अमेरिका और इज़राइल बनाम ईरान (और ईरान के सहयोगी समूहों जैसे इराकी मिलिशिया, हिज़बुल्लाह, हूती आदि) का कारण, पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति .

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मध्य पूर्व में चल रहे अमेरिका और इज़राइल बनाम ईरान (और ईरान के सहयोगी समूहों जैसे इराकी मिलिशिया, हिज़बुल्लाह, हूती आदि) का कारण, पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति .

मुख्य कारण (Core Reasons)

यह संघर्ष कई दशकों पुराना है, लेकिन इसका केंद्र बिंदु ये हैं:

  • ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम — इज़राइल और अमेरिका को डर है कि ईरान परमाणु हथियार बना लेगा, जो इज़राइल के लिए “अस्तित्व का खतरा” (existential threat) है।
  • ईरान की “एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस” — ईरान कई मिलिशिया ग्रुप्स (प्रॉक्सी) को सपोर्ट करता है जैसे:
  • लेबनान में हिज़बुल्लाह
  • यमन में हूती
  • इराक और सीरिया में कई शिया मिलिशिया
  • गाजा में हमास (कुछ हद तक)
    ये ग्रुप इज़राइल और अमेरिकी ठिकानों पर हमले करते हैं।
  • क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई — ईरान चाहता है कि मध्य पूर्व में उसका प्रभाव बढ़े (शिया क्रांति का निर्यात), जबकि सऊदी अरब, इज़राइल और अमेरिका इसे रोकना चाहते हैं।
  • 1979 की ईरानी इस्लामी क्रांति के बाद से अमेरिका और ईरान दुश्मन बने हुए हैं (अमेरिकी दूतावास कब्जा, होस्टेज संकट आदि)।

पृष्ठभूमि

  • 2018: ट्रंप ने JCPOA (ईरान न्यूक्लियर डील) से अमेरिका को बाहर निकाला।
  • 2020: अमेरिका ने ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी को मार डाला।
  • 2023-2024: 7 अक्टूबर 2023 को हमास के इज़राइल पर हमले के बाद गाजा युद्ध शुरू। ईरान के प्रॉक्सी (हिज़बुल्लाह, हूती, इराकी मिलिशिया) ने इज़राइल और अमेरिकी ठिकानों पर हमले बढ़ाए।
  • 2024: इज़राइल ने हमास और हिज़बुल्लाह के कई बड़े लीडर मार दिए। ईरान ने इज़राइल पर सीधे 180+ बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इज़राइल ने ईरान पर बड़ा हमला किया (एयर डिफेंस और मिसाइल फैक्टरियां नष्ट)।
  • जून 2025: IAEA ने ईरान को न्यूक्लियर नियम तोड़ने का दोषी ठहराया। इज़राइल ने ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर हमला किया (12 दिन का युद्ध)। अमेरिका ने भी कुछ न्यूक्लियर साइट्स (फोर्डो, नतांज, इस्फहान) पर हमला किया। युद्ध रुका, लेकिन ईरान का प्रोग्राम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

वर्तमान स्थिति (Current Status – मार्च 2026)

फरवरी 2026 के अंत में स्थिति बहुत तेजी से बिगड़ी:

  • 28 फरवरी 2026: अमेरिका (ट्रंप प्रशासन) और इज़राइल ने संयुक्त रूप से ईरान पर बड़ा हमला शुरू किया। नाम दिए गए – अमेरिका: Epic Fury, इज़राइल: Roaring Lion / Rising Lion।
  • मुख्य लक्ष्य: ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम, बैलिस्टिक मिसाइल साइट्स, एयर डिफेंस, सैन्य ठिकाने और लीडरशिप को निशाना बनाना।
  • सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत — इज़राइली हमले में तेहरान में मार गिराए गए। यह बहुत बड़ा झटका है।
  • हमलों की तादाद: पहले 2-3 दिनों में 2000+ से ज्यादा टारगेट्स पर हमले। अमेरिका-इज़राइल ने ईरान के ऊपर एयर सुपीरियरिटी हासिल कर ली।
  • ईरान की जवाबी कार्रवाई: ईरान और उसके प्रॉक्सी ने इज़राइल, अमेरिकी बेस (इराक, कुवैत, गल्फ देशों में), और कुछ गल्फ शहरों (दुबई, अबू धाबी, दोहा) पर मिसाइल-ड्रोन हमले किए। हिज़बुल्लाह ने लेबनान से इज़राइल पर हमले फिर शुरू किए।
  • नुकसान:
  • ईरान में 500+ मौतें (सिविलियन और मिलिट्री)।
  • अमेरिका के कुछ सैनिक मारे गए (कुछ फ्रेंडली फायर में भी)।
  • इज़राइल पर मिसाइल हमले जारी।
  • ट्रंप का स्टैंड: उन्होंने कहा कि यह युद्ध 4-5 हफ्ते चल सकता है। ईरानियों से अपील की कि वे अपना सरकार बदल लें (regime change)। न्यूक्लियर हथियार न बनने देने और ईरान के खतरे को खत्म करने का लक्ष्य।
  • क्षेत्रीय फैलाव: युद्ध अब लेबनान, इराक, यमन, गल्फ तक फैल चुका है। तेल की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं। कई देशों ने एयरस्पेस बंद कर दिया।
  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: UN और कई देश (फ्रांस, कनाडा आदि) चिंतित। कुछ ने अमेरिका-इज़राइल का समर्थन किया (न्यूक्लियर रोकने के लिए), लेकिन ज्यादातर ने डिप्लोमेसी की मांग की।

संक्षेप में: यह अब सीधा युद्ध बन चुका है, जिसमें अमेरिका-इज़राइल ईरान के शासन को कमजोर/बदलने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि ईरान और उसके सहयोगी इंतकाम ले रहे हैं। स्थिति बहुत नाजुक और तेजी से बदल रही है — अभी कोई स्पष्ट विजेता या अंत नहीं दिख रहा।

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