सिल्ली-ईलू बाईपास रेल लाइन परियोजना का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। उपलब्ध भूमि पर लगभग 50 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, जबकि वर्तमान में रेलवे ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। यह परियोजना दक्षिण-पूर्व रेलवे की महत्वपूर्ण योजनाओं में शामिल है। इसके पूरा होने से रांची, टाटानगर तथा कोलकाता के बीच रेल यात्रा अधिक सुगम हो जाएगी। अभी रांची से मुरी होकर कोलकाता और टाटा की ओर जाने वाली ट्रेनों को मुरी जंक्शन पर इंजन रिवर्सल करना पड़ता है, जिसमें करीब 35 मिनट का समय लगता है। इसके अलावा सिल्ली से मुरी तक पहुंचने में भी लगभग 10 मिनट लगते हैं। नई बाईपास लाइन शुरू होने के बाद ट्रेनों को मुरी जंक्शन जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे यात्रियों का लगभग 45 मिनट का समय बचेगा। ट्रेनों का परिचालन भी अधिक तेज एवं सुविधाजनक होगा और मुरी स्टेशन का लोड भी घटेगा। उप मुख्य अभियंता (निर्माण) एनके मीणा ने बताया कि परियोजना का कार्य लगातार जारी है और मार्च 2028 के निर्धारित लक्ष्य से पहले इसके पूरा होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि 1.47 हेक्टेयर सरकारी भूमि के अधिग्रहण का प्रस्ताव भेजा जा चुका है और यह प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो जाएगी। वहीं 9.57 हेक्टेयर रैयती भूमि के अधिग्रहण के लिए जिला भूमि अधिग्रहण विभाग को भुगतान कर दिया गया है। रैयतों को मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। सिल्ली स्टेशन पर भी बढ़ रहीं सुविधाएं, क्षेत्र के लोगों को होगा सीधा फायदा सिल्ली रेलवे स्टेशन का भी तेजी से विस्तारीकरण किया जा रहा है। स्टेशन पर परिचालन संबंधी कार्यों को बेहतर बनाने के लिए नए भवन का निर्माण किया जा रहा है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, सिल्ली-ईलू बाईपास रेल लाइन के चालू होने का सबसे बड़ा लाभ सिल्ली क्षेत्र के लोगों को मिलेगा। अभी टाटानगर और कोलकाता मार्ग की ट्रेन पकड़ने के लिए यात्रियों को मुरी जाना पड़ता है। नई लाइन बनने के बाद उन्हें मुरी जाने की जरूरत नहीं होगी। रांची रेल मंडल की सीनियर डीसीएम श्रेया सिंह ने बताया कि ईलू-सिल्ली बाईपास रेलवे लाइन का मुख्य उद्देश्य ट्रेनों को मुरी जंक्शन पर रिवर्सल और अतिरिक्त परिचालन समय से बचाते हुए सीधा मार्ग उपलब्ध कराना है। परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है और इसके पूरा होने के बाद रेल संचालन अधिक सुगम एवं प्रभावी हो जाएगा। साथ ही यात्रा समय में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। बॉक्स – 1] सिल्ली-ईलू बाईपास लाइन एट ए ग्लेंस: लंबाई: 6 किमी. लंबी सिल्ली-ईलू बाईपास रेल लाइन का निर्माण चल रहा है। लागत: 137.23 करोड़ रुपये अनुमानित लागत। भूमि की स्थिति: 3.4 किमी. रेल लाइन के लिए भूमि अभी उपलब्ध है, जबकि शेष 11.04 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। रूट कनेक्टिविटी: रांची – सिल्ली – ईलू – कोटशिला/चांडिल/रामगढ़। बॉक्स – 2] 12.5 किमी. कानारोवां-टाटी सेक्शन का निरीक्षण हटिया-ओरगा डबल रेललाइन परियोजना के अंतिम चरण में मंगलवार और बुधवार को 12.5 किमी. लंबे कानारोवां-टाटी सेक्शन का महत्वपूर्ण निरीक्षण किया गया। रेलवे संरक्षा आयुक्त (CRS) बृजेश कुमार मिश्रा ने इसका गहन निरीक्षण किया। इस दौरान मंडल रेल प्रबंधक (DRM) रांची करुणा निधि सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
सिल्ली-ईलू ट्रैक बनने के बाद रांची से कोलकाता जाने में 45 मिनट कम लगेगा
