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रामगढ़ जिले की तीन बड़ी औद्योगिक इकाइयों में हुए ब्लास्ट और हादसों में इंजीनियरों व श्रमिकों की मौत के मामलों की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग अब तेज हो गई है। इसी मांग को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और रामगढ़ के पूर्व विधायक शंकर चौधरी ने समाहरणालय के गेट पर धरना दिया। उन्होंने दो दिन पहले जिला प्रशासन को 24 सितंबर की समय सीमा दी थी। लेकिन जांच रिपोर्ट को लेकर स्थिति अभी भी साफ नहीं हुई है। दोनों नेताओं ने साफ कहा था कि यदि 24 सितंबर तक तीनों औद्योगिक हादसों की जांच रिपोर्ट नहीं दी गई, तो 25 सितंबर को रामगढ़ समाहरणालय स्थित उपायुक्त कार्यालय के प्रवेश द्वार की सीढ़ियों पर शांतिपूर्ण धरना देंगे। इस चेतावनी के बावजूद रिपोर्ट पर स्थिति साफ नहीं की गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा कि औद्योगिक हादसों के बाद जिला प्रशासन ने जांच कमेटियां बनाई थीं और रिपोर्ट देने को कहा था। फिर भी जांच की पूरी रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई है। उन्होंने श्रीराम पावर को लेकर भी सवाल उठाया। उनकी मांग है कि प्रशासन द्वारा कराई गई जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने से यह साफ होगा कि हादसे किन परिस्थितियों में हुए, सुरक्षा नियमों का पालन हुआ था या नहीं और हादसों के बाद प्रशासन ने क्या कार्रवाई की। शंकर चौधरी ने कहा कि औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा सबसे जरूरी होनी चाहिए। हादसों के बाद जांच सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि जांच के नतीजों के आधार पर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। इसी मांग को लेकर आज यशवंत सिन्हा और शंकर चौधरी ने समाहरणालय गेट पर धरना दिया।
औद्योगिक हादसों की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग:पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और शंकर चौधरी ने समाहरणालय गेट पर दिया धरना
