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राजस्व कर्मचारी से सीओ तक से रिपोर्ट ओके अररिया सदर अंचल के बसंतपुर मौजा में जमीन के दाखिल-खारिज का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। 1985 से पहले मर चुके परमेश्वर राय के नाम पर वर्ष 2024-25 में दाखिल-खारिज (संख्या 5093/2024-25) मंजूर कर लिया गया। राजस्व कर्मचारी, राजस्व अधिकारी (आरआे) और अंचल अधिकारी (सीओ) स्तर से रिपोर्ट आगे बढ़ी और 12.75 डिसमिल जमीन का म्यूटेशन स्वीकृत हो गया। इस गड़बड़झाले के सामने आने के बाद 11 जुलाई 2025 को राजस्व कर्मचारी अभय यादव द्वारा ऑनलाइन रिकॉर्ड में रकवा शून्य दर्ज कर दिया गया। यह मामला खाता संख्या 1852 और खेसरा संख्या 9837 से जुड़ा है। अररिया वार्ड 24 की चंदा देवी के पति स्व. शिवशंकर जायसवाल ने 29 जनवरी 1985 को महेंद्र राय और योगेंद्र राय से यह जमीन खरीदी थी। 1985 के केवाला में ही विक्रेताओं के पिता परमेश्वर राय को मृत बताया गया था। इसके बावजूद 39 साल बाद मृत व्यक्ति के नाम से म्यूटेशन स्वीकृत कर दिया गया। पीड़ित पक्ष ने एक महीने में दो बार सीओ, दो बार डीएम और दो बार भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल से गुहार लगाई। डीएम विनोद दूहन ने सीओ से 48 घंटे में जांच रिपोर्ट मांगी थी। हालांकि आदेश के 10 दिन बाद भी अंचल कार्यालय ने रिपोर्ट नहीं सौंपी। शिकायतकर्ता (चंदा देवी व पुत्र बबलू) का आरोप
परमेश्वर राय की मृत्यु 1985 से पहले हो चुकी थी। मरे हुए व्यक्ति का म्यूटेशन आवेदन अफसरों ने कैसे पास कर दिया?
दूसरे पक्ष के लोगों ने जमीन पर जबरन कब्जा कर बाउंड्री वॉल तोड़ दी है।
डीएम के 48 घंटे के आदेश के 10 दिन बाद भी रिपोर्ट दबाकर रखी गई है। दोषी कर्मियों पर एफआईआर हो और जमीन कब्जा मुक्त कराई जाए। फाइल पास हुई, फिर रिकॉर्ड शून्य… 3 बड़े सवाल
1. आवेदन किसने किया? 1985 के दस्तावेज में मृत परमेश्वर राय के नाम से 2024-25 में म्यूटेशन का आवेदन किस आधार पर और किसने जमा किया?
2. जांच में सच क्यों छिपा? कर्मचारी, आरओ और सीओ की तीन स्तरीय जांच में यह तथ्य क्यों नहीं पकड़ा गया?
3. रकबा शून्य क्यों हुआ? 12.75 डिसमिल का म्यूटेशन पास होने के बाद 11 जुलाई 2025 को ऑनलाइन रिकॉर्ड में रकबा शून्य क्यों किया गया? मेरे लॉगिन से दाखिल-खारिज का निष्पादन नहीं हुआ है। इस मामले में सीओ ही कुछ बता सकते हैं। -शंभू प्रसाद साह, राजस्व अधिकारी (आरओ), अररिया
अररिया अंचल का गड़बड़झाला:39 साल पहले मृत व्यक्ति के नाम दाखिल-खारिज, फिर ऑनलाइन रकबा किया ‘शून्य’
