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असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती अब परीक्षा के आधार पर, क्लास में पढ़ाकर टीचिंग स्किल करनी होगी साबित


बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए नेट, पीएचडी के साथ ही लिखित और मौखिक परीक्षा भी देनी होगी। परीक्षा 200 अंकों की होगी। 175 नंबर की लिखित और 25 अंकों की मौखिक परीक्षा होगी। इसके अलावा क्लास में पढ़ाकर अपनी टीचिंग स्किल भी साबित करनी होगी। लोक भवन की ओर से तैयार ड्राफ्ट स्टैच्यूट-2026 के अनुसार इंटरव्यू के साथ लिखित परीक्षा अनिवार्य है। लिखित परीक्षा व्याख्यात्मक होगी। इसका पाठ्यक्रम संबंधित विषय की यूजीसी-नेट परीक्षा के अनुरूप रखा गया है। टीचिंग स्किल टेस्ट के लिए 13 अंक तय : इंटरव्यू के लिए 25 अंक निर्धारित हैं। इसमें 13 अंक सिर्फ ऑन स्पॉट टीचिंग स्किल टेस्ट के लिए हैं। अभ्यर्थियों को इंटरव्यू बोर्ड के सामने पढ़ाना होगा। पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाएगी। 12 अंक विषयगत समझ, व्यक्तित्व और इंटरव्यू बोर्ड के साथ बातचीत के आधार पर दिए जाएंगे। लिखित परीक्षा के परिणाम के आधार पर हर पद के लिए तीन अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा। इसके बाद अंतिम मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी। ड्राफ्ट के अनुसार संबंधित विषय में 55% अंकों के साथ मास्टर्स डिग्री और नेट, एसईटी न्यूनतम योग्यता होगी। हालांकि यूजीसी रेगुलेशन-2009 या 2016 के तहत पीएचडी करने वाले उम्मीदवारों को नेट से छूट मिलेगी। संविदा बहाली में भी होगा टीचिंग टेस्ट छात्र-शिक्षक अनुपात के आधार पर संविदा शिक्षकों के चयन में एपीआई स्कोर, शोध कार्य और इंटरव्यू को आधार बनाया जाएगा। इंटरव्यू में 6 अंक टीचिंग स्किल टेस्ट और 6 अंक इंटरेक्शन के लिए तय किए गए हैं। संविदा पर नियुक्त शिक्षकों को नियमित असिस्टेंट प्रोफेसर के प्रवेश स्तर का बेसिक वेतन और महंगाई भत्ते के बराबर एकमुश्त राशि देने का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि यह नियुक्ति एक शैक्षणिक सत्र तक ही मान्य होगी। नियमित नियुक्ति होने पर संविदा नियुक्ति स्वतः समाप्त हो जाएगी।

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