
Bhagalpur Manjusha Art: भागलपुर. छठ महापर्व में भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए इस्तेमाल होने वाला सूप अब केवल पूजा की सामग्री नहीं, बल्कि भागलपुर की पारंपरिक मंजूषा कला को दुनिया तक पहुंचाने का माध्यम भी बन रहा है. अंग क्षेत्र की पहचान रही इस लोक कला के रंग अब अमेरिका में रहने वाले छठ श्रद्धालुओं तक पहुंचेंगे. मंजूषा गुरु मनोज पंडित और उनकी टीम ने मंजूषा पेंटिंग से सजे 100 सूप तैयार कर इंडिया पोस्ट के जरिए अमेरिका भेज दिए हैं.
इस कामयाबी के पीछे एक चुनौती भी है. अमेरिका से 200 सूप का ऑर्डर मिला था, लेकिन सीमित संसाधनों और टीम की उत्पादन क्षमता के कारण कलाकार केवल 100 सूप का ऑर्डर ही स्वीकार कर सके. इसके बावजूद यह पहल भागलपुर के कलाकारों के लिए अपनी कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का अवसर बनकर सामने आयी है. अब कैलिफोर्निया और ऑस्ट्रेलिया से भी मांग आने के बाद मंजूषा कला से सजे सूप की संभावनाएं और बढ़ती दिख रही हैं.
छठ के सूप पर उकेरी जा रही अंग क्षेत्र की पहचान
छठ बिहार का प्रमुख लोक आस्था का पर्व है. इस दौरान सूप का इस्तेमाल पूजा सामग्री रखने और अर्घ्य की तैयारियों में किया जाता है. भागलपुर के कलाकारों ने इसी पारंपरिक सामग्री पर मंजूषा कला के रंग और चित्रकारी उकेरकर इसे खास रूप दिया है.
इस पहल से पूजा की परंपरा और स्थानीय सांस्कृतिक विरासत को एक साथ जोड़ने की कोशिश हो रही है. विदेशों में रहने वाले भारतीय परिवारों के लिए ऐसे सूप छठ से जुड़ाव बनाए रखने के साथ अपने क्षेत्र की कला को करीब से महसूस करने का जरिया भी बन सकते हैं.
10 लोगों की टीम ने तैयार किए 100 सूप
मंजूषा गुरु मनोज पंडित के नेतृत्व में 10 सदस्यीय टीम ने अमेरिका से मिले ऑर्डर के तहत 100 सूप तैयार किए. टीम ने पारंपरिक सूप पर मंजूषा पेंटिंग कर उन्हें आकर्षक रूप दिया. इसके बाद सभी सूप इंडिया पोस्ट के माध्यम से अमेरिका भेजे गए.
मनोज पंडित के मुताबिक, ऑर्डर की संख्या 200 थी, लेकिन उपलब्ध संसाधनों और टीम की क्षमता को देखते हुए आधे सूप तैयार करने का ही जिम्मा लिया गया. उनके लिए यह केवल सामान तैयार करने का काम नहीं, बल्कि भागलपुर की पारंपरिक कला को विदेश में रहने वाले छठ श्रद्धालुओं तक पहुंचाने की पहल भी है.
एक सूप तैयार कर अमेरिका भेजने में 1500 रुपये खर्च
मंजूषा कला से सजे एक सूप को तैयार करने और अमेरिका भेजने में करीब 1500 रुपये खर्च हुए हैं. इसमें सूप को कलात्मक रूप देने और उसे विदेश तक पहुंचाने की प्रक्रिया शामिल है.
विदेश से मिले ऑर्डर स्थानीय कलाकारों के लिए आय का नया अवसर बन सकते हैं. हालांकि, मांग बढ़ने के साथ उत्पादन, लागत और समय पर आपूर्ति जैसी चुनौतियां भी सामने हैं. कलाकारों के सामने अब ऐसी व्यवस्था तैयार करने की जरूरत है, जिससे वे गुणवत्ता बनाए रखते हुए अधिक ऑर्डर पूरे कर सकें.
