धालभूमगढ़| घाटशीला के प्रेम नगर स्थित आनंद मार्ग स्कूल में योग के महत्व पर विशेष चर्चा और कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम में अवधूतिका आनंद ऊशासी आचार्य ने मौजूद लोगों और विद्यार्थियों के साथ योग के अलग-अलग पहलुओं पर बात की। कार्यक्रम में योग की परिभाषा और उद्देश्यों की जानकारी दी गई। वक्ताओं ने दार्शनिकों के मतों का जिक्र किया। बताया गया कि योग सिर्फ शारीरिक अभ्यास नहीं है। यह मन और आत्मा का जुड़ाव है। एक मत में योग को चित्त की वृत्तियों के निरोध के रूप में बताया गया। दूसरे मत में सर्व चिंताओं का त्याग को वास्तविक योग कहा गया। तार्किक व्याख्या में संयोग योग इत्युक्त: जीवात्मा-परमात्मनः का अर्थ समझाया गया। बताया गया कि जीवात्मा का परमात्मा से मिलन ही योग है। यह अचेतन मन को चेतन मन से जोड़कर आत्मिक उन्नति की प्रक्रिया है। कार्यक्रम में योग के लाभ और इसके वैज्ञानिक आधार पर चर्चा हुई। योग साधना के दौरान मन को एकाग्र करने की विधियां बताई गईं।
आनंद मार्ग स्कूल में योग पर चर्चा और कीर्तन
धालभूमगढ़| घाटशीला के प्रेम नगर स्थित आनंद मार्ग स्कूल में योग के महत्व पर विशेष चर्चा और कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम में अवधूतिका आनंद ऊशासी आचार्य ने मौजूद लोगों और विद्यार्थियों के साथ योग के अलग-अलग पहलुओं पर बात की। कार्यक्रम में योग की परिभाषा और उद्देश्यों की जानकारी दी गई। वक्ताओं ने दार्शनिकों के मतों का जिक्र किया। बताया गया कि योग सिर्फ शारीरिक अभ्यास नहीं है। यह मन और आत्मा का जुड़ाव है। एक मत में योग को चित्त की वृत्तियों के निरोध के रूप में बताया गया। दूसरे मत में सर्व चिंताओं का त्याग को वास्तविक योग कहा गया। तार्किक व्याख्या में संयोग योग इत्युक्त: जीवात्मा-परमात्मनः का अर्थ समझाया गया। बताया गया कि जीवात्मा का परमात्मा से मिलन ही योग है। यह अचेतन मन को चेतन मन से जोड़कर आत्मिक उन्नति की प्रक्रिया है। कार्यक्रम में योग के लाभ और इसके वैज्ञानिक आधार पर चर्चा हुई। योग साधना के दौरान मन को एकाग्र करने की विधियां बताई गईं।