सिल्ली-ईलू बाईपास रेल लाइन परियोजना का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। उपलब्ध भूमि पर लगभग 50 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, जबकि वर्तमान में रेलवे ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। यह परियोजना दक्षिण-पूर्व रेलवे की महत्वपूर्ण योजनाओं में शामिल है। इसके पूरा होने से रांची, टाटानगर तथा कोलकाता के बीच रेल यात्रा अधिक सुगम हो जाएगी। अभी रांची से मुरी होकर कोलकाता और टाटा की ओर जाने वाली ट्रेनों को मुरी जंक्शन पर इंजन रिवर्सल करना पड़ता है, जिसमें करीब 35 मिनट का समय लगता है। इसके अलावा सिल्ली से मुरी तक पहुंचने में भी लगभग 10 मिनट लगते हैं। नई बाईपास लाइन शुरू होने के बाद ट्रेनों को मुरी जंक्शन जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे यात्रियों का लगभग 45 मिनट का समय बचेगा। ट्रेनों का परिचालन भी अधिक तेज एवं सुविधाजनक होगा और मुरी स्टेशन का लोड भी घटेगा। उप मुख्य अभियंता (निर्माण) एनके मीणा ने बताया कि परियोजना का कार्य लगातार जारी है और मार्च 2028 के निर्धारित लक्ष्य से पहले इसके पूरा होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि 1.47 हेक्टेयर सरकारी भूमि के अधिग्रहण का प्रस्ताव भेजा जा चुका है और यह प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो जाएगी। वहीं 9.57 हेक्टेयर रैयती भूमि के अधिग्रहण के लिए जिला भूमि अधिग्रहण विभाग को भुगतान कर दिया गया है। रैयतों को मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। सिल्ली स्टेशन पर भी बढ़ रहीं सुविधाएं, क्षेत्र के लोगों को होगा सीधा फायदा सिल्ली रेलवे स्टेशन का भी तेजी से विस्तारीकरण किया जा रहा है। स्टेशन पर परिचालन संबंधी कार्यों को बेहतर बनाने के लिए नए भवन का निर्माण किया जा रहा है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, सिल्ली-ईलू बाईपास रेल लाइन के चालू होने का सबसे बड़ा लाभ सिल्ली क्षेत्र के लोगों को मिलेगा। अभी टाटानगर और कोलकाता मार्ग की ट्रेन पकड़ने के लिए यात्रियों को मुरी जाना पड़ता है। नई लाइन बनने के बाद उन्हें मुरी जाने की जरूरत नहीं होगी। रांची रेल मंडल की सीनियर डीसीएम श्रेया सिंह ने बताया कि ईलू-सिल्ली बाईपास रेलवे लाइन का मुख्य उद्देश्य ट्रेनों को मुरी जंक्शन पर रिवर्सल और अतिरिक्त परिचालन समय से बचाते हुए सीधा मार्ग उपलब्ध कराना है। परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है और इसके पूरा होने के बाद रेल संचालन अधिक सुगम एवं प्रभावी हो जाएगा। साथ ही यात्रा समय में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। बॉक्स – 1] सिल्ली-ईलू बाईपास लाइन एट ए ग्लेंस: लंबाई: 6 किमी. लंबी सिल्ली-ईलू बाईपास रेल लाइन का निर्माण चल रहा है। लागत: 137.23 करोड़ रुपये अनुमानित लागत। भूमि की स्थिति: 3.4 किमी. रेल लाइन के लिए भूमि अभी उपलब्ध है, जबकि शेष 11.04 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। रूट कनेक्टिविटी: रांची – सिल्ली – ईलू – कोटशिला/चांडिल/रामगढ़। बॉक्स – 2] 12.5 किमी. कानारोवां-टाटी सेक्शन का निरीक्षण हटिया-ओरगा डबल रेललाइन परियोजना के अंतिम चरण में मंगलवार और बुधवार को 12.5 किमी. लंबे कानारोवां-टाटी सेक्शन का महत्वपूर्ण निरीक्षण किया गया। रेलवे संरक्षा आयुक्त (CRS) बृजेश कुमार मिश्रा ने इसका गहन निरीक्षण किया। इस दौरान मंडल रेल प्रबंधक (DRM) रांची करुणा निधि सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

