रांची झारखंड के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसरों के प्रमोशन का रास्ता अब और आसान होने जा रहा है। करियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के तहत स्टेज-2 से स्टेज-3 में प्रमोशन को लेकर सरकार द्वारा संशोधन का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। इसमें सबसे बड़ा बदलाव एपीआई ( एकेडमिक परफॉमरेंस इंडकेटर) सिस्टम में किया गया है। ड्राफ्ट के अनुसार अब श्रेणी-II (को-करिकुलर/ एक्सटेंशन एक्टिविटी) और श्रेणी-III (रिसर्च/अकादमिक योगदान) को जोड़ दिया गया है। यानी अब दोनों के लिए अलग-अलग न्यूनतम अंक की बाध्यता खत्म कर दी गई है। इससे उन शिक्षकों को राहत मिलेगी, जिनके एक श्रेणी में कम अंक होने के कारण प्रमोशन से वंचित होने की संभावना थी। स्टेज-2 से स्टेज-3 में प्रमोशन के लिए अभी श्रेणी-II और III में अलग-अलग एपीआई का होना जरूरी है। इसमें किसी एक में भी न्यूनतम मानक से कम अंक होने की स्थिति में प्रमोशन प्रस्ताव खारिज होने तय है। लेकिन प्रमोशन नियम में संशोधन हो जाने के बाद यह बाध्यता स्वत: समाप्त हो जाएगी। यािन अब प्रमोशन पाना पहले की अपेक्षा काफी आसान हो जाएगा। ड्राफ्ट के अनुसार स्टेज-2 से स्टेज-3 में प्रमोशन के लिए दोनों श्रेणी को मिलाकर एक संयुक्त न्यूनतम एपीआई 100 होना चाहिए। यानी अब कमजोर रिसर्च या कमजोर एक्सटेंशन दोनों में बैलेंस बनाकर प्रमोशन संभव है। यानि संशोधन के बाद अलग-अलग कटऑफ खत्म हो जाएगी। पहले श्रेणी-II में (एनएसएस, एनसीसी, एक्सटेंशन) और श्रेणी श्रेणी-III (रिसर्च, पब्लिकेशन) पहले दोनों में न्यूनतम स्कोर जरूरी था। संशोधित प्रस्ताव पर नजर रख रहे पूर्व कुलपति ने बताया कि यह यह ड्राफ्ट शिक्षकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। खासकर स्टेज-2 से स्टेज-3 प्रमोशन में। लेकिन अलग-अलग कैटेगरी का न्यूनतम स्कोर हटाने और मर्ज करने से गुणवत्ता प्रभावित होना भी तय है। संतुलित तरीके से कैसे लागू किया जा सकता है, इसपर सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को विचार करना होगा।
असिस्टेंट प्रोफेसर: स्टेज-3 में प्रमोशन के लिए अब न्यूनतम स्कोर की बाध्यता खत्म
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