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यहां लगभग 10 करोड़ रुपए से बन रहे अस्पताल का नया भवन अभी निर्माणाधीन है। जानकारी के अनुसार चार साल पहले जिस ठेकेदार ने भवन निर्माण कार्य का टेंडर लिया था, उसने काम नहीं किया। पुनः टेंडर निकला गया। पिछले चार साल से काम चल रहा है। यह भवन कब बनकर तैयार होगा, इसकी जानकारी किसी के पास नहीं है। भास्कर न्यूज | मनिका रांची-मेदिनीनगर एनएच-39 के किनारे मनिका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) का मुख्य भवन जर्जर हो गया है। यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। अस्पताल के ओपीडी, पैथोलॉजी लैब, दवा वितरण कक्ष और ड्रेसिंग रूम वाले हिस्से की छत का प्लास्टर टूट-टूट कर गिरता है। छतों की स्थिति इतनी भयावह हो गई है कि प्लास्टर उखड़ने के बाद जंग लगी छड़ें बाहर लटकती दिखाई दे रही है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग कोई विकल्प तलाशने के बजाय उसी भवन में अस्पताल चला रहा है। लापरवाही का आलम यह है कि प्लास्टर गिरने के खतरे से निपटने के लिए विभाग ने बरामदे और मुख्य पिलर के पास चारों तरफ से रस्सी बांध दी है और वहां खतरे का पोस्टर चिपका दिया है। हैरानी की बात यह है कि तत्कालीन उपायुक्त अबू इमरान ने पूर्व में ही इस जर्जर भवन का निरीक्षण कर इसे अनुपयोगी घोषित कर दिया था और तत्काल ध्वस्त करने का मौखिक निर्देश भी दिया था। वर्तमान में मानसून की शुरुआत के बाद छत से लगातार पानी टपकने और प्लास्टर गिरने की समस्या दोगुनी हो गई है, जिससे यहां इलाज कराने आने वाले प्रतिदिन 200-300 मरीजों और उनके परिजनों पर हर वक्त मौत का साया मंडराता रहता है।

