Motivational Story: न कोचिंग, न लाखों की फीस, युवक ने घर में ऐसे तैयारी कर निकाल ली 5 सरकारी नौकरी

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Santhosh Edunuri/ पेद्दापल्ली: Motivational Story: सरकारी नौकरी को लेकर माना जाता है कि इसे हासिल करना कठिन है और अच्छी कोचिंग का सहारा लेकर ही आप सरकारी परीक्षा क्रैक कर सकते हैं, लेकिन तेलंगाना के एक युवक ने ऐसी सोच को ठेंगा दिखाते हुए साबित कर दिया कि इंसान के अंदर अगर सच्ची लगन हो और मेहनत करने का जूनून हो, तो सरकारी नौकरी पाना बाएं हाथ का खेल है. पढ़ें प्रेरणा से भर देने वाली ये सफलता की कहानी-

Success Story: तेलंगाना के पेद्दापल्ली जिले के गोदावरीखानी के गाडे साई लेनिन ने बिना किसी संस्थान में कोचिंग लिए पांच सरकारी नौकरियां हासिल की हैं और अपने जीवन के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों तक पहुंचने में कई बेरोजगार युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं. इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद, साई लेनिन ने एमटेक करने के लिए GATE की परीक्षा दी और आईआईटी, हैदराबाद में सीट पक्की कर ली.

Success Story: तेलंगाना के पेद्दापल्ली जिले के गोदावरीखानी के गाडे साई लेनिन ने बिना किसी संस्थान में कोचिंग लिए पांच सरकारी नौकरियां हासिल की हैं और अपने जीवन के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों तक पहुंचने में कई बेरोजगार युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं. इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद, साई लेनिन ने एमटेक करने के लिए GATE की परीक्षा दी और आईआईटी, हैदराबाद में सीट पक्की कर ली.

उसी समय पर तेलंगाना राज्य लोक सेवा आयोग (टीएसपीएससी) ने विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त पदों को भरने के लिए अधिसूचना जारी की. उन्होंने आईआईटी में शामिल होने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अपने गृह नगर वापस लौटने का विचार छोड़ दिया. लेकिन सभी के लिए एक बड़ा आश्चर्य यह था कि परीक्षा पास करने के लिए कोचिंग के लिए किसी संस्थान में जाने के बजाय वह खुद ही परीक्षा देने के लिए तैयार हो गए.

उसी समय पर तेलंगाना राज्य लोक सेवा आयोग (टीएसपीएससी) ने विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त पदों को भरने के लिए अधिसूचना जारी की. उन्होंने आईआईटी में शामिल होने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अपने गृह नगर वापस लौटने का विचार छोड़ दिया. लेकिन सभी के लिए एक बड़ा आश्चर्य यह था कि परीक्षा पास करने के लिए कोचिंग के लिए किसी संस्थान में जाने के बजाय वह खुद ही परीक्षा देने के लिए तैयार हो गए.

उन्होंने अपने घर में एक विशेष कमरा बनवाया और लक्ष्य तक पहुँचने के लिए अपने दिन और रात उसी कमरे में बिताने लगे. उनके माता-पिता गाडे सम्मैया और निर्मला ने उन्हें इस संबंध में बहुत प्रोत्साहित किया. भले ही वह पहले प्रयास में असफल रहे, लेकिन साई लेनिन ने प्रतियोगी परीक्षाओं को पास करने के प्रति अपना आत्मविश्वास, इच्छा शक्ति, प्रतिबद्धता और दृढ़ संकल्प कभी नहीं खोया.

उन्होंने अपने घर में एक विशेष कमरा बनवाया और लक्ष्य तक पहुँचने के लिए अपने दिन और रात उसी कमरे में बिताने लगे. उनके माता-पिता गाडे सम्मैया और निर्मला ने उन्हें इस संबंध में बहुत प्रोत्साहित किया. भले ही वह पहले प्रयास में असफल रहे, लेकिन साई लेनिन ने प्रतियोगी परीक्षाओं को पास करने के प्रति अपना आत्मविश्वास, इच्छा शक्ति, प्रतिबद्धता और दृढ़ संकल्प कभी नहीं खोया. (सांकेतिक तस्वीर, साभार – फ्रीपिक)

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सोशल मीडिया उनका द्रोणाचार्य बन गया. उन्होंने यूट्यूब और गूगल के माध्यम से किसी भी विषय में अपनी शंकाओं को दूर करना शुरू किया. उनके प्रयासों के परिणाम सामने आए और उन्होंने पांच सरकारी नौकरियां हासिल कीं, जिनमें 60वीं रैंक के साथ एससीसीएल में कनिष्ठ सहायक, सहायक कार्यकारी अभियंता (8वीं रैंक), सहायक मोटर वाहन निरीक्षक (12वीं रैंक), योग्यता रैंक के साथ ग्रुप-IV और पॉलिटेक्निक कॉलेज में व्याख्याता शामिल हैं. (जहां उसने कहा कि आंसर की देखने के बाद उसे अच्छे अंक मिलेंगे).

सोशल मीडिया उनका द्रोणाचार्य बन गया. उन्होंने यूट्यूब और गूगल के माध्यम से किसी भी विषय में अपनी शंकाओं को दूर करना शुरू किया. उनके प्रयासों के परिणाम सामने आए और उन्होंने पांच सरकारी नौकरियां हासिल कीं, जिनमें 60वीं रैंक के साथ एससीसीएल में कनिष्ठ सहायक, सहायक कार्यकारी अभियंता (8वीं रैंक), सहायक मोटर वाहन निरीक्षक (12वीं रैंक), योग्यता रैंक के साथ ग्रुप-IV और पॉलिटेक्निक कॉलेज में व्याख्याता शामिल हैं. (जहां उसने कहा कि आंसर की देखने के बाद उसे अच्छे अंक मिलेंगे).

साई लेनिन ने कहा कि “एक समय था जब विषयों में कोई संदेह होने पर किसी को कोचिंग संस्थानों पर निर्भर रहना पड़ता था. लेकिन अब हर शंका दूर हो जाएगी मोबाइल फोन से, जो हम चौबीसों घंटे अपने साथ रखते हैं. असफलता का स्वाद चखने के बाद व्यक्ति को आत्मविश्वास नहीं खोना चाहिए और असफलता को सफलता की ओर बढ़ने वाली सीढ़ी बनाना चाहिए. कड़ी मेहनत से भरपूर लाभ मिलेगा. मेरे परिवार के सदस्यों ने मुझे अपने लक्ष्य तक पहुँचने में बहुत प्रोत्साहित किया”.

साई लेनिन ने कहा कि “एक समय था जब विषयों में कोई संदेह होने पर किसी को कोचिंग संस्थानों पर निर्भर रहना पड़ता था. लेकिन अब हर शंका दूर हो जाएगी मोबाइल फोन से, जो हम चौबीसों घंटे अपने साथ रखते हैं. असफलता का स्वाद चखने के बाद व्यक्ति को आत्मविश्वास नहीं खोना चाहिए और असफलता को सफलता की ओर बढ़ने वाली सीढ़ी बनाना चाहिए. कड़ी मेहनत से भरपूर लाभ मिलेगा. मेरे परिवार के सदस्यों ने मुझे अपने लक्ष्य तक पहुँचने में बहुत प्रोत्साहित किया”.

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