सोशल मीडिया पर एक वीडियो में अपने समर्थकों के साथ फिल्मी अंदाज में एंट्री लेते विक्रम।
देहरादून के सिल्वर सिटी मॉल में शुक्रवार सुबह गोली मारकर हत्या किए गए विक्रम शर्मा का नाम सामने आते ही उसका आपराधिक अतीत और शहर से जुड़ा पुराना रिकॉर्ड फिर चर्चा में आ गया है। सूत्रों के अनुसार देहरादून में जन्मा विक्रम शर्मा 19 अप्रैल 2017 को रांची
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झारखंड के जमशेदपुर में सक्रिय रहा विक्रम शर्मा कुख्यात गैंगस्टर अखिलेश सिंह का करीबी सहयोगी और ‘गुरु’ माना जाता था। उसके खिलाफ 50 से अधिक आपराधिक मामलों की चर्चा रही है और झारखंड में सक्रिय रहने के दौरान वह निजी सुरक्षा घेरे तथा गाड़ियों के काफिले के साथ चलता था। स्थानीय स्तर पर रंगदारी नेटवर्क और कई हाई-प्रोफाइल वारदातों में उसके नाम की चर्चा होती रही।
सूत्रों के मुताबिक उसका आर्थिक नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ था और करीब एक हजार करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति होने की भी चर्चाएं रही हैं। हाल के वर्षों में वह देहरादून में रहकर कारोबार से जुड़ा बताया जाता है। उसकी मौजूदगी के बावजूद शहर में उसके मूवमेंट पर पुलिस निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं, जबकि हत्या के बाद उसके पुराने नेटवर्क और संभावित रंजिश के एंगल पर जांच तेज कर दी गई है।

झारखंड में एक कार्यक्रम में विक्रम का स्वागत करते लोग। फाइल फोटो
अब पढ़िए विक्रम का पूरा प्रोफाइल
देहरादून में जन्म, पंजाबी परिवार और शुरुआती जीवन
सूत्रों के अनुसार विक्रम शर्मा का जन्म देहरादून में हुआ और वह पंजाबी परिवार से ताल्लुक रखता था। बचपन और शुरुआती जीवन यहीं बीता, लेकिन युवावस्था में उसका संपर्क झारखंड के औद्योगिक शहरों से जुड़ गया। इसके बाद वह जमशेदपुर और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय रहने लगा, जहां धीरे-धीरे उसका नाम स्थानीय आपराधिक गतिविधियों से जुड़ने लगा।
झारखंड में पैर जमाए, औद्योगिक शहरों में बढ़ा प्रभाव
जमशेदपुर पहुंचने के बाद उसने स्थानीय नेटवर्क से संपर्क बनाए। औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण यहां व्यापार, ट्रांसपोर्ट और ठेकेदारी से जुड़ी बड़ी आर्थिक गतिविधियां थीं। सूत्रों के अनुसार इसी माहौल में व्यापारियों और ठेकेदारों पर दबाव बनाकर वसूली करने वाले गिरोह सक्रिय थे और धीरे-धीरे उसका प्रभाव इस नेटवर्क में बढ़ता गया।

सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई विक्रम की तस्वीरें।
2 नवंबर 2007: आशीष डे हत्याकांड से नाम चर्चा में
सूत्रों के अनुसार साकची क्षेत्र में ‘श्री लेदर्स’ के मालिक आशीष डे की हत्या ने पूरे जमशेदपुर को झकझोर दिया था। इस मामले में विक्रम शर्मा और अखिलेश सिंह गिरोह का नाम प्रमुख आरोपियों में सामने आया। इस घटना के बाद व्यापारियों के बीच भय का माहौल बन गया और गिरोह की चर्चा तेज हो गई।
2008: फायरिंग और हत्याओं से दहशत का माहौल
सूत्र बताते हैं कि वर्ष 2008 के दौरान कई हिंसक घटनाओं से गिरोह का नाम जुड़ता रहा। पूर्व जज आर.पी. रवि पर हमला, व्यापारियों को धमकियां, आशीष डे के घर पर दोबारा फायरिंग, टाटा स्टील के सुरक्षा अधिकारी जयराम सिंह की हत्या और ट्रांसपोर्टर अशोक शर्मा की हत्या जैसी घटनाओं ने क्षेत्र में भय का माहौल बना दिया। इन घटनाओं के बाद पुलिस दबाव बढ़ा।
अखिलेश सिंह का ‘गुरु’ और संचालनकर्ता माना जाता था
सूत्रों के अनुसार विक्रम शर्मा को झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर अखिलेश सिंह का गुरु और करीबी सहयोगी माना जाता था। अपराध जगत में दोनों के रिश्ते को नेतृत्व और संचालन से जोड़कर देखा जाता था। बताया जाता है कि जब अखिलेश सिंह जेल में रहा, तब बाहरी संपर्क बनाए रखना, नेटवर्क को सक्रिय रखना और गतिविधियों का समन्वय करना विक्रम की भूमिका रही।

