भास्कर न्यूज |सरायकेला विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर गुरुवार को सरायकेला-खरसावां जिले में लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया गया। इस वर्ष दिवस की थीम ‘आत्महत्या पर दृष्टिकोण बदलना’ और आह्वान ‘बातचीत शुरू करें’ रखा गया है। जिला स्वास्थ्य समिति की ओर से लोगों से मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चुप्पी तोड़ने और अपने आसपास के लोगों से संवेदनशीलता के साथ बातचीत करने की अपील की गई। कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि कठिन परिस्थिति, मानसिक तनाव या असफलता जीवन का अंत नहीं है। हर समस्या का समाधान संभव है। आत्महत्या के विचारों से जूझ रहा व्यक्ति अक्सर अकेलेपन और डर से गुजरता है। ऐसे में बिना किसी पूर्वाग्रह और निर्णय के उससे बातचीत करना तथा उसे भावनात्मक सहयोग देना महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से आत्महत्या के संभावित चेतावनी संकेतों को पहचानने की अपील की। अत्यधिक अकेलापन, खुद को असहाय महसूस करना, स्वभाव में अचानक बदलाव और लगातार निराशा की बातें करना ऐसे संकेत हो सकते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। परिवार और मित्रों से दबाव बनाने के बजाय सुरक्षित और सहयोगी माहौल तैयार करने की अपील की गई। 10 से 30 सितंबर तक स्कूल-कॉलेजों में अभियान : जिले में 10 से 30 सितंबर तक विभिन्न स्कूलों एवं कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विद्यार्थियों और युवाओं को मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन, भावनात्मक सहयोग, आत्महत्या के चेतावनी संकेतों और समय पर सहायता लेने के महत्व की जानकारी दी जाएगी। लोगों को बताया जाएगा कि मानसिक परेशानी या संकट की स्थिति में अकेले संघर्ष करने के बजाय परिवार, मित्र, शिक्षक या स्वास्थ्यकर्मी से बातचीत करें। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया में हर साल करीब 7.20 लाख से अधिक लोग आत्महत्या करते हैं। यह 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल है। इस अवसर पर उपस्थित लोगों को जागरूकता फैलाने, बचाव और संकट से गुजर रहे लोगों की सहायता के लिए शपथ भी दिलाई गई। कार्यक्रम में जिला नोडल पदाधिकारी डॉ. नकुल प्रसाद चौधरी, मनोचिकित्सक डॉ. शालिनी कुमारी, डॉ. अनिर्बान महतो, डॉ. श्वेता कुमारी, जिला एनसीडी कोषांग के डीपीए पुष्कर भूषण, एनटीसीपी कंसल्टेंट अशोक यादव, साइकिएट्रिक नर्स सुशीला महतो सहित अन्य पदाधिकारी, कर्मचारी एवं स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित थे।