संसाधन बढ़ें तो पूरे हो सकते हैं ज्यादा ऑर्डर
मनोज पंडित ने बताया कि सीमित संसाधनों के कारण अमेरिका से मिले 200 सूप के ऑर्डर में से केवल 100 ही स्वीकार किए जा सके. फिलहाल 10 लोगों की टीम के सहारे सूप तैयार किए जा रहे हैं. यदि मंजूषा कला से जुड़े दूसरे कलाकार भी इस काम में सहयोग करें, तो उत्पादन बढ़ाया जा सकता है और विदेशों से मिलने वाले अधिक ऑर्डर पूरे करने की संभावना बनेगी.
यह चुनौती भागलपुर की पारंपरिक कला के विस्तार से भी जुड़ी है. विदेशों से मांग आने पर कलाकारों को काम के नए अवसर मिल सकते हैं, लेकिन इसके लिए प्रशिक्षित कलाकारों की भागीदारी, जरूरी संसाधनों और उत्पादन क्षमता को मजबूत करना होगा.
कैलिफोर्निया और ऑस्ट्रेलिया से भी मांग
मनोज पंडित के अनुसार, कैलिफोर्निया से भी मंजूषा कला से सजे सूप की मांग आई है. ऑस्ट्रेलिया से भी इसके लिए संपर्क किया गया है. फिलहाल दोनों जगहों से जुड़े ऑर्डर को लेकर बातचीत चल रही है. बातचीत अंतिम रूप लेने के बाद ही सूप तैयार करने का काम शुरू किया जाएगा.
इन मांगों के पूरा होने पर भागलपुर की मंजूषा कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक लोगों तक पहुंचाने का अवसर मिल सकता है. हालांकि, अभी कैलिफोर्निया और ऑस्ट्रेलिया के ऑर्डर फाइनल नहीं हुए हैं.
राष्ट्रपति भवन तक पहुंच चुकी है मंजूषा कला
मनोज पंडित ने बताया कि मंजूषा कला के प्रचार-प्रसार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस कला का राष्ट्रपति भवन तक पहुंचना बड़ी उपलब्धि है. अब विदेशों से ऑर्डर मिलना इसके विस्तार की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है.
मंजूषा कला अंग क्षेत्र की पारंपरिक लोक चित्रकला है. इसे छठ जैसे लोकप्रिय पर्व से जोड़कर कलाकार पारंपरिक कला को रोजमर्रा की सांस्कृतिक जरूरतों और पूजा सामग्री के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं.
Bhagalpur Manjusha Art: छठ पर लगेगी मंजूषा सूप की हटिया
छठ पर्व को देखते हुए अंग क्राफ्ट मंजूषा कला प्रशिक्षण केंद्र के कलाकार मंजूषा पेंटिंग से सजे सूप तैयार करने में जुटे हैं. इस बार छठ के अवसर पर मंजूषा सूप की हटिया लगाने की तैयारी है. इससे स्थानीय लोगों को पर्व के लिए सजावटी और पारंपरिक कला से जुड़े सूप उपलब्ध हो सकेंगे.
मंजूषा गुरु के नेतृत्व में वरिष्ठ कलाकार और प्राचार्य सुमना अमन के साथ सागर सृष्टि, श्रुति राय, निर्मला देवी, घराना के प्रीति कुमारी, कविता देवी, पवन कुमार, सागर, वर्षा कुमारी, मानवी कुमारी और वैष्णवी कुमारी इस काम में योगदान दे रहे हैं.
भागलपुर में तैयार हो रहे ये सूप दिखाते हैं कि स्थानीय लोक कला को नई पहचान देने के लिए पारंपरिक हुनर को नए अवसरों से जोड़ना कितना अहम है. यदि कलाकारों को पर्याप्त संसाधन और सहयोग मिलता है, तो छठ जैसे पर्व स्थानीय कला और कलाकारों के लिए देश-विदेश में नए बाजार खोल सकते हैं.
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