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अगुस्टीना सोरेंग बनी तस्करों के लिए 12 साल से काल:55 लोगों का रेस्क्यू करा चुकी हैं, जी रहे खुशहाल जिंदगी


मां कालरात्रि गहरे रंग, शक्तिशाली मुद्रा और निडर स्वभाव की हैं, महिला व युवतियों के रेस्क्यू के लिए मुहिम छेड़ी, 40 से अधिक गांवों में एक-एक नाबालिग पर अब नजर
गरीबी, बेरोजगारी और सीधेपन का फायदा उठाकर सिमडेगा, खूंटी व गुमला के आदिवासी बच्चों को महानगरों में बेचने वाले मानव तस्करों के खिलाफ अगुस्टीना सोरेंग दीवार बनकर खड़ी हैं। 2014 से जारी इस मुहिम के जरिए उन्होंने पुलिस की मदद से अब तक 55 नाबालिगों और युवतियों को सुरक्षित रेस्क्यू कराया है। उनके अभियान के कारण नौकरी का झांसा देकर युवतियों को बेचने वाले तस्करों को पैर पीछे खींचने पड़े हैं। अगुस्टीना न केवल तस्करी रोक रही हैं, बल्कि वर्षों पहले फंसी महिलाओं को भी मुक्त करा रही हैं। रेस्क्यू की गई युवतियों में सिमडेगा के रेंगारीह थाना क्षेत्र की लीली खलखो भी शामिल हैं। लीली के अनुसार, 25 साल पहले 23 वर्ष की उम्र में उन्हें काम दिलाने के बहाने पंजाब ले जाकर अनिल नामक दलाल को बेच दिया गया था। अगुस्टीना ने सिमडेगा पुलिस के सहयोग से उसे छुड़ाया और परिवार से मिलवाया। 40 गांवों की सुरक्षा ढाल बनीं
समाजसेवी अगुस्टीना सोरेंग के नेतृत्व वाली 15 सदस्यीय टीम सिमडेगा, खूंटी और गुमला के 40 से ज्यादा गांवों पर सीधी नजर रख रही है। इन गांवों में रहने वाले एक-एक नाबालिग की गतिविधियों की जानकारी इस टीम को है। 549 केस 883 को नया जीवन
पिछले चार सालों (2018-2021) में राज्य भर में मानव तस्करी के कुल 549 मामले दर्ज किए गए। इस दौरान कुल 976 लोग तस्करों के चंगुल में फंसे। इनमें से 883 पीड़ितों को सकुशल मुक्त करा लिया गया। 16 लोग अब भी लापता
2022 में 168 लोगों के तस्करों के चंगुल में फंसने की पुष्टि हुई। पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इनमें से 152 लोगों को सकुशल मुक्त कराया और उन्हें परिजनों के पास पहुंचाया। 16 लोग अब भी लापता या प्रक्रियाधीन सूची में हैं। झारखंड की रिटायर्ड डीजी निर्मला चौधरी ने कहा- ट्रैफिकिंग रोकने को पुलिसिंग स्तर पर भी सुधार की जरूरत
जबतक ग्रामीण स्तर पर कौशल विकास के साथ-साथ रोजगार पर विशेष ध्यान नहीं दिया जाएगा, मानव तस्करी पर पूरी तरह से लगाम लगा पाना संभव नहीं है। इसके अलावा पुलिसिंग स्तर पर भी सुधार की जरूरत है। मानव तस्करी को रोकने के लिए बनाए गए एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थाने को सख्त और परिणामदायक होना होगा।

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