Bihar Zoo Animals Summer Diet Change

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पटना जू की शेरनी ‘पार्वती’ जल्द राजगीर सफारी में शिकार करती नजर आएगी। अब तक पिंजरे में बंद रही पार्वती को खुली जगह मिलेगी। राजगीर सफारी में शेर और बाघ जैसे जानवरों को बड़े इलाके में रखा जाता है। माहौल जंगल वाला मिलता है। इनके बाड़े में कोई जानवर आ जा

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गर्मी का मौसम आ रहा है। पटना जू से लेकर राजगीर सफारी तक, बदलते मौसम को देखते हुए जानवरों के भोजन में बदलाव किया गया है। मांस की खुराक कम की गई है। शेर और बाघ को मार्च-अप्रैल की गर्मी से बचाने के लिए बर्फ के टुकड़े दिए जाएंगे।

पटना जू और राजगीर सफारी में गर्मी के दिनों में बाघ, शेर और दूसरे जानवरों के लिए क्या इंतजाम किए जा रहे हैं? बिहार में बाघों की संख्या कितनी है? वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा कितना बढ़ा है? पढ़िए खास रिपोर्ट…।

सबसे पहले जानिए पटना जू का हाल, मार्च में दिखेंगी दो लेडी लॉयन

पटना जू में मार्च में दो मादा शेर दिखेंगी। वन्यजीव अदला-बदली कार्यक्रम के तहत राजगीर जू सफारी से दो मादा शेर (सीता और गीता) को पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान (पटना जू) लाया गया था।

बदले में पटना जू की एकमात्र शेरनी ‘पार्वती’ को राजगीर जू सफारी भेजा गया है। राजगीर से आई दो मादा शेर को 30 दिनों के क्वारंटाइन में रखा गया है। ये चिड़ियाघर जाने वाले लोगों की नजरों से दूर विशेष निगरानी में हैं।

दोनों शेरनियों को खाने के लिए मिल रहा 23 kg मांस

जू प्रशासन ने बताया है कि सीता और गीता सगी बहनें हैं। इनकी उम्र 1 वर्ष से कम है। दोनों को रोज सुबह 8 बजे खुले इलाके में खोल दिया जाता है ताकि उन्हें धूप और ताजी हवा मिल सके। इससे दोनों टहलकर एक्सरसाइज कर लेती हैं।

शाम को 5 बजे दोनों नाइट हाउस में आ जाती हैं। यहां उन्हें करीब 23 kg मांस खाने के लिए दिया जाता है। मांस में एक्स्ट्रा मिनरल्स और विटामिन की दवाएं मिलाकर दी जा रही हैं। दोनों के वजन रेगुलर चेक किए जा रहे हैं।

राजगीर जू सफारी से दो मादा शेर को पटना जू लाया गया है।

राजगीर जू सफारी से दो मादा शेर को पटना जू लाया गया है।

नए माहौल में ढालने के लिए क्वारंटाइन जरूरी

जू प्रशासन का कहना है कि एक जगह से दूसरे जगह ले जाने पर अक्सर जानवर तनाव में आ जाते हैं। इसलिए उन्हें शांत वातावरण में रखना और नए माहौल के अनुसार ढालना जरूरी है।

वातावरण बदलने से जानवर बीमार ना पड़ें, इसका ध्यान रखा जाता है। क्वारंटाइन किए जाने से इसमें मदद मिलती है। क्वारंटाइन अवधि समाप्त होने के बाद इन्हें बाड़े में छोड़ा जाएगा ताकि आम लोग देख सकें। पटना जू में अभी 6 बाघ हैं। इनमें तीन नर (विक्रम, नकुल और बादशाह ) और तीन मादा (रानी, संगीता और भवानी) हैं।

गर्मी में जानवरों के खाने-पीने में होगा बदलाव

अब गर्मी आ रही है। इसे देखते हुए जानवरों के खाने-पीने में बदलाव किया जा रहा है। जू प्रशासन के मुताबिक अप्रैल में जानवरों का भोजन बदला जाएगा। जिस तरीके से जानवर खाना खाएंगे या छोड़ेंगे, उस हिसाब से उनके डाइट चार्ट को बदला जाता है।

