Ramadan and Periods: क्या महिलाएं पीरियड्स में रोज़ा रखती हैं, रोज़े में पीरियड हो जाए तो क्या करें?

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Ramadan and Periods: क्या महिलाएं पीरियड्स में रोज़ा रखती हैं, रोज़े में पीरियड हो जाए तो क्या करें?

Periods and Roza in Ramadan 2026: इस्लाम धर्म का सबसे पाक और मुकद्दस महीना का चल रहा है, जो इस्लामिक कैलेंडर का नौंवा महीना होता है. ये महीना खासतौर पर इबादत और रोजा रखने के लिए होता है. इस दौरान दुनियाभर के मुसलमान 29-30 दिनों तक रोजा रखते हैं. 12 से 16 घंटे तक रोजा रखकर मुसलमान अल्लाह की इबादत करते हैं. इस्लाम में पांच वक्त की नमाज हर मुसलमान पर फर्ज है. लेकिन इस मुबारक महीने में एक खास नमाज और अदा की जाती है, जिसे तरावीह कहा जाता है. रमजान में मुसलमान पांच वक्त की नमाज, रोजा, तरावीह, जिक्र, नेकी और हर तरह की इबादत करता है. इन सभी का मकसद सिर्फ एक – अल्लाह को राजी करना.

रमजान में रोजा रखना इस्लाम के पांच अरकानों में से एक है और हर बालिग मुसलमान पर रोजा रखना फर्ज है. बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी पूरे महीने में रोजा रखते हैं. लेकिन महिलाओं को पीरियड्स होने की वजह से वो पूरे रोजे नहीं रख पाती हैं. कई बार इस चीज को लेकर कंफ्यूजन बना रहता है कि क्या हैज़ यानी पीरियड्स की हालत में रोजा रख सकते हैं या नहीं. इस आर्टिकल में हम इस्लामिक स्कॉलर मुफ्ती सलाउद्दीन कासमी से जानेंगे कि पीरियड्स में रोजे को लेकर इस्लाम में क्या कहा गया है और रमजान में पीरियड्स के दौरान कैसे इबादत की जाए.

पीरियड्स में रोजा रखना चाहिए?

पीरियड्स के दौरान रोजा नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इसे इस्लाम में मना किया गया है. पीरियड्स के दौरान महिला के शरीर से निकलने वाला खून नापाक होता है, इसलिए इस दौरान इबादत करना या रोजा रखना जायज नहींं है. अगर आपने रोजा रखा है और बीच में ही पीरियड शुरू हो जाए तो रोजा टूट जाता है. इफ्तार से पहले पहले किसी भी वक्त अगर किसी औरत को रोजे की हालत में पीरियड शुरू हो जाता है, तो रोजा टूट हो जाएगा. फिर इस छूटे हुए रोजे के बदले बाद में कजा रोजा रखना होगा.

यह भी पढ़ें – Ramadan 2026: क्या मुसलमानों के अलावा भी किसी धर्म में रखे जाते हैं रोज़े?

रोजे के बीच में पीरियड हो जाए तो क्या करें?

मान लीजिए आपने सेहरी की, रोजा रखा. अब 9 बजे, 10 बजे या यहां तक इफ्तार का टाइम शुरू होने से अगर 5 मिनट पहले भी पीरियड शुरू हो गया तो रोजा टूट जाएगा. इस रोजे की आपको बाद में कजा रखनी होगी. अगर आपने रोजा रखा और आपको बीच में ही पीरियड्स हो जाते हैं तो आप कुछ भी खा पी सकती हैं.

पीरियड्स में क्या नहीं करना चाहिए?

इस्लाम की हदीस के मुताबिक, पीरियड्स की हालत में महिलाएं कुरान नहीं पढ़ सकतीं, नमाज नहीं पढ़ सकतीं और रोजा नहीं रख सकती हैं. इसके अलावा जिक्र, दुआएं, अल्लाह से इस्तगफार, दुरूद शरीफ की कसरत, कलमा, तौबा और मुसल्ला बिछाकर बैठना ये सब कर सकती हैं. कुरान शरीफ को छूना और कुरान शरीफ को पढ़ना मना होता है. हालांकि, पीरियड की हालत में तस्बीह को छू सकती हैं. पीरियड आना नेचुरल है और इससे आपके सवाब में कोई कमी नहीं आएगी.

Periods In Ramadan

यह भी पढ़ें – क्या रमज़ान में रोज़े के दौरान पान और बीड़ी-सिगरेट भी नहीं पी सकते?

रोजे में पीरियड को लेकर जरूरी बातें

  • रोजा टूट जाता है:- अगर रोजे की हालत में हैज शुरू हो जाए, तो रोजा तुरंत टूट जाता है, भले ही आपने कुछ खाया-पीया न हो.
  • इफ्तार से पहले:- अगर सूरज डूबने से कुछ समय पहले भी खून आ जाएतो उस दिन का रोजा माना नहीं जाएगा.
  • कजा जरूरी:- रमजान के बाद छूट गए रोजों को रखना (कजा) जरूरी है.
  • इबादत:- पीरियड के दिनों में नमाज और रोजा माफ है. लेकिन कजा करना जरूरी है.
  • खाना-पीना:- पीरियड के दौरान दिन में खा-पी सकती हैं. लेकिन रोजेदारों के सामने खाने से बचना चाहिए.
  • स्पॉटिंग से नहीं टूटेगा:- रोजा रखने के बाद दिन में या इफ्तार के समय के आसपास हल्की स्पॉटिंग हो, तो वो पीरियड नहीं माना जाता और रोजा जायज रहता है.

रोजा कब नहीं रखना चाहिए?

रमजान के दौरान रोजा कुछ हालत में नहीं रखना चाहिए जैसे- बीमारी, यात्रा, गर्भावस्था, स्तनपान, मासिक धर्म (पीरियड्स), बहुत बुढ़ापा, और मानसिक अस्वस्थता. इन हालतों में रोजा छोड़ने की इस्लामी शरीयत के मुताबिक छूट है. लेकिन छूटे हुए रोजों को बाद में रखना (कजा) या फिदिया (गरीब को खाना खिलाना) देना जरूरी है.

Roza Kise Nahi Rakhna Chahiye

जब रोजा न रख पाएं तो क्या करें?

कजा (Qaza):- छूटे हुए रोजे रमजान के बाद अपनी सहूलियत के मुताबिक किसी भी दिन रखने होते हैं.

फिदिया (Fidyah):- अगर कोई शख्स रोजा नहीं रख सकता (जैसे बहुत बूढ़ा या लाइलाज बीमार), तो हर छूटे रोजे के बदले एक गरीब व्यक्ति को खाना खिलाना होता है.

रोजा रखने की मनाही वाले दिन

  • ईद-उल-फितर (मीठी ईद): इस दिन रोजा रखना मना है.
  • ईद-उल-अजहा (बकरीद): इस दिन भी रोजा नहीं रखते हैं.
  • तश्रीक के दिन (11, 12, 13 ज़ुल-हिज्जा): ये दिन भी रोजा रखने के लिए मना किए गए हैं.

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