Hindu Nav Varsh Predictions 2026:60 वर्षो बाद दोबारा से आया ‘रौद्र संवत्सर’, देश-दुनिया में होंगे अहम बदलाव – Hindu Nav Varsh Predictions 2026 Raudra Samvatsar 2083 Some Dangerous Predictions For War Politics Business An

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हिंदू धर्म में चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का सबसे खास महत्व होता है। यह तिथि हिंदू कैलेंडर का नववर्ष का शुभारंभ का दिन माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नया संवत्सर आरंभ होता है। चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि से नया विक्रम संवत 2083 प्रारंभ होने जा रहा है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार नया विक्रम संवत 2083 को ‘रौद्र संवत्सर’ के नाम से जाना आएगा। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार संवत्सर 60 वर्षो का चक्र होता है। जिसका हर वर्ष अलग-अलग नाम होता है। चैत्र नवरात्रि से यानी 19 मार्च 2026 से नए हिंदू नवर्ष की शुरू होने जा रही है और यह  ‘रौद्र संवत्सर’ लगभग 60 वर्षों के बाद दोबारा से बनने जा रहा है। इससे पहले साल 1966 में यह संवत्सर बना था। उस समय भी दुनिया में युद्ध और वैश्चिक  राजनीतिक में बड़े-बड़े बदलाव देखने को मिले थे। आइए ज्योतिष के नजरिए से देखते है आने वाले समय में   ‘रौद्र संवत्सर’ के अनुसार देश-दुनिया में क्या-क्या महत्व पूर्ण बदलाव आ सकता है। 

ज्योतिष में ‘रौद्र संवत्सर’ का महत्व

हिंदू धर्म में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि से नया हिंदू कैलेंडर की शुरुआत हो जाती है। अंग्रेजी कैलेंडर के तारीख के अनुसार नया हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 19 मार्च 2026 से शुरू होकर 07 अप्रैल 2027 तक रहेगा। इस वर्ष ‘रौद्र संवत्सर’ होगा जिसका ज्योतिष में विशेष महत्व है। इस वर्ष के राजा देवगुरु बृहस्पति होंगे और मंत्री पद मंगल देव का प्राप्त होगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गुरु को सबसे बड़ा और शुभ ग्रह माना जाता है। ये इस वर्ष राजा की भूमिका में होंगे वहीं मंगल जो युद्ध, साहस और पराक्रम के कारक ग्रह होते हैं वे मंत्री पद की जिम्मेदारी उनके ऊपर होगी। ऐसे में देश-दुनिया में कई तरह के बदलाव, संघर्ष, आपदाएं, बड़ी-बड़ी घटनाएं घटित होंगी। 

‘रौद्र संवत्सर’ की कुछ भविष्यवाणियां

देशों के बीच युद्ध बढ़ने की आशंका

‘रौद्र संवत्सर’ के शुरू होने से पहले ही पश्चिम एशिया में अमेरिका- इजराइल और ईरान के बीच तनाव चरम पर जारी है। ऐसे में 19 मार्च से नया विक्रम संवत 2083 के शुरू होने के बाद 60 वर्षों बाद दोबारा से ‘रौद्र संवत्सर’ आने से भविष्य में तनाव के बढ़ने की आशंका ज्यादा है। इसके अलावा दूसरे क्षेत्रों में भी युद्ध जैसी स्थिति बन सकती है। वहीं भारत के संदर्भ में देखा जाए तो आने वाले समय में देश के भीतर और बाहर दोनों जगहों पर अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी। इस दौरान पड़ोसी देशों के बीच तनाव बढ़ सकता है। 

राजनीति में उथल-पुथल की आशंका

वहीं नया  ‘रौद्र संवत्सर’ के शुरू होने पर दुनिया में राजनीति में कई तरह की हलचलें और परिवर्तन देखने को मिल सकता है। इस दौरान कुछ बड़े प्रभावशाली नेताओं के निधन की सूचना मिल सकती है। इससे अलावा कई देशों में सत्ता परिवर्तन के योग भी बनेंगे। कई देशों में नई तरह की राजनीतिक ताकतों में ऊभार भी देखने को मिल सकता है। वहीं अगर भारत से संदर्भ में देखा जाए तो नीतियों में बदलाव या फिर नए तरह के कानून की रूपरेखा देखने को मिल सकती है। 

‘रौद्र संवत्सर’ में कुछ अंतरराष्ट्रीय समझौते 

युद्ध के बीच आने वाले समय में वैश्विक मंचों पर कई तरह के नए समझौते भी देखने को मिल सकते हैं। ये अंतरराष्ट्रीय समझौते राजनीति, कूटनीति और व्यापार से संबंधित हो सकते हैं जिसका दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकता है। 

‘रौद्र संवत्सर’ में विज्ञान और AI में ऊंचा मुकाम

‘रौद्र संवत्सर’ में मंत्री की भूमिका मंगल और राजा की भूमिका में देवगुरु बृहस्पति होंगे। ऐसे में आने वाले समय में विज्ञान और तकनीक के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है। दुनिया में अंतरिक्ष मिशनों को लेकर कंपटीशन बढ़ सकता है। भारत समेत कई देश इस क्षेत्र में आगे से तेजी से बढ़ेंगे। आने वाले समय में AI की तकनीक में तेजी से विकास देखने को मिलेगा। आने वाले कुछ महीनों में AI की भूमिका बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी। 

शिक्षा में बदलाव का समय 

नया विक्रम संवत 2083 में ‘रौद्र संवत्सर’ देश के कानून और नीति-नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव हो सकते हैं। इस दौरान शिक्षा के क्षेत्र में बड़े सुधार देखने को मिले सकते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक का बोलबाला रह सकता है। 

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