गर्मी बढ़ते ही कम हो जाता है बाघ-शेर का भोजन

गर्मी बढ़ते ही बाघ-शेर का भोजन कम हो जाता है। प्रति जानवर 11 kg की जगह 9 kg मीट दिया जाता है। बाघ और शेर की गुफाओं को ठंडा रखने के लिए कूलर लगाया जाता है। इसके साथ ही जानवरों को पानी में ग्लूकोज और मल्टीविटामिन की गोली मिलाकर दी जाएगी ताकि उनकी ऊर्जा बनी रहे और लू से बच सकें।

दही-चावल खाता और नारियल पानी पीता है चिम्पांजी

वहीं, गर्मी के दिनों में चिम्पांजी दही-चावल खाने के साथ ही नारियल पानी पीने लगता है। उसे अंगूर, सेब, केला और अनार सहित अन्य मौसमी फल दिए जाते हैं ताकि बॉडी में पानी की कमी न हो।

वहीं, हाथी को ईख की जगह केले का थम मिलने लगता है। भालू खीर खाते हैं और झरने में नहाते हैं। जानवरों को धूप से बचाने के लिए शेड की व्यवस्था की जाती है। लू और गर्म हवा से बचाव के लिए बाड़े को पुआल से ढंका जाता है।

गर्मी के दिनों में पटना जू में वाटर स्प्रिंकलर लगाए जाते हैं।

गर्मी के दिनों में पटना जू में वाटर स्प्रिंकलर लगाए जाते हैं।

पक्षियों के बाड़े में चलाए जाते हैं फॉगर

पक्षियों के बाड़े में तपिश कम करने के लिए वाटर स्प्रिंकलर लगाए जाते हैं। इससे लगातार पानी का छिड़काव किया जाता है। जलीय पक्षियों के बाड़े में फॉगर लगाया जाता है।

पक्षियों को पीने के लिए दिए जाने वाले पानी को दिन में दो बार बदला जाता है। बर्ड फ्लू को देखते हुए हर सोमवार को पक्षियों के बाड़े में हल्दी ट्रीटमेंट किया जाता है ताकि बीमारी न फैले।

ठंड में 70 kg तो गर्मी में 50 kg मांस खाते हैं शेर और बाघ

पटना जू के छह टाइगर और दो शेर दिन में एक बार शाम को 5 बजे खाना खाते हैं। सभी को मिलाकर रोज करीब 70kg मांस खाने के लिए दिया जाता है। गर्मी के दिनों में ये जानवर मिलकर रोज 50 kg मांस खाते हैं।

अब चलिए, राजगीर जू सफारी, होली बाद दिखेगा सफेद बाघ

191.12 हेक्टेयर में फैले राजगीर जू सफारी में बाघ और शेर जैसे जानवरों को जंगल वाले माहौल में देखने का मौका मिलता है। होली के बाद यहां नया सफेद बाघ दिखेगा। पटना जू से लाई गई शेरनी ‘पार्वती’ को अभी क्वारंटाइन में रखा गया है। जल्द ही इसे खुले बाड़े में छोड़ा जाएगा।

राजगीर जू सफारी में आप शेर और बाघ जैसे जंगली जानवरों को खुला घूमते देख सकते हैं।

राजगीर जू सफारी में आप शेर और बाघ जैसे जंगली जानवरों को खुला घूमते देख सकते हैं।

राजगीर जू सफारी के डायरेक्टर राम सुंदर एम. ने बताया कि यहां कुल छह बाघ हैं। पहले से ही सफेद बाघ मौजूद है। हाल ही में पटना जू से एक और नया सफेद बाघ लाया गया है। वह फिलहाल क्वारंटाइन में है।

