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औरंगाबाद में 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत लगनी है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार और न्यायिक प्रशासन की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। आयोजन को सफल बनाने और अधिकाधिक मामलों निपटारे के उद्देश्य से प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव रंजन कुमार ने व्यवहार न्यायालय परिसर में पीसी की। उन्होंने राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों, चिह्नित मामलों, पक्षकारों को भेजे गए नोटिस और गठित की जाने वाली पीठों के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि न्यायालयों में लंबित करीब 3,200 मामलों को राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए चिह्नित किया गया है। संबंधित पक्षकारों को इसकी जानकारी देने और समझौते के माध्यम से मामलों का निस्तारण कराने के लिए 6,000 से अधिक नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें से करीब 500 मामलों के निष्पादन का लक्ष्य रखा गया है। विभिन्न न्यायिक पदाधिकारियों और संबंधित पक्षों के साथ समन्वय कर अधिकाधिक मामलों के निस्तारण का प्रयास जारी है। वादपूर्व 5 हजार मामलों पर भी विशेष फोकस राष्ट्रीय लोक अदालत में केवल न्यायालयों में लंबित मामलों का ही निस्तारण नहीं होगा, बल्कि वादपूर्व यानी प्री-लिटिगेशन मामलों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने बताया कि करीब 5,000 वादपूर्व मामलों को चिह्नित किया गया है। संबंधित पक्षकारों को सूचना देने और समझौते के जरिए विवाद समाप्त करने का अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगभग 4,970 नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें से करीब 1,500 मामलों के निस्तारण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए संबंधित विभागों, संस्थानों और पदाधिकारियों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मामलों की पहचान, नोटिस वितरण और समझौते की संभावना वाले मामलों की समीक्षा के लिए कई स्तरों पर बैठकें की गई हैं।
यातायात चालान के लिए विशेष पीठ का होगा गठन राष्ट्रीय लोक अदालत में यातायात चालान से संबंधित मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए विशेष पीठ का गठन किया जाएगा। इसका उद्देश्य पक्षकारों को सरल और त्वरित तरीके से मामलों का समाधान कराने की सुविधा देना है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से समझौते योग्य मामलों का निस्तारण होने से पक्षकारों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिलती है और समय-धन दोनों की बचत होती है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने बताया कि आयोजन के लिए विभिन्न स्तरों पर संबंधित विभागों, बैंकिंग संस्थानों और अन्य हितधारकों के साथ बैठकें की जा रही हैं। आम लोगों को राष्ट्रीय लोक अदालत की जानकारी देने के लिए सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया और सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार अभियान चलाया जा रहा है।
‘त्वरित, सस्ता और सुलभ न्याय’ का प्रभावी माध्यम है लोक अदालत प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव रंजन कुमार ने कहा कि लोक अदालत त्वरित, सस्ता और सुलभ न्याय प्राप्त करने का प्रभावी माध्यम है। इसमें पक्षकारों की आपसी सहमति और समझौते के आधार पर विवादों का समाधान कराया जाता है। इसका उद्देश्य सिर्फ लंबित मामलों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि विवादों का सौहार्दपूर्ण और स्थायी समाधान उपलब्ध कराना भी है। पीसी में जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव तान्या पटेल भी मौजूद रहीं। उन्होंने बताया कि अधिकाधिक पक्षकारों को लोक अदालत के लाभ और प्रक्रिया की जानकारी देने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। संबंधित पक्षकारों तक नोटिस पहुंचाने और उन्हें लोक अदालत में शामिल होने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
औरंगाबाद में 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत लगेगी:8 हजार से अधिक मामलों के निपटारे का लक्ष्य, 3200 लंबित मामले हुए चिह्नित
