SGB रिडेम्प्शन से पहले समझ लें टैक्स नियम, नहीं तो पड़ सकता है नुकसान

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SGB रिडेम्प्शन से पहले समझ लें टैक्स नियम, नहीं तो पड़ सकता है नुकसान

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड

कई सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) निवेशक, जिन्होंने ये बॉन्ड सीधे भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से या सेकेंडरी मार्केट से खरीदे थे, अब अपने निवेश के पाँच साल पूरे करने के करीब हैं. बजट 2026 में टैक्स छूट से जुड़े नियम सख्त करने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसका असर उन निवेशकों के फैसले पर पड़ सकता है जो बॉन्ड समय से पहले भुनाने (रिडीम करने) की सोच रहे हैं.

8 सितंबर 2020 को जारी सीरीज़ VI और 9 मार्च 2021 की सीरीज़ XII में निवेश करने वाले निवेशकों के साथ-साथ पुराने ट्रांच के निवेशकों ने भी अनिवार्य पांच साल की लॉक-इन अवधि पूरी कर ली है. लॉक-इन लगभग खत्म होने के कारण कुछ निवेशकों को लगता है कि अमेरिका-भारत ट्रेड डील के बाद सोने के दाम स्थिर रह सकते हैं. ऐसे में वे इसे निवेश भुनाने या सेकेंडरी मार्केट में बॉन्ड बेचने का सही समय मान रहे हैं. हालांकि कई निवेशक असमंजस में हैं, क्योंकि FY27 के लिए बजट में सुझाए गए बदलाव 1 अप्रैल 2026 से RBI द्वारा जारी सभी SGB सीरीज़ पर लागू होंगे.

RBI से खरीदे गए SGB

जिन निवेशकों ने SGB सीधे RBI से खरीदे हैं, उनके लिए अभी या 1 अप्रैल 2026 के बाद रिडीम करने में ज़्यादा फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि उनके लिए टैक्स छूट जारी रहेगी, भले ही वे बॉन्ड पूरे 8 साल तक रखें. फिलहाल पांच साल बाद की प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन पर भी टैक्स नहीं लगता. लेकिन नया नियम कहता है कि 1 अप्रैल 2026 के बाद समय से पहले रिडेम्प्शन पर टैक्स छूट नहीं मिलेगी. इसलिए अगर जल्द पैसों की ज़रूरत है, तो 1 अप्रैल से पहले रिडीम करना फायदेमंद हो सकता है.

RBI से खरीदा, सेकेंडरी मार्केट में बेचा

अगर किसी ने RBI से SGB खरीदा और सेकेंडरी मार्केट में बेचा, तो उस पर 12.5% लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स लगेगा, चाहे बिक्री 1 अप्रैल से पहले हो या बाद में. टैक्स छूट सिर्फ तभी मिलती है जब बॉन्ड मैच्योरिटी तक रखकर RBI से रिडीम किया जाए.

सेकेंडरी मार्केट से खरीदा और बेचा

सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए SGB अगर बेचे जाते हैं, तो उन पर कैपिटल गेन टैक्स लगेगा. 12 महीने तक रखने पर शॉर्ट-टर्म टैक्स और 12 महीने से ज्यादा रखने पर 12.5% LTCG टैक्स लगेगा.

सेकेंडरी मार्केट से खरीदा, मैच्योरिटी पर रिडीम

बजट 2026 के बदलाव के बाद, सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए SGB को 1 अप्रैल 2026 के बाद मैच्योरिटी पर रिडीम करने पर भी टैक्स देना होगा, जबकि पहले ये ज़्यादातर टैक्स-फ्री थे. सीधे शब्दों में कहें तो बजट का मकसद उन रिडेम्प्शन पर टैक्स लगाना है, जिनकी खरीदारी सेकेंडरी मार्केट से की गई है. इसलिए निवेशकों को फैसला लेते समय टैक्स असर को ज़रूर ध्यान में रखना चाहिए.

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