उन्होंने कहा, ‘हमारी कोशिश है कि होली के बाद नए सफेद बाघ को आम लोगों के देखने के लिए खुले बाड़े में छोड़ दिया जाए। यहां शेरों के कुनबे को भी बढ़ाया गया है। वर्तमान में यहां 10 शेर हैं। इनमें हाल ही में पटना से लाई गई ‘पार्वती’ नामक शेरनी भी शामिल है। सफारी में जन्मे सात शावकों में से दो शावक पटना जू को दिए गए हैं। 5 शावक अभी राजगीर सफारी में पर्यटकों को लुभा रहे हैं।’

गर्मी के दिनों में शेर-बाघ को दिए जाते हैं आइस क्यूब

गर्मी का मौसम आ रहा है। शेर और बाघ जैसे जानवरों के खान-पान में कितना बदलाव होगा? इस सवाल पर राम सुंदर एम. ने कहा, ‘मांसाहारी जानवरों के मुख्य भोजन में ज्यादा बदलाव नहीं होता। गर्मी हो या सर्दी वे मांस ही खाते हैं। उन्हें गर्मी से राहत मिले, इसके लिए कई तरह के इंतजाम किए जाते हैं।’

उन्होंने कहा, ‘सर्दियों में जानवरों के लिए हीटर की व्यवस्था की गई थी। अब मार्च-अप्रैल की चिलचिलाती गर्मी व लू से बचाने के लिए बाघों और शेरों को बर्फ के टुकड़े (आइस क्यूब) दिए जाएंगे। इससे उन्हें ठंडक मिलती है। वे इसी बहाने पानी भी पीते हैं।’

राजगीर जू सफारी का उद्घाटन 16 फरवरी 2022 को किया गया था। यहां की बेहतरीन व्यवस्था और प्राकृतिक माहौल पर्यटकों को लुभा रहा है। बनारस से राजगीर घूमने आए एक पर्यटक ने कहा, ‘खुले जंगल में बाघ और शेर को आजाद घूमते देखना बेहद अद्भुत अनुभव है।’

राजगीर सफारी में बनेंगे शेर और गैंडों के प्रजनन केंद्र

राजगीर जू सफारी को वन्यजीवों के लिहाज से और भी अधिक समृद्ध और आकर्षक बनाने की योजना तैयार कर ली गई है। पटना जू की तर्ज पर राजगीर में गैंडों के लिए सैटेलाइट ब्रीडिंग सेंटर और शेरों के लिए अलग से कंजर्वेशन-ब्रीडिंग सेंटर विकसित किया जाएगा।

सफारी में पर्यटकों के रोमांच को बढ़ाने के लिए गौर और चिंकारा जैसे नए वन्यजीव लाए जाएंगे। विदेशी तर्ज पर पक्षियों के लिए एक अत्याधुनिक ‘बर्ड एवेरी’ (पक्षी विहार) का निर्माण किया जाना है। वहीं, वन्यजीवों के बेहतर स्वास्थ्य और इलाज के लिए सफारी के वर्तमान अस्पताल को आधुनिक उपकरणों से लैस कर इसे देश के एक अनूठे वन्यजीव अस्पताल का रूप दिया जाएगा।

अब चलिए, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व, यहां बढ़ रही बाघों की आबादी

बिहार के इकलौते टाइगर रिजर्व VTR (वाल्मीकि टाइगर रिजर्व) में बाघों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। 901.07 वर्ग किलोमीटर में फैला यह जंगल बेहतर मैनेजमेंट और कम इंसानी दखल के चलते बाघों को खूब रास आ रहा है।

यहां 16 साल में बाघों की संख्या 8 गुना से ज्यादा बढ़ी है। 2010 में यहां सिर्फ 8 बाघ थे। नई रिपोर्ट के अनुसार VTR में बाघों की संख्या 70 तक पहुंच गई है। सही आंकड़ा बाघ दिवस 29 जुलाई को जारी होगा।

VTR में बाघों की संख्या

वर्ष बाघ
2010 8
2014 28
2018 31
2022 54
2026 70

गर्मी में ज्यादा एक्टिव रहते हैं जंगली जानवर

गर्मी में जानवरों का मूवमेंट अधिक रहता है, जबकि सर्दियों में कम हो जाता है। गर्मियों में हिरण खूब दिखते हैं। यहां आप चार तरह के हिरण (चीतल, सांभर, बार्किंग डियर और हॉग डियर) देख सकते हैं।

