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अररिया शहर में दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए इस बार खास इंतजाम किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देश पर नगर परिषद परमान नदी के किनारे त्रिसुलिया घाट पर पहली बार एक कृत्रिम पोखर बनवा रही है। इसका मकसद प्रतिमा विसर्जन को तय नियमों के हिसाब से पूरा करना है। एनजीटी के निर्देश पर बन रहा पोखर नगर परिषद त्रिसुलिया घाट पर करीब 30×30 फीट का कृत्रिम पोखर बना रही है। दशहरा में शहर के अलग-अलग पूजा पंडालों में स्थापित मां दुर्गा और दूसरे देवी-देवताओं की प्रतिमाएं इसी पोखर में विसर्जित की जाएंगी। इससे विसर्जन के लिए एक तय जगह मिलेगी और पर्व के दौरान व्यवस्था बनाए रखने में भी मदद मिलेगी। नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी चंद्र प्रकाश राज ने बताया कि एनजीटी के निर्देश पर यह पोखर बन रहा है। उन्होंने कहा कि पूजा समितियां अपनी मर्जी से मां दुर्गा और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का विसर्जन इस पोखर में कर सकेंगी। प्रतिमा विसर्जन के लिए बनेगा निर्धारित स्थल दशहरा के दौरान प्रतिमा विसर्जन को लेकर घाटों पर लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसे में कृत्रिम पोखर का निर्माण विसर्जन की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परमान नदी के किनारे बनाए जा रहे इस पोखर से पूजा समितियों को प्रतिमा विसर्जन के लिए एक वैकल्पिक स्थान मिलेगा। एनजीटी के निर्देश के तहत की जा रही इस व्यवस्था से नदी में प्रतिमाओं के सीधे विसर्जन के बजाय निर्धारित कृत्रिम पोखर में विसर्जन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इस पहल का वास्तविक पर्यावरणीय लाभ पोखर के उचित प्रबंधन और विसर्जन के बाद प्रतिमाओं एवं पूजा सामग्री के निस्तारण पर भी निर्भर करेगा। फिलहाल, नगर परिषद की ओर से त्रिसुलिया घाट पर पोखर निर्माण का कार्य कराया जा रहा है। दशहरा पर्व के दौरान यह व्यवस्था किस तरह लागू होती है, इस पर शहर की पूजा समितियों और श्रद्धालुओं की नजर रहेगी।
अररिया में परमान नदी किनारे बनेगा आर्टिफिशियल पोखर:NGT के निर्देश पर दुर्गा प्रतिमाओं का इसमें होगा विसर्जन
