मवेशियों को ऑन-स्पॉट इलाज देने के लिए शुरू की गई मोबाइल वेटनरी वैन अब हाईटेक होगी। बिहार के सभी 534 मोबाइल वेटनरी वैन को सीसीटीवी कैमरे और जीपीएस सिस्टम से लैस किया जाएगा। इससे उसकी निगरानी हो सकेगी। डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने वैन को हॉस्पिटल ऑन व्हील के रूप में विकसित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की है। जल्द ही यह लागू होगी। विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने बताया कि पशु पालकों की शिकायत रहती थी कि उनके गांव में मोबाइल वेटनरी वैन नहीं पहुंच पा रही है। पहले वैन में इन्वर्टर, बैट्री, फ्रीज और माइकिंग सिस्टम नहीं था। इसके कारण मवेशियों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता था। वैन में फ्रीज नहीं रहने से दवाओं की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही थी। अब मोबाइल वेटनरी वैन की रिपोर्टिंग जिला पशुपालन पदाधिकारी करेंगे। जिला पशुपालन पदाधिकारी डीएम को रिपोर्टिंग करेंगे। ऑनलाइन पर्ची मिलेगी, सभी जानकारी रहेगी पशुपालकों को मोबाइल वेटनरी वैन में पशुओं का इलाज कराने पर अब ऑनलाइन पर्ची मिलेगी। विभाग एक सॉफ्टवेयर विकसित कर रहा है। इसमें पशुपालकों का मोबाइल नंबर, पशुओं की बीमारी, इलाज, पता अंकित रहेगा। ऑनलाइन पर्ची कटते ही डॉक्टर के साथ पशुपालकों की सारी सूचना मिल जाएगी। इससे इलाज में पारदर्शिता आएगी। साथ पेपरलेस काम को बढ़ावा मिलेगा। मोबाइल वेटनरी वैन पर एक टीवी स्क्रीन भी लगाया जाएगा। इसपर डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की योजनाओं का प्रचार-प्रसार किया जाएगा। डॉक्टरों की अनुपस्थिति पर रोक लगेगी मोबाइल वेटनरी वैन में चेहरा स्कैन कर हाजिरी बनाने का सिस्टम लगाया जाएगा। इससे डॉक्टरों की अनुपस्थिति पर लगाम लगाया जा सकेगा। इस वैन में लगे सीसीटीवी कैमरे से 8 घंटे तक मुख्यालय स्तर पर बने कॉल सेंटर से निगरानी हो सकेगी। इसके लिए विभाग कॉल सेंटर को अपग्रेड करने का काम कर रहा है।
अब मोबाइल वेटनरी वैन सीसीटीवी और जीपीएस सिस्टम से लैस होगी
मवेशियों को ऑन-स्पॉट इलाज देने के लिए शुरू की गई मोबाइल वेटनरी वैन अब हाईटेक होगी। बिहार के सभी 534 मोबाइल वेटनरी वैन को सीसीटीवी कैमरे और जीपीएस सिस्टम से लैस किया जाएगा। इससे उसकी निगरानी हो सकेगी। डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने वैन को हॉस्पिटल ऑन व्हील के रूप में विकसित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की है। जल्द ही यह लागू होगी। विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने बताया कि पशु पालकों की शिकायत रहती थी कि उनके गांव में मोबाइल वेटनरी वैन नहीं पहुंच पा रही है। पहले वैन में इन्वर्टर, बैट्री, फ्रीज और माइकिंग सिस्टम नहीं था। इसके कारण मवेशियों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता था। वैन में फ्रीज नहीं रहने से दवाओं की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही थी। अब मोबाइल वेटनरी वैन की रिपोर्टिंग जिला पशुपालन पदाधिकारी करेंगे। जिला पशुपालन पदाधिकारी डीएम को रिपोर्टिंग करेंगे। ऑनलाइन पर्ची मिलेगी, सभी जानकारी रहेगी पशुपालकों को मोबाइल वेटनरी वैन में पशुओं का इलाज कराने पर अब ऑनलाइन पर्ची मिलेगी। विभाग एक सॉफ्टवेयर विकसित कर रहा है। इसमें पशुपालकों का मोबाइल नंबर, पशुओं की बीमारी, इलाज, पता अंकित रहेगा। ऑनलाइन पर्ची कटते ही डॉक्टर के साथ पशुपालकों की सारी सूचना मिल जाएगी। इससे इलाज में पारदर्शिता आएगी। साथ पेपरलेस काम को बढ़ावा मिलेगा। मोबाइल वेटनरी वैन पर एक टीवी स्क्रीन भी लगाया जाएगा। इसपर डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की योजनाओं का प्रचार-प्रसार किया जाएगा। डॉक्टरों की अनुपस्थिति पर रोक लगेगी मोबाइल वेटनरी वैन में चेहरा स्कैन कर हाजिरी बनाने का सिस्टम लगाया जाएगा। इससे डॉक्टरों की अनुपस्थिति पर लगाम लगाया जा सकेगा। इस वैन में लगे सीसीटीवी कैमरे से 8 घंटे तक मुख्यालय स्तर पर बने कॉल सेंटर से निगरानी हो सकेगी। इसके लिए विभाग कॉल सेंटर को अपग्रेड करने का काम कर रहा है।


