प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण की अपील के बाद बिहार सरकार के मंत्रियों के बीच अब सादगी और वैकल्पिक परिवहन का संदेश देते दिखाई दे रहे हैं। कई मंत्री अब आम वाहनों का इस्तेमाल कर रहे है तो कई मंत्रियों ने अपने काफिले को भी छोटा कर दिया है। इसी क्रम में बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर शैलेन्द्र बुधवार को अपने पूरे सुरक्षा एस्कॉर्ट के साथ ई-रिक्शा पर सवार होकर विश्वेश्वरैया भवन स्थित पथ निर्माण विभाग पहुंचे। खास बात यह रही कि केवल मंत्री ही नहीं, बल्कि उनके साथ चलने वाले सुरक्षाकर्मी और एस्कॉर्ट टीम के सदस्य भी गाड़ियों के बजाय ई-रिक्शा से ही कार्यालय पहुंचे।
सप्ताह में दो दिन ई-रिक्शा या साइकिल से चलने का ऐलान दफ्तर पहुंचने के बाद इंजीनियर शैलेन्द्र ने कहा कि, ‘देश तेजी से प्रदूषण और ईंधन संकट जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में यदि जनप्रतिनिधि खुद उदाहरण पेश करें तो समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा। सरकार और जनता दोनों को मिलकर वैकल्पिक और पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देना चाहिए। प्रधानमंत्री की अपील का बताया समर्थन इंजीनियर शैलेन्द्र ने कहा कि, ‘प्रधानमंत्री लगातार ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण बचाने और स्वच्छ परिवहन के उपयोग पर जोर देते रहे हैं। देशहित में हर व्यक्ति को अपनी जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव लाने चाहिए। मंत्री ने कहा कि नेताओं को जनता से जुड़ने के लिए दिखावे और वीआईपी संस्कृति से बाहर निकलना चाहिए।’ उन्होंने आगे कहा, ‘यदि लोग छोटी दूरी के लिए निजी बड़ी गाड़ियों के बजाय साइकिल, ई-रिक्शा या सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें, तो इससे पेट्रोल-डीजल की खपत कम होगी और पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा।’ तेजस्वी यादव पर साधा राजनीतिक निशाना इस दौरान इंजीनियर शैलेन्द्र ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि, ‘तेजस्वी यादव को भी अपने लंबे-चौड़े काफिलों को कम करना चाहिए। यदि विपक्ष के नेता भी ई-रिक्शा या छोटे वाहनों का उपयोग करेंगे तो इससे समाज में बेहतर संदेश जाएगा।’
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी भी पहुंचे थे ई-रिक्शा से इंजीनियर शैलेन्द्र से पहले बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी भी ई-रिक्शा से अपने कार्यालय पहुंचे थे। वे भी अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ ई-रिक्शा पर सवार होकर सचिवालय पहुंचे थे। हालांकि, विपक्ष ने इन पहलों की गंभीरता पर सवाल भी उठाए हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि, एक दिन ई-रिक्शा चलाने से वास्तविक बदलाव नहीं आएगा, जब अगले ही दिन मंत्री फिर से बड़े-बड़े वीआईपी काफिलों के साथ सड़कों पर दिखाई देते हैं। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के मामले में भी ऐसा ही देखने को मिला। पटना में ई-रिक्शा से दफ्तर पहुंचने के ठीक बाद जब वे सासाराम और अन्य जिलों के दौरे पर निकले तो उनके साथ फॉर्च्यूनर, स्कॉर्पियो और पुलिस एस्कॉर्ट वाहनों का लंबा काफिला दिखाई दिया।


