Sunday, July 12, 2026

Breaking
News

🕒

Latest
Updates

🔔

Stay
Informed

Top 5 This Week

Related Posts

एक्साइज का करोड़पति इंस्पेक्टर-शराबबंदी में धन वसूली के 4 तरीके:डेढ़ करोड़ कैश देकर मॉल खरीदा, पत्नी के लिए 25 लाख की कार, जीजा को स्कॉर्पियो गिफ्ट दी


अंकेश कुमार गोंड, बिहार एक्साइज डिपार्टमेंट के इंस्पेक्टर। वर्तमान पोस्टिंग सीवान जिले में है। 3 दिन पहले चर्चा में आए हैं। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने 9 जुलाई को इनके 5 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। क्या आप इस कार्रवाई के पीछे की वजह जानते हैं? नहीं, तो चलिए हम बताते हैं। अंकेश के कंधों पर सख्ती से शराबबंदी कानून का पालन कराने और अवैध रूप से इसकी ब्रिकी पर रोक लगाने की जिम्मेदारी थी। उन्हें अपने इलाके के शराब माफियाओं पर शिकंजा कसना था, लेकिन उल्टा काम कर रहे थे। शराबबंदी को ब्लैक मनी कमाने का सबसे बड़ा जरिया बना लिया था। शराब माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की जगह उन्हें संरक्षण दी, बदले में पैसे लिए। संडे बिग स्टोरी में पढ़िए किस तरह अंकेश ने इंस्पेक्टर पद का नाजायज फायदा उठाया? कैसे अपने ससुर, साले और बहनोई के नाम पर कमाई कर रहे थे? छापेमारी के दौरान कहां थे और उनकी सर्विस पिस्टल कहां मिली? कैसे EOU की नजर में आए अंकेश? अंकेश और शराब माफियाओं की मिलीभगत की जानकारी पटना में बड़े अधिकारियों तक पहुंची तो उनकी एक्टिविटी को वॉच किया जाने लगा। सबूत मिले तो 8 जुलाई को पटना में EOU ने अंकेश के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत FIR दर्ज की। अगले दिन सीवान, पटना और मुंगेर जिले में इनके 5 ठिकानों पर छापेमारी की गई। इन ठिकानों पर हुई थी छापेमारी अब जानिए वो चार तरीके, जिससे अंकेश ने की कमाई 1- शराब तस्करों और माफियाओं के साथ कनेक्शन यूपी, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा समेत दूसरे राज्यों से अंग्रेजी और ब्रांडेड शराब की खेप लाने वाले तस्करों और इसे मंगाने वाले माफियाओं के साथ इनका कनेक्शन था। सूत्र बताते हैं कि दूसरे राज्यों से बड़ी गाड़ियों के जरिए शराब की खेप को यूपी बॉर्डर तक लाया जाता था। वहां से छोटी गाड़ियों में शराब लोड कर दिया जाता था। ये गाड़ियां सीवान जिले के रास्ते बिहार आती थीं। शराब की तस्करी होने देने के बदले माफियाओं की तरफ से इंस्पेक्टर अंकेश को हर महीने मोटी रकम कैश में मिलती थी। 2- अवैध शराब बनाने वालों को संरक्षण सूत्र बताते हैं कि इंस्पेक्टर अंकेश की पोस्टिंग जब जहां रही, उन्होंने अपने इलाके में अवैध रूप से शराब बनाने वालों को संरक्षण दिया। इसके बदले मोटी रकम ली। 