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पूर्णिया में LIC एजेंट के बेटे ने देश की सबसे कठिन परीक्षा यूपीएससी में अपना परचम लहराया है। यूपीएससी परीक्षा में 537वीं रैंक मिली है। बचपन से ही प्रतिभाशाली रहे सौरभ रंजन ने UPSC की तैयारी के लिए 48 लाख की पैकेज वाली जापान की नौकरी ठुकरा दी। भारत आक
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सौरभ रंजन बनमनखी प्रखंड के काझी गांव के रहने वाले हैं। साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता राज किशोर झा एलआईसी एजेंट हैं, जबकि मां साधना कुमारी आंगनबाड़ी सेविका हैं। तीन भाई-बहनों में सौरभ सबसे छोटे हैं। बड़े भाई सर्वेश रंजन किशनगंज में बिजली विभाग में असिस्टेंट इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी बहन की शादी हो चुकी है। जीजा एसबीआई बैंक में बड़े अधिकारी हैं।
2013 में आईआईटी मुंबई में दाखिला
सौरभ की शुरुआती पढ़ाई बनमनखी के मध्य विद्यालय काझी से हुई। बचपन से ही काफी होनहार थे। दशवी के इक्वेशन वे क्लास सेवेंथ में ही सॉल्व करने लगे थे। इसके बाद उन्होंने डॉन बोस्को स्कूल से सीबीएसई बोर्ड से 2010 में मैट्रिक और 2012 में पूर्णिया से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। इंटर के बाद आईआईटी की तैयारी के लिए राजस्थान के कोटा चले गए। बचपन से उनका सपना आईआईटी मुंबई में पढ़ाई करने का था। कड़ी मेहनत के बाद 2013 में उनका दाखिला आईआईटी मुंबई में मटेरियल इंजीनियरिंगमें हो गया।
जापान में 4 साल तक काम किया
2013 से 2017 तक आईआईटी मुंबई से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। पढ़ाई के दौरान ही थर्ड ईयर में उन्हें प्री-प्लेसमेंट ऑफर के तहत अमेरिका जाने का मौका मिला। साल 2017 में 48 लाख के भारी भरकम पैकेज पर जापान में नौकरी करने चले गए। जहां उन्होंने चार साल तक काम किया। हालांकि उनका सपना सिर्फ अच्छी नौकरी तक सीमित नहीं था। कुछ अलग करने और वतन लौटने की चाहत ने उन्हें फिर से भारत लौटने के लिए प्रेरित किया।
चौथे प्रयास में मिली सफलता
जापान की नौकरी छोड़कर वे दिल्ली आ गए और सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। साल 2022 से उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की। इससे पहले दूसरे और तीसरे प्रयास में वे परीक्षा के अलग-अलग चरणों को पार कर चुके थे, लेकिन अंतिम सफलता नहीं मिल सकी थी। आखिरकार चौथे प्रयास में सौरभ रंजन ने UPSC जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षा में बाजी मारी। 537वीं रैंक हासिल कर अपना परचम लहराया। उनकी सफलता की खबर मिलते ही परिवार और गांव में खुशी की लहर दौड़ गई।
सफलता का श्रेय माता-पिता को दिया
सौरभ रंजन की इस कामयाबी के बाद घर पर बधाई देने वालो का तांता लगा हुआ है। सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के संघर्षों को देते हैं। शिक्षकों और परिवार के सहयोग को देते हैं। उनका कहना है कि कड़ी मेहनत, धैर्य और निरंतर प्रयास से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से भी अपील की कि वे अपने सपनों को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत करते रहें और कभी हार न मानें।




