
आइआइटी-आइएसएम में ऑयल एंड गैस इंडस्ट्री में एआई/एमएल के अनुप्रयोग विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला की शुरुआत गुरुवार को हुई. उद्घाटन सत्र में विशेषज्ञों ने पेट्रोलियम क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग की बढ़ती भूमिका पर विस्तार से चर्चा की. निदेशक प्रो सुकुमार मिश्रा ने एआई और एमएल के विकास की यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि आज का दौर पूरी तरह डेटा आधारित निर्णयों का है. उन्होंने कहा कि आइओटी से उत्पन्न विशाल डेटा उद्योग के लिए नए अवसर लेकर आया है, लेकिन इसके साथ डेटा की गुणवत्ता और अनिश्चितता जैसी चुनौतियां भी हैं. उन्होंने जोर दिया कि इंजीनियरों को एआई के निष्कर्षों को समझदारी से व्याख्यायित कर सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करनी होगी, ताकि तेल एवं गैस जैसे जटिल क्षेत्रों में बेहतर परिणाम मिल सकें. पेट्रोलियम इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष प्रो विकास महतो ने कहा कि पेट्रोलियम क्षेत्र अत्यंत जटिल और लागत-प्रधान है, जहां एआई/एमएल तकनीकें दक्षता बढ़ाने और जोखिम कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं. कार्यक्रम की शुरुआत में डीन (सतत शिक्षा कार्यक्रम) प्रो केका ओझा ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य उद्योग और शिक्षाविदों के बीच सहयोग को मजबूत करना है. उन्होंने कहा कि सत्रों में व्यावहारिक प्रशिक्षण, विशेषज्ञ व्याख्यान और केस स्टडी के माध्यम से रिजर्वायर कैरेक्टराइजेशन, प्रदर्शन पूर्वानुमान और आर्थिक निर्णय प्रक्रिया पर फोकस किया जाएगा. पहले दिन जोखिम और अनिश्चितता, सीस्मिक फेसिस विश्लेषण, एआई के औद्योगिक उपयोग तथा जियोमैकेनिक्स जैसे विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित हुए. आने वाले दिनों में सबसरफेस मॉडलिंग, एजेंटिक एआई, प्रोडक्शन डेटा एनालिसिस, न्यूरल नेटवर्क और उद्योग आधारित केस स्टडी पर चर्चा होगी. कार्यशाला समन्वयक प्रो सायंतन घोष ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया.
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