पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान युद्ध का असर अब सीधे उपभोक्ता बाजार पर दिखाई देने लगा है। रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले सर्फ, साबुन, डिटर्जेंट और हेल्थ ड्रिंक जैसे कई जरूरी उत्पाद महंगे हो गए हैं। 500 ग्राम के हॉर्लिक्स का दाम 235 रुपए हो गया है, जो 10 दिन पहले 209 रुपए की बिक रही थी। एक किलो के व्हील एक्टिव पैक का दाम 76 से बढ़कर 80 रुपए हो गया है। एक किलो का घड़ी डिटर्जेंट का पैकेट 74 रुपए से बढ़कर 78 रुपए का हो गया है। सबसे अधिक दाम मच्छरों और मक्खियों जैसे उड़ने वाले कीड़ों को तुरंत मारने में उपयोग होनेवाले ब्लैक हिट का बढ़ा है। ब्लैक हिट का दाम 260 रुपए से बढ़कर 340 रुपए हो गया है। आने वाले समय में एफएमसीजी उत्पादों के दामों में और तेजी की आशंका जताई जा रही है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव और पैकेजिंग सामग्री की बढ़ती लागत ने कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ाया है। इसी कारण कंपनियां अब उत्पादों की कीमतों में संशोधन करने को मजबूर हो रही हैं। इसका असर अब सीधे आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने लगा है। कतरनी चावल पांच रुपए तो बासमती 15 रुपए महंगा कतरनी चावल पिछले एक महीने में करीब 5 रुपए प्रति किलो तक महंगा हुआ है, जबकि साधारण परमल चावल में 1-2 रुपए प्रति किलो की मामूली वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं बासमती चावल की कीमतों में 10 से 15 रुपए प्रति किलो तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है। चावल के थोक कारोबारी मनीष साहू का कहना है कि कतरनी धान की कीमत में लगभग 350 रुपए की बढ़ोतरी हुई है, जिससे खुदरा बाजार में सीधा असर पड़ा है। इसके अलावा बासमती चावल की एक्सपोर्ट मांग बढ़ने और पैकेजिंग सामग्री की लागत में इजाफे के कारण भी कीमतों में तेजी आई है। परमल व उसना चावल के भाव में एक रुपए की तेजी बोरा की कीमत बढ़ने के कारण आई है। वर्तमान में रांची के खुदरा बाजार में परमल चावल 40 से 44 रुपए प्रति किलो और बासमती चावल 110-150 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है। कारोबारियों का अनुमान है कि अगर लागत में राहत नहीं मिली तो आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ सकती हैं। क्रूड ऑयल और लागत बढ़ने से एफएमसीजी बाजार पर दबाव झारखंड कंज्यूमर प्रोडक्ट डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय अखौरी ने कहा कि एफएमसीजी उत्पादों का प्रमुख कच्चा माल क्रूड ऑयल इस समय ऐतिहासिक ऊंचाई पर है। पैकेजिंग मैटेरियल और इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में भी लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे उत्पादLन लागत बढ़ गई है। रॉ मटेरियल की कमी के कारण कई कंपनियों ने उत्पादन घटा दिया है, जबकि कुछ छोटी कंपनियां बंद हो चुकी हैं। इससे सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है और आने वाले समय में एफएमसीजी उत्पादों की कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना है।
आम आदमी पर अमेरिका-ईरान युद्ध की मार:10 दिन में हॉर्लिक्स 26 रुपए महंगा, साबुन और वाशिंग पाउडर में 4-5 रुपए की तेजी
पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान युद्ध का असर अब सीधे उपभोक्ता बाजार पर दिखाई देने लगा है। रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले सर्फ, साबुन, डिटर्जेंट और हेल्थ ड्रिंक जैसे कई जरूरी उत्पाद महंगे हो गए हैं। 500 ग्राम के हॉर्लिक्स का दाम 235 रुपए हो गया है, जो 10 दिन पहले 209 रुपए की बिक रही थी। एक किलो के व्हील एक्टिव पैक का दाम 76 से बढ़कर 80 रुपए हो गया है। एक किलो का घड़ी डिटर्जेंट का पैकेट 74 रुपए से बढ़कर 78 रुपए का हो गया है। सबसे अधिक दाम मच्छरों और मक्खियों जैसे उड़ने वाले कीड़ों को तुरंत मारने में उपयोग होनेवाले ब्लैक हिट का बढ़ा है। ब्लैक हिट का दाम 260 रुपए से बढ़कर 340 रुपए हो गया है। आने वाले समय में एफएमसीजी उत्पादों के दामों में और तेजी की आशंका जताई जा रही है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव और पैकेजिंग सामग्री की बढ़ती लागत ने कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ाया है। इसी कारण कंपनियां अब उत्पादों की कीमतों में संशोधन करने को मजबूर हो रही हैं। इसका असर अब सीधे आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने लगा है। कतरनी चावल पांच रुपए तो बासमती 15 रुपए महंगा कतरनी चावल पिछले एक महीने में करीब 5 रुपए प्रति किलो तक महंगा हुआ है, जबकि साधारण परमल चावल में 1-2 रुपए प्रति किलो की मामूली वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं बासमती चावल की कीमतों में 10 से 15 रुपए प्रति किलो तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है। चावल के थोक कारोबारी मनीष साहू का कहना है कि कतरनी धान की कीमत में लगभग 350 रुपए की बढ़ोतरी हुई है, जिससे खुदरा बाजार में सीधा असर पड़ा है। इसके अलावा बासमती चावल की एक्सपोर्ट मांग बढ़ने और पैकेजिंग सामग्री की लागत में इजाफे के कारण भी कीमतों में तेजी आई है। परमल व उसना चावल के भाव में एक रुपए की तेजी बोरा की कीमत बढ़ने के कारण आई है। वर्तमान में रांची के खुदरा बाजार में परमल चावल 40 से 44 रुपए प्रति किलो और बासमती चावल 110-150 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है। कारोबारियों का अनुमान है कि अगर लागत में राहत नहीं मिली तो आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ सकती हैं। क्रूड ऑयल और लागत बढ़ने से एफएमसीजी बाजार पर दबाव झारखंड कंज्यूमर प्रोडक्ट डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय अखौरी ने कहा कि एफएमसीजी उत्पादों का प्रमुख कच्चा माल क्रूड ऑयल इस समय ऐतिहासिक ऊंचाई पर है। पैकेजिंग मैटेरियल और इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में भी लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे उत्पादLन लागत बढ़ गई है। रॉ मटेरियल की कमी के कारण कई कंपनियों ने उत्पादन घटा दिया है, जबकि कुछ छोटी कंपनियां बंद हो चुकी हैं। इससे सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है और आने वाले समय में एफएमसीजी उत्पादों की कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना है।

