Monday, August 24, 2026

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आंधी-बारिश ने छीनी रांची की तपिश; इस सीजन सिर्फ दो दिन 40 के पार गया पारा


देशभर में गर्मी झुलसा रही है। पारा लगातार चढ़ रहा है। लेकिन रांची में इस बार गर्मी का असर बेहद सीमित है। लगातार आंधी-तूफान और गरज-चमक के साथ हुई बारिश से मौसम सुहावना बना हुआ है। मौसम विभाग के मुताबिक, लगातार सक्रिय हो रहे मौसमी सिस्टम (पश्चिमी विक्षोभ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन) के कारण इस साल गर्मी अपनी तीव्रता नहीं दिखा सकी और तापमान सामान्य से काफी नीचे बना रहा।। अप्रैल के अंतिम सप्ताह में एक बार गर्मी बढ़ी। दो दिन तक पारा 40 डिग्री पर पहुंचा। क्योंकि उस समय कोई मौसमी सिस्टम सक्रिय नहीं था। उत्तर-पश्चिमी शुष्क ओर गर्म हवाएं झारखंड आ रही थी। आसमान बि​ल्कुल साफ था। लेकिन मई आते ही मौसम ने यू-टर्न लिया। लगातार बारिश और आंधी का दौर शुरू हो गया। इससे गर्मी की तपिश खत्म हो गई। फिलहाल तापमान 35-36 डिग्री के आसपास चल रहा है। पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2024 सबसे गर्म रहा, जब रांची का अधिकतम तापमान 42.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। वहीं पिछले 10 वर्षों में सबसे अधिक तापमान 15 मई 2017 को रिकॉर्ड हुआ था। उस दिन राजधानी का पारा 43.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। जून के पहले सप्ताह में आ सकता है मानसून मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ. अभिषेक आनंद ने बताया कि इस साल 26 मई तक केरल में मानसून के प्रवेश की संभावना बन रही है। हालांकि मानसून की गति अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बन रहे मौसमी सिस्टम, हवा की दिशा और तापमान पर निर्भर करेगी। सामान्य तौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून जून की शुरुआत में केरल पहुंचता है। मानसून के केरल में प्रवेश करने के 12 दिन बाद यानी 7 जून तक मानसून झारखंड में प्रवेश करेगी। हालांकि कुछ दिन आगे-पीछे हो सकता है। आगे क्या…आज और कल भी आंधी के साथ बारिश के आसार मौसम विभाग के मुताबिक 17-18 मई को उत्तर-पश्चिमी भाग को छोड़कर राज्य के अन्य हिस्सों में बारिश और वज्रपात के आसार हैं। इस दौरान 40-50 किमी रफ्तार से हवा चलेगी। वहीं 19 मई को धनबाद, कोडरमा से सटे जिलों में कहीं-कहीं पर गर्जन के साथ तेज हवा चलने और वज्रपात का अॉरेंज अलर्ट जारी किया गया है। 20 से 22 मई तक कहीं-कहीं तेज हवा और वज्रपात की संभावना है। उधर, मौसम विभाग ने 7 जून तक मानसून आने की संभावना जताई है। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. रमेश कुमार ने कहा कि लगातार हो रही बारिश और ओलावृष्टि ने इस साल किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। खासकर लतर वाली सब्जियों की खेती करने वाले किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। खेतों में लगी करेला, नेनुआ, झींगी और खीरा जैसी फसलें प्रभावित हुई। वहीं टमाटर और शिमला मिर्च जैसी सब्जियां ओलावृष्टि की चपेट में आकर बर्बाद हो गई हैं। फसलों के नुकसान का असर अब बाजार में भी दिखने लगा है। सब्जियों की आवक कम होने से इनके दाम लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे आम लोगों की परेशानी भी बढ़ी है। हालांकि लगातार बारिश से किसानों को एक फायदा भी मिला है। जिन किसानों के खेत अभी खाली हैं, वे खेतों की जुताई कर उन्हें खाली छोड़ सकते हैं, जिससे बारिश का पानी जमीन में समा सकेगा। इससे मिट्टी में नमी बनी रहेगी और भूजल स्तर को रिचार्ज होने में मदद मिलेगी। असर क्या… एसी-कूलर बाजार ठंडा, बिक्री 40 फीसदी तक घटी मई में मौसम में ठंडक के कारण एसी और कूलर बाजार ठंडा रहा। डीलरों के मुकाबले ​इसकी बिक्री में 40 प्रतिशत तक की गिरावट आई। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के मैनेजर रंधीर कुमार ने कहा कि इस साल ज्यादा बिक्री की उम्मीद थी, लेकिन मौसम ने पानी फेर दिया। एसी की बिक्री 40-50 प्रतिशत कम है। एलजी शॉपी सुनेजा संस के संचालक सुनील सुनेजा ने कहा कि बिक्री में 40 प्रतिशत की कमी है। कूलर की बिक्री सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। डीलरों ने कहा कि रांची में मई के महीने में 15 दिनों में दो हजार एसी बिक जाती है, इस साल मात्र 1200 के आसपास बिक्री हुई है।

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