खास बातें
Tata Return Singur 2026: पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के सिंगूर में वर्ष 2006 से 2008 के बीच चले हिंसक राजनीतिक आंदोलनों के कारण रतन टाटा का ‘नैनो ड्रीम प्रोजेक्ट’ (Nano Dream Project) हमेशा के लिए बंद हो गया था. वही सिंगूर 18 साल बाद देश के सबसे बड़े कॉर्पोरेट घराने की मेजबानी के लिए सज रहा है.
टाटा की वापसी के लिए तैयार हो रहा रोडमैप
राज्य में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद, नवनिर्वाचित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने बंगाल की पुरानी ‘एंटी-इंडस्ट्री’ छवि को बदलकर ‘इन्वेस्टमेंट फ्रेंडली’ मेकओवर देने का मन बना लिया है. सरकार सिंगूर की उसी ऐतिहासिक जमीन पर टाटा समूह (Tata Group) की भव्य वापसी के लिए गुप्त और उच्चस्तरीय रोडमैप तैयार कर रही है.
सरकार का संदेश- निवेश के लिए सुरक्षित है बंगाल
यह केवल एक औद्योगिक प्रस्ताव नहीं है, देश के कॉरपोरेट जगत को यह संदेश देने की कोशिश है कि बंगाल अब बड़े विनिर्माण (Large-Scale Manufacturing) के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है. सिंगूर में लगभग 995 एकड़ की इस विवादित जमीन पर औद्योगिक गतिविधियों को दोबारा शुरू करने के लिए सरकार टाटा संस के शीर्ष अधिकारियों के साथ बातचीत की रूपरेखा तैयार कर रही है.
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Tata Return Singur 2026: सिर्फ कार नहीं, हर निवेश का स्वागत
सरकार की मंशा केवल टाटा मोटर्स के पैसेंजर व्हीकल बिजनेस को वापस लाने तक सीमित नहीं है. नयी नीति के तहत टाटा समूह की किसी भी अन्य बड़ी फ्लैगशिप कंपनी (जैसे टाटा स्टील, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स या टाटा पावर) के मेगा प्रोजेक्ट्स को सिंगूर में स्थापित करने के लिए खुली छूट दी जायेगी.
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दूर होगा जमीन और कानूनी पेचीदगियों का चक्रव्यूह
- वर्ष 2016 में देश की सर्वोच्च अदालत ने वामपंथी सरकार द्वारा किये गये सिंगूर भूमि अधिग्रहण को अवैध घोषित करते हुए 9,117 भू-स्वामियों को जमीन वापस करने का आदेश दिया था.
- वर्ष 2023 में मध्यस्थता न्यायाधिकरण (Arbitral Tribunal) ने टाटा मोटर्स के पक्ष में फैसला सुनाते हुए पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम (WBIDC) को नुकसान के बदले 770 करोड़ रुपए ब्याज सहित चुकाने का आदेश दिया था. इस आदेश को कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा था.
- शुभेंदु अधिकारी की सरकार इन सभी कानूनी पेचों से पार पाने के लिए संशोधित भूमि नीति और नयी उद्योग-अनुकूल नीति (Revised Industrial Policy) तैयार कर रही है, ताकि टाटा समूह को बिना किसी कानूनी डर के सुरक्षित माहौल दिया जा सके.
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रतन टाटा का वो दर्द और बंगाल की बर्बादी का दौर होगा खत्म
अक्टूबर 2008 में तत्कालीन विपक्ष के हिंसक प्रदर्शनों, सड़क जाम और फैक्टरी की दीवारों पर बमबाजी से तंग आकर रतन टाटा ने सिंगूर छोड़ने का फैसला किया था. रातोंरात इस प्रोजेक्ट को गुजरात के साणंद में शिफ्ट कर दिया गया. रतन टाटा ने तब भावुक होकर कहा था- आप उस जगह प्लांट नहीं चला सकते, जहां चारों तरफ से बम फेंके जा रहे हों. इस एक घटना ने बंगाल को अगले 2 दशकों के लिए औद्योगिक रूप से ‘बंजर’ बना दिया था.
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