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झारखंड विधानसभा ने मंगलवार को झारखंड विश्वविद्यालय विधेयक 2026 पारित कर दिया। इससे विश्वविद्यालयों में कुलपति (वीसी) और प्रति कुलपति (प्रो वीसी) की नियुक्ति को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल खत्म हो गया है। अब इन पदों पर नियुक्ति राज्यपाल और मुख्यमंत्री सं
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इससे पहले 26 अगस्त 2025 को पारित विधेयक में यह अधिकार राज्यपाल (कुलाधिपति) से लेकर राज्य सरकार को देने का प्रावधान था। इसे लेकर राज्यपाल और सरकार के बीच टकराव की स्थिति बन गई थी। मंगलवार को भोजनावकाश के बाद उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने 2025 का विधेयक वापस ले लिया और संशोधित झारखंड विश्वविद्यालय विधेयक 2026 पेश किया।
चर्चा के बाद इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। अब यह विधेयक राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलते ही यह कानून बन जाएगा। विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजपा के राज सिन्हा और अमित यादव ने इसे प्रवर समिति को भेजने की मांग की। राज सिन्हा ने कहा कि 135 पेज के विधेयक को पूरी तरह पढ़ने का समय नहीं मिला और इसमें कई त्रुटियां हैं।
विश्वविद्यालय विधेयक 2026 में क्या खास सीनेट की बैठक साल में कम से कम दो बार होगी, जरूरत पड़ने पर और भी बुलाई जा सकती है। रिजल्ट 30 दिनों में जारी करने का लक्ष्य, अधिकतम सीमा 45 दिन होगी। विश्वविद्यालय सेवा आयोग में अखिल भारतीय सेवा के अफसर होंगे।




