Tuesday, May 5, 2026

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अररिया में मधुबनी चित्रकला कार्यशाला का समापन:30 बालिकाओं को आत्मनिर्भरता की प्रेरणा, मिले प्रशस्ति पत्र


अररिया में कला एवं संस्कृति विभाग बिहार और जिला प्रशासन अररिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय मधुबनी चित्रकला कार्यशाला का समापन 14 मार्च 2026 को हुआ। यह कार्यशाला अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र में 8 मार्च को शुरू हुई थी। इसमें कुल 30 बालिकाओं ने भाग लिया। मधुबनी चित्रकला की विभिन्न शैलियों की जानकारी दी इस कार्यशाला का उद्देश्य बालिकाओं को पारंपरिक कला से जोड़ना, उनकी रचनात्मक प्रतिभा को निखारना और उन्हें आत्मनिर्भरता की ओर प्रेरित करना था। सात दिनों के प्रशिक्षण के दौरान, प्रतिभागियों ने मधुबनी चित्रकला की विभिन्न शैलियों, प्राकृतिक रंगों के उपयोग, पारंपरिक रेखांकन विधियों, प्रतीकों और आकृतियों के महत्व के साथ-साथ आधुनिक संदर्भ में इस लोक कला के प्रयोग को सीखा। ललित कला शिक्षिका श्रद्धा सुमन ने प्रशिक्षण का नेतृत्व किया। उन्होंने प्रतिभागियों को मिथिला की सांस्कृतिक परंपरा, मधुबनी कला की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उसकी वर्तमान प्रासंगिकता से अवगत कराया। शिक्षिका शाइस्ता ने भी प्रशिक्षण के दौरान मार्गदर्शन प्रदान किया। उनके सहयोग से बालिकाओं ने देवी-देवताओं, प्रकृति, सामाजिक मुद्दों और मिथिला संस्कृति से संबंधित चित्र बनाए। समापन समारोह में प्रतिभागियों द्वारा बनाए गए चित्रों की एक प्रदर्शनी लगाई गई। इसे उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों और स्थानीय नागरिकों ने देखा और सराहा। प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस कार्यशाला ने उन्हें कला सीखने के साथ-साथ आत्मविश्वास भी दिया है। उन्होंने मधुबनी चित्रकला को जारी रखने और इसे व्यवसाय के रूप में अपनाने की इच्छा व्यक्त की। मिथिला की लोक कला को संरक्षित रखें समापन समारोह में सभी 30 बालिकाओं को प्रशस्ति पत्र और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। उपस्थित अधिकारियों ने बताया कि ऐसी कार्यशालाएँ लड़कियों की रचनात्मक क्षमता को बढ़ाती हैं और मिथिला की लोक कला को संरक्षित रखने तथा नई पीढ़ी तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जिला प्रशासन ने भविष्य में भी ऐसी कला-आधारित पहलों को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। इस कार्यशाला के आयोजन से अररिया की बालिकाओं में कला के प्रति रुचि बढ़ी है। इस कार्यक्रम को सांस्कृतिक संरक्षण और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक कदम माना जा रहा है।

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