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औरंगाबाद सदर अस्पताल परिसर स्थित सिविल सर्जन कार्यालय में मंगलवार को निलंबित लिपिक कृष्ण प्रसाद वर्मा को पुलिस ने पकड़ लिया। आरोप है कि वह कार्यालय का ताला तोड़कर अंदर घुसा और कागजात निकालने की कोशिश कर रहा था। दशहरा की छुट्टी के कारण कार्यालय बंद था। सूचना मिलने पर नगर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और उसे बाहर निकालकर पकड़ लिया। ताला तोड़कर कार्यालय में घुसा, अंदर से बंद कर लिया गेट जानकारी के अनुसार, मंगलवार शाम करीब 5 बजे कृष्ण प्रसाद वर्मा सीएस कार्यालय पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने मुख्य गेट का ताला तोड़ा और अंदर जाकर गेट बंद कर लिया। इस दौरान किसी कर्मचारी या मौके पर मौजूद व्यक्ति को उनकी गतिविधियों पर शक हुआ। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची तो कार्यालय का गेट अंदर से बंद था। पुलिस ने ताला खुलवाया और लिपिक को बाहर निकालकर पकड़ लिया। घटना के बाद कार्यालय परिसर में काफी देर तक अफरातफरी रही। कृष्ण प्रसाद वर्मा पहले से ही निलंबित चल रहे हैं। हालांकि, वह किन कागजात को निकालने पहुंचे थे, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। सिविल सर्जन को फोन कर कहा- सर, मुझे बाहर निकलवा दीजिए सिविल सर्जन डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि कृष्ण प्रसाद वर्मा ने उन्हें फोन किया था। लिपिक ने कहा, “सर, मुझे बाहर निकलवा दीजिए। मैं कार्यालय के अंदर बंद हूं और कुछ कागजात लेने आया था। किसी ने पुलिस बुला दी है।” डॉ. कृष्ण कुमार के मुताबिक, जब उन्होंने लिपिक से पूछा कि छुट्टी के दिन कार्यालय आने की क्या जरूरत थी, तो उसने कागजात लेने आने की बात कही। सिविल सर्जन ने बताया कि निलंबित होने के बावजूद कृष्ण प्रसाद वर्मा कार्यालय आते-जाते रहते थे। निलंबन के बाद उन्होंने अपना प्रभार भी पूरी तरह नहीं सौंपा था। डॉ. कृष्ण कुमार ने आशंका जताई कि लिपिक ने कार्यालय और मुख्य गेट की एक-एक चाबी अपने पास रखी होगी। इसी का इस्तेमाल कर वह अंदर पहुंचा होगा। इस घटना के बाद कार्यालय की सुरक्षा और सरकारी कागजात की हिफाजत को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि लिपिक किस उद्देश्य से वहां पहुंचा था और क्या किसी दस्तावेज को निकालने या नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। दो सरकारी संस्थानों में काम कर वेतन लेने का आरोप, जांच के बाद निलंबन कृष्ण प्रसाद वर्मा पहले से ही एक ही अवधि में दो सरकारी संस्थानों में काम करने और दोनों जगहों से वेतन लेने के आरोपों को लेकर विवादों में हैं। इस मामले की शिकायत औरंगाबाद के पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह ने जिला पदाधिकारी से की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कृष्ण प्रसाद वर्मा एक ही समय में दो अलग-अलग संस्थानों में काम कर रहे थे और दोनों जगहों से वेतन ले रहे थे। शिकायत मिलने के बाद जिला पदाधिकारी ने सिविल सर्जन को जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। इसके बाद तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई गई। समिति ने सेवा पुस्तिका, सेवा से जुड़े दस्तावेज और भारत कोकिंग कोल लिमिटेड के पूर्वी झरिया क्षेत्र से मिले रिकॉर्ड की जांच की। जांच रिपोर्ट के अनुसार, कृष्ण प्रसाद वर्मा 6 जुलाई 2005 से सिविल सर्जन कार्यालय, औरंगाबाद में लिपिक के पद पर कार्यरत हैं। वहीं, कोल कंपनी के रिकॉर्ड के मुताबिक, वह 24 नवंबर 2008 से 12 मार्च 2017 तक जूनियर ओवरमैन के पद पर भी काम करते रहे और वहां से वेतन प्राप्त किया। इस तरह दोनों संस्थानों में काम करने की अवधि और वेतन से जुड़े रिकॉर्ड में अंतर सामने आया। मामले में लिपिक को कारण बताओ नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया था। जांच रिपोर्ट के अनुसार, उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद जिला पदाधिकारी ने दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट के आधार पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश दिया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, गोह तय किया गया है। गोह थाने में प्राथमिकी दर्ज, पुलिस और विभागीय जांच जारी दो सरकारी संस्थानों से वेतन लेने के आरोप में कृष्ण प्रसाद वर्मा के खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, गोह के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शिव शंकर प्रसाद के आवेदन पर गोह थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, 10 अक्टूबर 2026 को गोह थाना कांड संख्या 278/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। थानाध्यक्ष राजीव कुमार ने भी लिपिक केपी वर्मा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने की पुष्टि की थी। मंगलवार को सीएस कार्यालय में ताला तोड़कर घुसने की घटना सामने आने के बाद कृष्ण प्रसाद वर्मा एक बार फिर चर्चा में हैं। हालांकि, दो संस्थानों से वेतन लेने का मामला और कार्यालय में चोरी की कोशिश का आरोप अलग-अलग हैं। दोनों मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निकलेगा। फिलहाल, पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि निलंबित लिपिक दशहरा की छुट्टी में कार्यालय क्यों पहुंचा था, वह किन कागजात को लेने की बात कह रहा था और क्या सरकारी दस्तावेजों से कोई छेड़छाड़ हुई है। वहीं, दो संस्थानों से वेतन लेने के मामले में चल रही विभागीय और आपराधिक कार्रवाई के नतीजे भी महत्वपूर्ण होंगे।
औरंगाबाद में निलंबित लिपिक ने तोड़ा CS ऑफिस का ताला:कागजात लेने घुसा तो अंदर बंद हुआ, दो सरकारी संस्थानों से वेतन लेने के आरोप में पहले से निलंबित