हिस्ट्रीशीटर गैंगस्टर: 50 से अधिक आपराधिक मामले
सूत्र बताते हैं कि विक्रम शर्मा और उसके साथियों के खिलाफ 50 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज बताए जाते हैं। रंगदारी, धमकी, फायरिंग और हिंसक घटनाओं से जुड़े मामलों में उसका नाम सामने आता रहा। इसी कारण उसे झारखंड में हिस्ट्रीशीटर गैंगस्टर के रूप में जाना जाता था।
रंगदारी नेटवर्क और कारोबारी दबाव तंत्र
जमशेदपुर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में व्यापारियों और ठेकेदारों से कथित रंगदारी मांगने और दबाव बनाने की घटनाओं में उसके नेटवर्क की सक्रियता की चर्चा होती रही। कई कारोबारियों को सुरक्षा के नाम पर भुगतान करने को मजबूर होने की बातें सामने आती रहीं, जिससे उसका प्रभाव बढ़ता गया।
सुरक्षा घेरा, गाड़ियों का काफिला और रसूख
झारखंड में सक्रिय रहने के दौरान वह निजी सुरक्षा कर्मियों के साथ चलता था। कई वाहनों के काफिले के साथ उसकी आवाजाही की चर्चाएं स्थानीय स्तर पर होती रही हैं। इसे उसकी सुरक्षा जरूरत के साथ-साथ प्रभाव के प्रदर्शन के रूप में भी देखा जाता था।

ये वीडियो विक्रम ने अपने सोशल मीडिया पर डाली थी जिसमें गाड़ियों का पूरा काफिला नजर आ रहा है।
“न्यूज 26” चैनल: प्रभाव बढ़ाने की रणनीति
सूत्रों के अनुसार विक्रम शर्मा ने झारखंड में “न्यूज 26” नाम से एक स्थानीय न्यूज चैनल शुरू किया था। इसे समाज में पहचान बनाने और सार्वजनिक प्रभाव बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा गया। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा रही कि चैनल का नाम “26” गैंगस्टर अखिलेश सिंह के जन्मदिन की तारीख से जोड़ा जाता है, जिसे दोनों की नजदीकी का प्रतीक माना जाता था।
सैकड़ों करोड़ की संपत्ति और आर्थिक नेटवर्क
सूत्रों के मुताबिक उसका आर्थिक नेटवर्क कई शहरों तक फैला बताया जाता है। संपत्तियों, निवेश और कारोबारी हिस्सेदारी होने की चर्चाएं लंबे समय से होती रही हैं। उसके पास सैकड़ों करोड़ रुपये से अधिक संपत्ति होने के दावे किए जाते रहे हैं, हालांकि वास्तविक आंकड़ों की जांच की जा रही है।

हाथ में सोने का कड़ा गले में मोटी चैन, विक्रम को गोल्ड का भी काफी शौक था।
19 अप्रैल 2017: देहरादून से गिरफ्तारी
सूत्रों के अनुसार रांची पुलिस ने 19 अप्रैल 2017 को विक्रम शर्मा को देहरादून से गिरफ्तार किया था। उसे हवाई जहाज से रांची ले जाया गया और वहां से जमशेदपुर के बिष्टुपुर थाने लाया गया। पूछताछ के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया और उसके नेटवर्क से जुड़े पहलुओं की जांच की गई।
पुलिस दबाव के बाद फरारी और गुमनाम जीवन
पुलिस दबाव बढ़ने के बाद वह झारखंड से गायब हो गया। लंबे समय तक उसकी लोकेशन स्पष्ट नहीं रही। स्थानीय चर्चाओं के अनुसार उसने पहचान छिपाकर अलग-अलग स्थानों पर रहना शुरू किया और उत्तराखंड तथा उत्तर प्रदेश के इलाकों में ठिकाने बदले।

झारखंड के अंदर विक्रम का दबदबा था, हालांकि देहरादून में वह अकेले ही घूमते थे।
देहरादून वापसी और कारोबारी पहचान
पिछले कुछ वर्षों में वह देहरादून लौट आया था। सूत्रों के अनुसार वह रेसकोर्स क्षेत्र में रह रहा था और काशीपुर में स्टोन क्रशर कारोबार से जुड़ा था। स्थानीय स्तर पर वह खुद को व्यवसायी के रूप में स्थापित करने और सामान्य जीवन अपनाने की कोशिश करता दिख रहा था।
देहरादून में हत्या के साथ खत्म हुआ सफर
13 फरवरी 2026 को देहरादून के सिल्वर सिटी मॉल में गोली मारकर उसकी हत्या कर दी गई। सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हत्या का संबंध उसके पुराने आपराधिक नेटवर्क, आर्थिक हितों के टकराव, रंगदारी विवाद या आपसी रंजिश से जुड़ा हो सकता है।
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