3- बहनोई के नाम पर स्कॉर्पियो खरीदी, डिपार्टमेंट से लिया किराया अंकेश ने अपने बहनोई मनीष कुमार साह को स्कॉर्पियो खरीदकर गिफ्ट के रूप में दिया। फिर उस गाड़ी को अपने डिर्पाटमेंट में किराए पर लगा दिया। गाड़ी को सीवान में रखा। कहीं भी आने-जाने के लिए इसे यूज कर रहे थे। डिपार्टमेंट से हर महीने उसका किराया वसूल रहे थे। इसका एग्रीमेंट पेपर जब्त किया गया है। 4- शराब के साथ जब्त टेम्पो ससुर के नाम पर खरीदा पटना जिले में दानापुर एक्साइज थाना में पोस्टिंग के दौरान शराब के साथ जब्त की गई टेम्पो को अंकेश ने नेउरा में हुए नीलामी में अपने ससुर देव मुनी प्रसाद के नाम पर खरीदा। फिर उसका कमर्शियल इस्तेमाल खुद करने लगे। इसके भी कागजात EOU के हाथ लगे हैं। घर पर कैश लेकर आते थे माफिया के गुर्गे अब तक की नौकरी में अंकेश की पोस्टिंग मुख्य रूप से पटना, मोतिहारी और सीवान में रही है। सीवान ट्रांसफर से पहले पटना के दानापुर स्थित एक्साइज थाना में करीब डेढ़ साल रहे। वह थाना प्रभारी भी रह चुके हैं। इस दौरान यहां भी शराब माफियाओं से इनका कनेक्शन रहा। थाना से जुड़े रहे एक सूत्र के अनुसार माफियाओं के गुर्गे कैश लेकर उनके घर जाते थे। उस वक्त इनकी मदद से ग्रामीण इलाको में शराब की अवैध भटि्टयां चल रही थीं। अब तक की सैलरी 87 लाख रुपए, संपत्ति मिली 2.36 करोड़ की आर्थिक अपराध इकाई की जांच में पता चला है कि अंकेश गोंड 2 करोड़ 36 लाख 31 हजार रुपए के चल-अचल संपत्ति के मालिक हैं। यह इनके सरकारी सैलरी से 201.97 प्रतिशत अधिक है। 29 जून 2005 को बतौर ASI अंकेश कुमार गोंड ने बिहार एक्साइज डिपार्टमेंट में अपनी नौकरी की शुरुआत की थी। 21 साल की नौकरी में प्रमोशन पाकर पहले सब इंस्पेक्टर और फिर इंस्पेक्टर बने। अब तक सैलरी से इनकी कुल कमाई 87 लाख रुपए है। इसके अलावा 25 लाख और 5 लाख रुपए के दो लोन लिए। इनके पिता विजय प्रसाद गोंड रेलवे कर्मचारी थे। पैतृक संपत्ति के नाम पर मुंगेर के कासिम बाजार में एक पुश्तैनी घर था। कैश में खरीदी डेढ़ करोड़ की मॉल शराब माफियाओं से मिलकर इंस्पेक्टर अंकेश कितनी अवैध कमाई कर रहे थे इसका पता उनके द्वारा खरीदी गई संपत्ति से चलता है। उन्होंने कैश देकर डेढ़ करोड़ रुपए की मॉल खरीदी। अंकेश ने मुंगेर के लल्लू पोखर इलाके में 23 नवंबर 2021 को अपनी पत्नी पूनम कुमारी के नाम से दो फ्लोर वाली कॉमर्शियल प्रॉपर्टी खरीदी। पेपर पर इस प्रॉपर्टी की कुल कीमत 1 करोड़ 21 लाख है। जबकि, मार्केट वैल्यू करीब डेढ़ करोड़ रुपए की है। इस प्रॉपर्टी को खरीदने के लिए अंकेश ने कोई लोन नहीं लिया। सारे पैसे कैश में दिए। 80 लाख रुपए खर्च कर पटना में बनाया घर अंकेश ने पटना के दानापुर के सुल्तानपुर इलाके में 2011 में पत्नी के नाम से 16.81 लाख रुपए की जमीन खरीदी थी। 2016 में बिहार में शराबबंदी लागू हुई। 