जानवर सुबह और शाम को ज्यादा एक्टिव रहते हैं। दोपहर में आराम करते हैं। सर्दी समाप्त होने और गर्मी आने से पहले वीटीआर प्रशासन जानवरों की सुरक्षा के लिए दो काम करता है।

1. फायर लाइन कटिंग

गर्मी के दिनों में जंगल में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। इससे वन्य जीव और जंगल पर खतरा बढ़ जाता है। आग से बचाव के लिए जंगल में फायर लाइन खींची जाती है। मतलब पेड़ों और झाड़ियों को काटकर सीधी रेखा में साफ जगह बनाई जाती है। इस पर गिरे सूखे पत्तों को भी लगातार हटाया जाता है।

जंगल में अगर आग लग जाए तो ये लाइन उसे आगे बढ़ने से रोकते हैं। इससे आग बुझाने में आसानी होती है।

2. पानी की सप्लाई

गर्मी के दिनों में जंगल में मौजूद पानी के प्राकृतिक स्रोत जैसे (पोखर, नाले, छोटी नदी) सूख जाते हैं। ऐसे में जानवरों को पीने के पानी की कमी न हो इसके लिए जगह-जगह पर पानी के हॉज बनाए गए हैं।

गर्मी के पूरे मौसम में इन हॉज तक पानी की सप्लाई की जाती है। बहुत से वाटर हॉज जंगल सफारी के रास्ते के करीब बनाए गए हैं ताकि पर्यटक पानी पीने आए जानवर को देख सकें।

गंडक नदी में 10 साल में 7 गुना बढ़ी घड़ियालों की संख्या

बिहार की गंडक नदी में कभी खत्म होने के कगार पर पहुंच चुके घड़ियाल अब बड़ी संख्या में नजर आने लगे हैं। वन विभाग और WTI (Wildlife Trust of India) के संयुक्त प्रयास से यह बदलाव संभव हुआ है।

अधिकारियों के अनुसार 2015 में गंडक नदी में केवल 54 घड़ियाल दर्ज किए गए थे। 2025 में इनकी संख्या बढ़कर 400 हो गई। घड़ियालों की संख्या 10 साल में सात गुना से ज्यादा बढ़ी। 2010-11 में यहां सिर्फ 10 घड़ियाल देखे गए थे।

कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स एवं फील्ड डायरेक्टर नेशामणि के. ने बताया कि VTR से होकर बहने वाली गंडक नदी घड़ियालों के लिए अनुकूल आवास साबित हो रही है। बेहतर प्रबंधन और संरक्षण के कारण हर साल इनकी संख्या 20-25% बढ़ रही है।

उन्होंने कहा, ‘2015 से 2025 के बीच वाल्मीकिनगर से सोनपुर तक 326 km क्षेत्र में 944 हैचलिंग घड़ियाल (अंडे से निकले छोटे बच्चे) नदी में छोड़े गए। गंडक में बड़े और छोटे घड़ियालों की कुल संख्या 1000 से अधिक आंकी जा रही है।’

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के पास गंडक नदी के किनारे मौजूद घड़ियाल के बच्चे।

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के पास गंडक नदी के किनारे मौजूद घड़ियाल के बच्चे।

चंबल के बाद गंडक नदी में सबसे अधिक घड़ियाल

23 जनवरी से 1 फरवरी तक 10 दिनों तक चले सर्वे में वाल्मीकिनगर बैराज से हाजीपुर तक 310 किलोमीटर क्षेत्र में करीब 400 घड़ियाल देखे गए। यह सर्वे WTI के फील्ड ऑफिसर शांतम ओझा के नेतृत्व में किया गया। 2026 में गंडक नदी, चंबल के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी घड़ियाल आबादी वाली नदी बन गई है।

घड़ियाल को 2007 में IUCN (International Union for Conservation of Nature) ने बेहद संकटग्रस्त श्रेणी में रखा था। 2019 के आकलन में दुनियाभर में करीब 650 वयस्क घड़ियाल होने का अनुमान जताया गया था।

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