बंगाल से पुलिस ने एक शीर्ष नक्सली को गिरफ्तार किया है. यह शख्स प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी की सेंट्रल कमेटी का आखिरी सदस्य है. इसका नाम असीम मंडल उर्फ आकाश है. उसकी उम्र 64 साल है. 2.2 करोड़ रुपए के इनामी आकाश ने 4 दशक तक नक्सली संगठन में सक्रिय रहा. मूल रूप से पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के रहने वाले आकाश ने पीपुल्स वार ग्रुप के सदस्य के रूप में उग्र वाम आंदोलन में कदम रखा था. प्रतिबंधित नक्सली संगठन में उसकी अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह सेंट्रल कमेटी का आखिरी जीवित सदस्य है, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार किया है. कोलकाता पुलिस की एसटीएफ ने पूर्व मेदिनीपुर जिले के पटाशपुर के पोलेरहाट गांव से उसे गिरफ्तार किया.
जंगलमहल और झारखंड में किया संगठन का विस्तार
आकाश छात्र जीवन से ही वामपंथी आंदोलन से जुड़ गया था. बाद में वह पीपुल्स वार ग्रुप से जुड़ गया. वर्ष 2004 में जब भाकपा (माओवादी) का गठन हुआ, तो उसने संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालनी शुरू कर दी. पश्चिम बंगाल के जंगलमहल और पड़ोसी राज्य झारखंड में संगठन विस्तार में उसने अहम भूमिका निभायी. जंगलमहल के लालगढ़ आंदोलन में भी उसकी भूमिका सामने आयी थी.
15 साल से पुलिस की आंख में धूल झोंक रहा था असीम
असीम मंडल उर्फ आकाश को कोलकाता पुलिस की एक स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर उसका पीछा करते हुए गिरफ्तार किया. चार दशक तक नक्सली संगठन में सक्रिय रहने वाला आकाश 15 साल से पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहा था. वह झारखंड के सारंडा और उसके आसपास के जंगलों में छिपकर रह रहा था.
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इलाज के लिए पैसे का इंतजाम करने ससुराल पहुंचा था आकाश
झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों में नक्सलियों के खिलाफ केंद्रीय बलों के एंटी नक्सल ऑपरेशन में मिसिर बेसरा समेत तमाम बड़े माओवादी नेता मारे गये. हाई ब्लड प्रेशर का मरीज आकाश इलाज के लिए पैसे का इंतजाम करने पूर्वी मेदिनीपुर के पोलेरहाट गांव पहुंचा था. बताया जा रहा है कि इसी गांव में उसकी ससुराल है.

झारखंड पुलिस की सूचना पर आकाश का पीछा कर रही थी एसटीएफ
कोलकाता पुलिस की एसटीएफ को झारखंड पुलिस से खबर मिली थी कि सारंडा के जंगल से आकाश समेत 12 नक्सली जंगल से बाहर निकले हैं. इसी सूचना के आधार पर कोलकाता पुलिस की एसटीएफ ने उसका पीछा करना शुरू किया. हालांकि, एसटीएफ की टीम को उसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी. उसके लोकेशन के बारे में भी कोई स्पष्ट सूचना नहीं थी. फिर भी एसटीएफ ने लगातार उसका पीछा किया और जब यह सुनिश्चित हो गया कि यही असीम मंडल उर्फ आकाश है, तो उसे पोलेरहाट गांव से धर दबोचा.
17 सितंबर को 1 से 1:30 बजे के बीच हुई गिरफ्तारी
कोलकाता के पुलिस कमिश्नर अजय नंद ने बताया कि बृहस्पतिवार (17 सितंबर 2026) को उसे पोलेरहाट गांव से दिन में एक से डेढ़ बजे के बीच गिरफ्तार किया गया. उन्होंने बताया कि 2011 में कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद असीम मंडल उर्फ आकाश बंगाल से झारखंड भाग गया. तब से वह ओडिशा और झारखंड के जंगलों में नक्सली गतिविधियों को अंजाम दे रहा था. पोलेरहाट गांव में वह एक आम आदमी की तरह आया था.
पूरे गांव में पुलिस ने चलाया सर्च ऑपरेशन
पुलिस ने बताया कि उसकी गिरफ्तारी के बाद पूरे गांव में सर्च ऑपरेशन चलाया गया. पुलिस को खबर मिली थी कि उसने गांव में अपने हथियार छिपाकर रखे थे. हालांकि, पुलिस को अब तक कोई हथियार नहीं मिला है. आकाश के पास से करीब 95 हजार रुपए, कई पेन ड्राइव, चिट्ठियां और महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए हैं.
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1980 में कॉलेज का छात्र था असीम
पश्चिमी मेदिनीपुर जिले के चंद्रकोना थाना क्षेत्र के उत्तर फूलचुक का रहने वाला असीम जब 1980 के दशक में माओवादी गतिविधियों में शामिल हुआ, उस समय वह कॉलेज में पढ़ता था. धीरे-धीरे संगठन में सक्रिय होता गया और हथियारबंद दस्ते का हिस्सा बन गया.
किशनजी की मौत के बाद मिली बंगाल की जिम्मेदारी
वर्ष 2011 में किशन की मौत के बाद वर्ष 2012 से असीम मंडल और उसके साथियों की गतिविधियां धीरे-धीरे कम होती गयी. झारखंड में सक्रिय माओवादी संगठन के बड़े नेताओं से उसके संपर्क रहे. सुरक्षा बलों के खिलाफ हिंसक गतिविधियों और संगठन के लिए लेवी वसूलने में वह सक्रिय रहा. सेंट्रल फोर्सेज के लगातार चलाये जा रहे एंटी नक्सल ऑपरेशन से परेशान होकर झारखंड में सक्रिय नक्सली अन्य राज्यों में ठिकाना तलाशने लगे.
आकाश पर दर्ज हैं 100 से अधिक मामले
आकाश पर 100 से अधिक मामले दर्ज हैं. ये मुकदमे झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमले, विस्फोट तथा अन्य हिंसक घटनाओं से संबंधित हैं. उसका का पूर्वी सिंहभूम के पूर्व सांसद सुनील महतो हत्याकांड में भी सामने आया था.
जंगलमहल और झारखंड में किया संगठन का विस्तार
छात्र जीवन से ही वामपंथी आंदोलन से जुड़ा असीम मंडल उर्फ आकाश बाद में पीपुल्स वार ग्रुप से जुड़ गया. वर्ष 2004 में जब भाकपा (माओवादी) का गठन हुआ, तो उसने संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालनी शुरू कर दी. पश्चिम बंगाल के जंगलमहल और पड़ोसी झारखंड में संगठन विस्तार में उसने अहम भूमिका निभायी. लालगढ़ आंदोलन के दौरान भी उसका नाम माओवादी संगठन के प्रमुख चेहरों में लिया गया. संगठन में वह केंद्रीय कमेटी का सदस्य तक बना.
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