Friday, June 12, 2026

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आईसीयू-ओटी से लेकर डायग्नोस्टिक तक होगा इंटीग्रेशन:गंभीर मरीजों के लिए बनेगा स्पेशल कॉरिडोर, एक फ्लोर पर ओटी-आईसीयू, हाई लेवल कमेटी बनी


झारखंड के सभी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक और व्यवस्थित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य स्तर पर तैयार की गई योजना के तहत आईसीयू, सीसीयू, एचडीयू, ऑपरेशन थिएटर, इमरजेंसी, डायग्नोस्टिक और रेडियोलॉजी सेवाओं को एकीकृत करने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य मरीजों के इलाज की प्रक्रिया को तेज, सुगम और प्रभावी बनाना है। इस पहल के तहत ‘पेशेंट फ्लो’ और ‘वर्क फ्लो’ को वैज्ञानिक तरीके से व्यवस्थित करने की रणनीति बनाई गई है, ताकि अस्पतालों में बेड मैनेजमेंट, इलाज और जांच की प्रक्रिया में देरी कम हो सके। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने सात डॉक्टरों समेत एक अन्य अधिकारी को शामिल करते हुए नई कमेटी का गठन किया है। इसमें रिम्स कार्डियोलॉजी के हेड डॉ. हेमंत नारायण, क्रिटिकल केयर के हेड डॉ. प्रदीप भट्‌टाचार्य, मेडिसिन के डॉ. अजित डुंगडुंग, सर्जरी के डॉ. एके कमल, सदर अस्पताल के आंकोलॉजिस्ट डॉ. गुंजेश कुमार सिंह समेत पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ शामिल हैं। साथ ही झारखंड राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड (जेएसबीसीसीएल) के अधिकारी भी इस टीम का हिस्सा हैं। राज्यभर में हेल्थ सिस्टम को नया आयाम स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि इस पहल से झारखंड के सभी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों को आधुनिक, सुव्यवस्थित और मरीज-केंद्रित बनाने में मदद मिलेगी। यदि यह प्रभावी तरीके से लागू हो जाए तो राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में व्यापक सुधार होगा। मरीजों को क्या होगा फायदा? संक्रमण नियंत्रण के लिए सख्त व्यवस्था नई योजना में संक्रमण नियंत्रण पर विशेष जोर दिया गया है। ऑपरेशन थिएटर को पूरी तरह स्टेराइल जोन के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही क्लीन और डर्टी जोन को अलग-अलग रखा जाएगा, ताकि संक्रमण का खतरा कम हो। मरीजों, अस्पताल कर्मियों और बायो-मेडिकल वेस्ट के आवागमन के लिए अलग-अलग कॉरिडोर और लिफ्ट की व्यवस्था अनिवार्य की जाएगी। ‘पेशेंट’ व ‘वर्क’ फ्लो पर तय होगा अस्पतालों का डिजाइन सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब अस्पतालों का निर्माण ‘पेशेंट फ्लो’ और ‘वर्क फ्लो’ के वैज्ञानिक सिद्धांत पर आधारित होगा। इसके तहत आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर और इमरजेंसी सेवाओं को एक ही फ्लोर या नजदीकी क्षेत्र में विकसित किया जाएगा, ताकि मरीजों को त्वरित उपचार मिल सके और समय की बचत हो। ट्रॉमा सेंटर को ग्राउंड फ्लोर पर मुख्य प्रवेश द्वार के पास स्थापित किया जाएगा, जिससे एंबुलेंस की आसान और तेज पहुंच सुनिश्चित हो सके। आईसीयू और इमरजेंसी के बीच बनेगा कॉरिडोर योजना के तहत आईसीयू, ओटी, इमरजेंसी, रेडियोलॉजी, ब्लड बैंक और डायग्नोस्टिक सेंटर के बीच बेहतर कनेक्टिविटी विकसित की जाएगी। इसके लिए ‘डेडिकेटेड कॉरिडोर और लिफ्ट’ बनाने का सुझाव दिया गया है, जिससे गंभीर मरीजों को एक यूनिट से दूसरे यूनिट तक तेजी से पहुंचाया जा सके। इससे इलाज में लगने वाला समय कम होगा और क्रिटिकल मरीजों की जान बचाने की संभावना बढ़ेगी। डायग्नोस्टिक सुविधाएं होंगी और सुलभ : रेडियोलॉजी, लैब और ब्लड बैंक जैसी सुविधाओं को ऐसी जगह स्थापित किया जाएगा, जहां से ओपीडी और इमरजेंसी दोनों के मरीज आसानी से पहुंच सकें। इससे जांच में देरी नहीं होगी और इलाज की प्रक्रिया तेज होगी। नई व्यवस्था के तहत निर्माण एजेंसियों को अपने डिजाइन पहले विशेषज्ञ समिति के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे। समिति द्वारा समीक्षा और आवश्यक सुझाव दिए जाने के बाद ही भवनों के अंतिम नक्शे को मंजूरी दी जाएगी।

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