Wednesday, June 24, 2026

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अनिरुद्धाचार्य के बाद भरत के समर्थन में उतरे धीरेंद्र शास्त्री:बोले- शरण में आने वाले का वध गलत, सरकार निष्पक्ष जांच करवाए, जल्द परिवार से मिलूंगा


भोजपुर में भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में अब बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री भी खुलकर सामने आ गए हैं। उन्होंने भरत तिवारी के घर शाहपुर के बिटौली जाने की घोषणा की है। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, यदि कोई व्यक्ति अपराधी भी हो तो उसे दंड न्यायपालिका से मिलना चाहिए, न कि सरेंडर करने के बाद उसकी जान ली जानी चाहिए। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा है कि वह भरत तिवारी के परिजन से मिलने उनके गांव जाएंगे। उन्होंने भरत तिवारी को सनातन और हिंदू समाज के लिए काम करने वाला युवा बताया। धीरेंद्र शास्त्री का कहना है कि समाज के लिए काम करने वाले व्यक्ति की मौत को लेकर उठ रहे सवालों का निष्पक्ष जवाब मिलना चाहिए और पूरे मामले की पारदर्शी जांच होनी चाहिए।
भरत तिवारी ने वर्ष 2023 में हिंदू राष्ट्र के संकल्प को लेकर बिहार के आरा से बागेश्वर धाम तक पैदल यात्रा की थी। इस यात्रा के दौरान उत्तर प्रदेश के चंदौली और मीरजापुर से गुजरते हुए उनके कई वीडियो सोशल मीडिया पर काफी प्रसारित हुए थे। इसी यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री से भी हुई थी, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय रहा था। बागेश्वर बाबा के इस बयान के बाद भरत तिवारी मामले की जांच को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। साल 2023 में बागेश्वर बाबा से मिले थे भरत तिवारी। कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने कहा- जनता सरकार को पापी कहेगी बागेश्वर धाम से पहले कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने भी भरत एनकाउंटर पर बिहार सरकार को घेरा था। उन्होंने कहा था, “जनता की हत्या करना किसी भी राजा के लिए पाप है। इस हाल में जनता आपको पापी राजा कहेगी। भरत ने किसी की हत्या नहीं की थी, अगर की होती तो एनकाउंटर कीजिए। गौ और ब्राह्मण हत्या से बचना चाहिए। किसी भी हत्या से बचना चाहिए। हर साल उसका गांव बाढ़ में डूब जाता था। वह अपने गांव की रक्षा के लिए नेताओं-अफसर से मिन्नतें कर रहा था। अनिरुद्धाचार्य ने कहा- नेताओं को समझना चाहिए कि वे जनता से वोट लेते हैं। अगर वोट लेने के बाद उसी जनता को दबाना और मारना शुरू कर देंगे, तो यह लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है। सरकार ये ठीक नहीं कर रही। भरत ने अपराध के मकसद से हथियार नहीं उठाया है अनिरुद्धाचार्य ने आगे कहा, “उस युवक ने किसी की हत्या करने या अपराध करने के मकसद से हथियार नहीं उठाया था। वह अपने इलाके और समाज का काम करवाने के लिए अधिकारियों के पास गया था, लेकिन उसकी बात नहीं सुनी गई। ऐसे में उसने विरोध का रास्ता अपनाया। इसके बावजूद पुलिस ने उसे मार डाला। जब हम में से किसी की बात नहीं सुनी जाएगी तो कोई न कोई व्यक्ति आगे आएगा ही।” कथावचक ने कहा, ‘यदि कोई व्यक्ति आतंकवादी है या उसने कई हत्याएं की हैं, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने में किसी को आपत्ति नहीं हो सकती। अगर कोई आतंकवादी है, बड़ा अपराधी है, उसने 10-20 हत्याएं की हैं तो उसके खिलाफ कार्रवाई कीजिए। उन्होंने ये भी कहा कि लोगों को गौ हत्या और ब्राह्मण हत्या से बचना चाहिए।’
भरत एनकाउंटर एनकाउंटर की पूरी कहानी जानिए 16 जून भोजपुर में सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया, जिसमें शाहपुर के रहने वाले 30 साल के भरत भूषण तिवारी ने पुलिस-प्रशासन को खुलेआम चुनौती दी और मांगों को पूरा न करने के संबंध में आरोप लगाए। दरअसल, शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव के रहने वाले लोगों ने बताया कि पिछले 2 साल से शाहपुर प्रखंड के जवइनियां गांव और आसपास के लोग गंगा में आई बाढ़ के बाद कटाव से प्रभावित थे। पिछले साल यानी 2025 में जवइनियां गांव के 600 से ज्यादा घर गंगा में समा गए थे। तब से भरत पीड़ितों की आवाज उठा रहा था। गांव के लोगों का कहना है कि भरत लगातार प्रशासनिक अधिकारियों से मिलता था और पीड़ितों की समस्याएं उठाता था। विस्थापित परिवारों को सरकारी सहायता दिलाने के लिए लगातार प्रयास करता था। सोशल मीडिया पर वीडियोज देखने के बाद 15 जून को शाहपुर थाना के SHO अपनी पूरी टीम के साथ भरत तिवारी के घर पहुंचे। भरत घर पर नहीं था। भरत की मां 55 साल की आशा देवी का आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने धमकी दी, कहा कि पहले तुम लोगों का, फिर भरत का खेल खत्म करेंगे। भरत को जब धमकी की जानकारी हुई, हथियार लेकर आया भरत जब बाहर से घर लौटा तो उसकी मां ने पुलिस के आने और धमकी देने की बात बताई। इसके बाद भरत कुछ देर के लिए बाहर गया और थोड़ी देर बाद लौट आया। वहीं, 16 जून को ही दोपहर में दोबारा शाहपुर थाने के SHO अपनी टीम के साथ भरत के घर पहुंचे। इसी दौरान भरत ने पिस्टल निकाल ली और SHO के सामने एक पुलिसकर्मी को ठोक देने की धमकी देने लगा। इस दौरान हथियार छीनने और भरत को गिरफ्तार करने के बजाए करीब 4 घंटे तक SHO कुर्सी पर बैठकर भरत से बात करते रहे, बिना किसी कानूनी कार्रवाई के शाम को लौट गए। 16 जून की देर रात और 17 जून के तड़के शाहपुर थाने की पुलिस ने भरत की गिरफ्तारी के लिए उसके घर की घेराबंदी की, लेकिन भरत घर से बाहर नहीं निकला और सुबह छत पर चढ़कर घर के पास मौजूद पुलिसकर्मियों को धमकाने लगा और फायरिंग भी की। थोड़ी देर बाद जब पुलिस कुछ दूर तक चली गई, तो भरत बाढ़ पीड़ितों को जहां रखा गया था, उस इलाके में पहुंच गया। जानकारी के बाद पुलिस भी वहां पहुंची और फिर एनकाउंटर के बाद भरत को गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि, पटना PMCH में उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई।

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