेश बघेल और अजय शर्मा ने शनिवार दोपहर सीएम हेमंत सोरेन से मुलाकात की। करीब दो घंटे चली मुलाकात के बाद दोनों पर्यवेक्षकों ने कहा कि सब कुछ ठीक है। राज्यसभा चुनाव में गठबंधन दोनों ही सीटों पर जीत हासिल करेगा। भूपेश बघेल ने कहा कि मुख्यमंत्री से अच्छी और खुलकर बातें हुई हैं, कोई गलतफहमी नहीं है और गठबंधन मजबूत है।

झामुमो ने बैजनाथ राम को ही क्यों चुना?

चंपाई सोरेन सरकार में मंत्री बनने की सूची में बैजनाथ राम का भी नाम शामिल था और यह सूची राजभवन भी पहुंच गई थी। लेकिन शपथ से ठीक पहले उन्हें रोक दिया गया, जिससे पार्टी पर दलितों की उपेक्षा का आरोप लगा। बाद में उनसे वादा किया गया था कि उन्हें उपयुक्त जगह दी जाएगी और इसीलिए उन्हें राज्यसभा प्रत्याशी बनाया गया है। इसके अलावा, कांग्रेस के ब्राह्मण उम्मीदवार उतारने के बाद झामुमो ने यह दलित कार्ड खेला है।

उम्मीदवारों का प्रोफाइल: एक नजर में

परिमल नाथवानी: उद्योगपति और अभी आंध्र प्रदेश से राज्यसभा के सांसद हैं। वे 2008 से 2020 तक लगातार 2 कार्यकाल के लिए झारखंड से निर्दलीय राज्यसभा सांसद रहे हैं। वे गुजरात के अहमदाबाद के द्वारकेशनंदी में रहते हैं।

प्रणव झा: कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और पार्टी के मीडिया रणनीतिकार हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से भी इनकी निकटता है। वे मूल रूप से भागलपुर जिले के अनादिपुर गांव के हैं और बोकारो से इनकी पढ़ाई-लिखाई हुई है। फिलहाल दिल्ली के साउथ एवेन्यू में रहते हैं।

गौरव वल्लभ: भाजपा के प्रमुख नेता, अर्थशास्त्री और शिक्षाविद हैं। अभी प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य हैं। एक्सएलआरआई (XLRI) जमशेदपुर व एसआईएसएस (SISS) रांची में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रहे हैं। वे राजस्थान के जोधपुर के हैं।

बैजनाथ राम: झामुमो के वरिष्ठ नेता हैं और झारखंड सरकार में मंत्री रह चुके हैं। झामुमो के अनुभवी और समर्पित कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते हैं। उन्हें पार्टी के एससी (SC) वर्ग के बड़े चेहरे के तौर पर देखा जाता है। वे मूल रूप से लातेहार के धोबी मुहल्ला के रहने वाले हैं।

साईं विजय रेड्डी: चार्टर्ड अकाउंटेंट और आंध्र प्रदेश के राजनेता हैं। वाईएसआर कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व आंध्र प्रदेश से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। उन्हें वाईएसआरसीपी प्रमुख जगनमोहन रेड्डी के करीबी और पार्टी का ‘चाणक्य’ माना जाता है। वे आंध्र प्रदेश के इस्कॉन सिटी नेल्लोर के हैं।

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