2017 के बाद उन्होंने इस जमीन पर घर बनवाना शुरू कर दिया। ग्राउंड फ्लोर से लेकर ऊपर के दो फ्लोर बनाने में 80 लाख रुपए से अधिक खर्च किए। सारा खर्च कैश में किया गया। कोई लोन नहीं लिया। इंस्पेक्टर के पास से कुल तीन प्रॉपर्टी मिली है। तीनों पत्नी पूनम कुमारी के नाम पर है। सबसे पहली प्रॉपर्टी 2010 में मुंगेर के चुआबाग इलाके में 6 लाख 60 हजार रुपए में खरीदी गई थी। पत्नी-बहनोई के नाम पर खरीदी कार अंकेश को बड़ी गाड़ियों में घूमने का शौक है। इस बात का प्रमाण EOU की छापेमारी के दौरान मिला है। इसने जून 2026 में 25 लाख रुपए से अधिक कीमत वाली एक इनोवा गाड़ी अपनी पत्नी पूनम कुमारी के नाम से खरीदी थी। बहनोई के नाम पर स्कॉर्पियो खरीदी, जिससे यह खुद घूम रहा था। फिर पत्नी के भाई के नाम पर एक कार खरीदी। इसके पास एक बुलेट और एक स्कूटी भी है। किराए के घर पर मिली सरकारी पिस्टल इंस्पेक्टर अंकेश कुमार गोंड को अपने डिपार्टमेंट से एक सरकारी पिस्टल और गोलियां मिली थीं। इसे उन्हें अपने मूवमेंट के दौरान अपने पास रखना था। 9 जुलाई को जब EOU ने छापेमारी की तब अंकेश की सरकारी पिस्टल और गोलियां सीवान में उनके किराए वाले घर में रखी मिली। इसे देख जांच टीम भी कुछ देर के लिए सकते में आ गई। टीम ने पिस्टल और गोलियों को डिपार्टमेंट में जमा करा दिया है। बगैर छुट्टी के गायब थे अंकेश, लास्ट लोकेशन मुंगेर में मिला छापेमारी के दौरान अंकेश का मोबाइल फोन बंद था। 5 ठिकानों में से किसी भी लोकेशन पर वह जांच टीम के सामने मौजूद नहीं थे। बहनोई के नाम से खरीदी गई जिस स्कॉर्पियो से वह घूम रहे थे वो मुंगेर में ही घर पर खड़ी मिली थी। सूत्रों की मानें तो इसके बाद टीम ने अंकेश के मोबाइल का लास्ट लोकेशन खंगाला, जो मुंगेर में ही मिला। इससे स्पष्ट होता है कि छापेमारी से पहले अंकेश मुंगेर में ही मौजूद थे। हालांकि, इन्हें सीवान में होना चाहिए था। जांच में पता चला कि बगैर आधिकारिक छुट्‌टी लिए वह ड्यूटी से गायब थे। अगर आधिकारिक छुट्‌टी में होते तो सरकारी पिस्टल और गोली जमा करके आते। बैंक लॉकर में क्या है? पटना में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के दानापुर ब्रांच में अंकेश का एक लॉकर है। जिसके बारे में जांच टीम को पता चला है। इस लॉकर के अंदर क्या-क्या रखा है? इसकी पड़ताल होगी। लॉकर खोला जाएगा और उसकी तलाशी ली जाएगी। इसे फ्रिज करा दिया गया है। अब ये लॉकर जांच टीम के सामने ही खुलेगी। पूछताछ से लेकर डिपार्टमेंटल कार्रवाई तक होगी सरकारी नौकरी करते हुए ब्लैक मनी कमाने वाले एक्साइज इंस्पेक्टर के खिलाफ अब आगे क्या होगा? इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए हमने जांच एजेंसी से लेकर सचिवालय में एक्साइज डिपार्टमेंट के अधिकारियों से बात की। जांच एजेंसी ने अंकेश को पूछताछ के लिए 22 जुलाई को अपने मुख्यालय बुलाया है।

Spread the love

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Popular Articles