Sunday, July 26, 2026

Breaking
News

🕒

Latest
Updates

🔔

Stay
Informed

Top 5 This Week

Related Posts

अदीना मस्जिद के पास शिवलिंग, पश्चिम बंगाल में नया विवाद

Malda Adina Mosque Dispute: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में 14वीं शताब्दी की अदीना मस्जिद के पास एक हिंदू संगठन द्वारा विशाल शिवलिंग स्थापित करने की घोषणा ने ‘मंदिर-मस्जिद’ विवाद को फिर से गरमा दिया है. सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दावा कर रही है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसाई) द्वारा संरक्षित यह स्मारक ऐतिहासिक आदिनाथ मंदिर के अवशेषों पर बना है.

अदीना मस्जिद विवाद के बीच सोशल मीडिया पर जारी तस्वीरें.
अदीना मस्जिद विवाद के बीच सोशल मीडिया पर जारी तस्वीरें.

तारकेश्वर से लाया गया है शिवलिंग

‘आदिनाथ पुरातन शिव मंदिर’ समिति के सदस्यों ने हाल ही में संरक्षित स्मारक के पास पूजा-अर्चना की. उन्होंने घोषणा की कि हुगली जिले के तारकेश्वर से लाया गया 3.6 फुट ऊंचा और 1.5 टन वजन वाला शिवलिंग सावन के महीने में पास के एक मंदिर में स्थापित किया जायेगा. संगठन ने कहा कि वह अंततः संरक्षित स्मारक के अंदर शिवलिंग स्थापित करने के लिए कानूनी अनुमति मांगेगा.

हम सोमवार को अपने मंदिर के अंदर पूजा करेंगे और शिवलिंग स्थापित करेंगे. वर्तमान मस्जिद के निर्माण के लिए मूल आदिनाथ मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया था. हम कानून का पालन करेंगे और कोई उपद्रव नहीं चाहते. हम मस्जिद परिसर के अंदर शिवलिंग स्थापित करना चाहते हैं, लेकिन ऐसा उचित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करने और किसी सक्षम अदालत से अनुमति मिलने के बाद ही करेंगे. हम किसी भी गैर-कानूनी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे. -काजल गोस्वामी, आदिनाथ पुरातन शिव मंदिर समिति के मुख्य संरक्षक और भाजपा नेता

मस्जिद से 100 मीटर दूर 120 साल पुराना आदिनाथ मंदिर

समिति का दावा है कि मस्जिद परिसर से लगभग 100 मीटर की दूरी पर स्थित मौजूदा आदिनाथ मंदिर लगभग 120 साल पुराना है. मूल मंदिर के अवशेष एएसआई-संरक्षित स्मारक के अंदर मौजूद हैं. गोस्वामी ने आरोप लगाया कि मस्जिद परिसर के अंदर एक शिवलिंग के अलावा कई हिंदू और बौद्ध प्रतीक भी दिखाई देते हैं.

ये भी पढ़ें: अमित शाह बोले- बंगाल में कोई माई का लाल नहीं बना सकता बाबरी मस्जिद, ममता बनर्जी के ‘एजेंट’ हैं हुमायूं कबीर

यूसुफ पठान के ट्वीट के बाद गरमाया मुद्दा

  • यह मुद्दा पिछले साल चर्चा में आया, जब बहरमपुर के सांसद यूसुफ पठान ने स्मारक का दौरा करके सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा कीं.
  • पश्चिम बंगाल भाजपा ने तब दावा किया था कि यह मस्जिद नहीं, ऐतिहासिक आदिनाथ मंदिर था.
  • शमिक भट्टाचार्य ने संसद में इस मुद्दे को उठाते हुए आरोप लगाया था कि मस्जिद का निर्माण पहले से मौजूद हिंदू और बौद्ध ढांचों की सामग्रियों का उपयोग करके किया गया था.

शमिक का दावा- यहां शिव और विष्णु को समर्पित आदिनाथ मंदिर था

स्थानीय परंपराओं और ऐतिहासिक विवरणों का हवाला देते हुए शमिक भट्टाचार्य ने दावा किया कि इस स्थान पर मूल रूप से भगवान शिव और भगवान विष्णु को समर्पित आदिनाथ मंदिर था. कलकत्ता हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया गया था कि एएसआई ने ढांचे में हिंदू देवी-देवताओं और प्रतीकों की कथित मौजूदगी के बावजूद संरक्षित स्मारक की पहचान गलत तरीके से अदीना मस्जिद के रूप में की थी.

मालदा के अदीना मस्जिद का ऐसा है प्रवेश द्वार.
मालदा के अदीना मस्जिद का ऐसा है प्रवेश द्वार.

राम मंदिर की तरह यहां भी तोड़ा गया था मंदिर

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस स्थल को लेकर जनभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं. अयोध्या के राम मंदिर की तरह ही, इस मंदिर को भी मस्जिद बनाने के लिए कथित तौर पर ध्वस्त किया गया था. इस स्थल से जुड़ी धार्मिक भावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, और ऐतिहासिक सच्चाई सामने आनी चाहिए.

अदीना मस्जिद के बारे में जानें

  • एएसआई इस स्मारक को अदीना मस्जिद के रूप में मान्यता देता है.
  • अदीना मस्जिद का निर्माण 1373 ईस्वी में इलियास शाह के पुत्र सुल्तान सिकंदर शाह ने करवाया था.
  • प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत इसे राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया गया है.
  • मालदा शहर से लगभग 16 किलोमीटर उत्तर में पांडुआ में है मस्जिद.
  • मस्जिद को 14वीं शताब्दी की भारत-इस्लामी वास्तुकला के सबसे बेहतरीन जीवित उदाहरणों में एक माना जाता है.
  • 260 पत्थर के खंभों और 387 गुंबददार मेहराबों वाले इस परिसर को कभी भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे बड़ी मस्जिद माना जाता था.

19वीं सदी से वीरान पड़ी है मस्जिद

एक भूकंप में यह मस्जिद क्षतिग्रस्त हो गयी थी. 19वीं शताब्दी से वीरान पड़ी है. फिर भी यह स्मारक पश्चिम बंगाल के सबसे महत्वपूर्ण मध्यकालीन पुरातात्विक स्थलों में से एक बना हुआ है.

जिला प्रशासन ने जारी किया परामर्श

सोशल मीडिया पर इस स्थल पर प्रस्तावित धार्मिक कार्यक्रमों की जानकारी सामने आने के बाद मालदा जिला पुलिस ने एक सार्वजनिक परामर्श भी जारी किया है. इसमें लोगों को याद दिलाया गया है कि यह स्मारक ‘प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958’ के तहत संरक्षित है. परामर्श में चेतावनी दी गयी है कि अनधिकृत धार्मिक गतिविधियों का आयोजन करने या संरक्षित ढांचे में बदलाव करने के किसी भी प्रयास पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जायेगी.

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles