चतरा सदर अस्पताल में सरकार द्वारा किए जा रहे मुफ्त इलाज के दावे जमीनी हकीकत से बिल्कुल उलट नजर आ रहे हैं। अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे मरीजों को न तो पूरी दवाएं मिल पा रही हैं और न ही मुफ्त जांच की सुविधाएं। अस्पताल में उम्मीद लेकर आने वाले मरीजों क
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अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि जिन सेवाओं को सरकार मुफ्त बताती है, उन्हीं के लिए मरीजों से पैसे मांगे जा रहे हैं। यह स्थिति न सिर्फ स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों को उजागर करती है, बल्कि गरीब मरीजों की मजबूरी का भी आईना दिखाती है।

इलाज कराने पहुंचे संदीप कुमार को छह दवाओं में से सिर्फ तीन ही दवाएं दी गई।
दवा और जांच में कटौती, मरीज परेशान
सदर अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे संदीप कुमार इसका ताजा उदाहरण हैं। पैर में गंभीर फ्रैक्चर के बावजूद उन्हें डॉक्टर द्वारा लिखी गई छह दवाओं में से सिर्फ तीन ही दवाएं उपलब्ध कराई गईं।
इतना ही नहीं, एक्स-रे कराने के लिए उनसे 255 रुपए की मांग की गई। अस्पताल प्रशासन का तर्क था कि उनके पास राशन कार्ड नहीं है। इसी तरह एक अन्य मरीज चंदन कुमार यादव को सात में से केवल एक दवा देकर लौटा दिया गया।

शांति देवी ने बताया हाथ में फ्रैक्चर है। उनके पास एक्स-रे के लिए पैसे नहीं थे। 255 रुपए नहीं दे पाने की वजह से जांच नहीं हो सका।
इलाज नहीं दर्द के साथ लौटे मरीज
इस अव्यवस्था की सबसे मार्मिक तस्वीर सदर थाना क्षेत्र के बरेली गांव की शांति देवी की कहानी में दिखती है। हाथ में फ्रैक्चर होने के बावजूद उनके पास एक्स-रे के लिए 255 रुपए नहीं थे। पैसों की कमी के कारण उन्हें बिना जांच कराए ही अस्पताल से वापस लौटना पड़ा।
आंखों में आंसू और दर्द के साथ घर लौटते हुए शांति देवी ने कहा कि आखिर गरीबों के लिए सरकारी अस्पताल किस हद तक सहारा बन पा रहे हैं। मुफ्त इलाज का दावा करने वाली व्यवस्था में बिना पैसे के काम नहीं हो रहा।

अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. पंकज कुमार से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि संस्थान है तो कमियां रहेंगी ही।
संस्थान है तो कमियां रहेंगी ही
जब इन अव्यवस्थाओं और कथित वसूली के आरोपों को लेकर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. पंकज कुमार से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि संस्थान है तो कमियां रहेंगी ही। हमारे आपके घरों में भी होती हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी है। 31 की जरूरत के मुकाबले सिर्फ 19 डॉक्टर ही कार्यरत हैं।

