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LPG आपूर्ति बाधित, ग्रामीण क्षेत्रों में लकड़ी की मांग बढ़ी:गैस के लिए एजेंसियों पर लग रही लंबी कतारें, लोग पारंपरिक चूल्हे की ओर लौटे


झारखंड में रसोई गैस सिलेंडर की आपूर्ति बाधित होने और बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं, खासकर मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गिरिडीह जिले के शहरी और ग्रामीण बाजारों में इसका स्पष्ट प्रभाव देखा जा रहा है। ग्रामीणों क्षेत्रों में सुबह से देर शाम तक लकड़ी बेचने वाली दुकानों पर लोगों की भीड़ उमड़ रही है। महिलाएं, पुरुष और बुजुर्ग बड़ी संख्या में लकड़ी खरीदने पहुंच रहे हैं और कई जगहों पर उन्हें इंतजार भी करना पड़ रहा है। स्थानीय महिलाओं ने बताया कि पहले महीने में एक या दो बार गैस सिलेंडर से घर का काम चल जाता था, लेकिन अब बढ़ती कीमतों के कारण यह संभव नहीं है। उपभोक्ताओं को गैस एजेंसियों पर लंबी कतारें और केवाईसी से जुड़ी तकनीकी परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा है। कई लोगों का कहना है कि घंटों लाइन में लगने के बावजूद उन्हें समय पर रसोई गैस नहीं मिल पा रही है। गैस की अनियमित आपूर्ति भी एक बड़ी समस्या
इन समस्याओं के कारण लोग पारंपरिक चूल्हे का सहारा लेने को मजबूर हैं। ग्रामीण इलाकों से आए लोगों ने बताया कि वे पहले आंशिक रूप से लकड़ी और गैस दोनों का उपयोग करते थे, लेकिन अब पूरी तरह लकड़ी पर निर्भर होना पड़ रहा है। गैस की अनियमित आपूर्ति भी एक बड़ी समस्या है, जिसके चलते कई परिवार अपने घरों के बाहर लकड़ी का भंडारण कर रहे हैं। लकड़ी के दाम में 10 से 20% तक की बढ़ोतरी
लकड़ी विक्रेताओं के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में बिक्री में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। पहले जहां सीमित मात्रा में लकड़ी बिकती थी, अब रोजाना कई क्विंटल लकड़ी बिक रही है। बढ़ती मांग के कारण लकड़ी के दामों में भी 10 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दुकानदारों का कहना है कि यदि मांग इसी तरह बढ़ती रही, तो आने वाले दिनों में सप्लाई प्रभावित हो सकती है। कीमतें और बढ़ सकती हैं। 200 की कोयला बोरी 350 रु में
रांची के होटल संचालकों ने बताया कि 25 किलो की कोयला बोरी का दाम वेंडर 300 से 350 रुपए ले रहे हैं, जो पहले 200 रु. में मिलती थी। वहीं, स्ट्रीट फूड व्यापारियों ने कहा कि इस समय छोटा सिलेंडर भी नहीं मिल पा रहा है। कोयला काफी महंगा मिल रहा है। कोकर में चाउमिन बेचने वाले स्ट्रीट वेंडर राजू कुमार ने बताया कि उन्हें एक किलो गैस भरवाने में 350 रुपए लग रहे हैं, जो पहले सौ रुपए में मिलती थी। 250 रु. का कोयला चूल्हा 600 में बिक रहा
90 प्रतिशत से ज्यादा होटल- रेस्टोरेंट और स्ट्रीट फूड व्यापारियों ने कोयले- लकड़ी के चूल्हों का उपयोग बढ़ाया है। मांग बढ़ने से चूल्हों की कीमत पर असर पड़ा है। रांची शहर में प्रति दिन लगभग 500 चूल्हों की बिक्री हो रही है। रांची स्थित अपर बाजार में ही फरवरी में 250 रुपए में बिकने वाला चूल्हा अभी 600 रुपए में बिक रहा है। बड़ी भट्ठी वाले चूल्हे 1100 रुपए तक बिक रहे हैं। पहले ये चूल्हे 600 रुपए में मिलते थे। पर्ल रेसीडेंसी, होटल बीएनआर चाणक्या जैसे कई बड़े होटलों में कोयले के भट्ठे बनाए गए हैं।

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