Saturday, April 25, 2026

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कटनी स्टेशन पर ट्रेन से 164 नाबालिग लड़के मिले:मानव तस्करी के शक में रेस्क्यू, जांच में पता चला मदरसों में गए थे पढ़ने


सीमांचल क्षेत्र के विभिन्न जिलों से जुड़े 164 नाबालिग बच्चों को कटनी रेलवे स्टेशन पर पटना-पुणे एक्सप्रेस से रेस्क्यू किया गया था। प्रारंभिक तौर पर मानव तस्करी का मामला माने जाने के बाद, एक विस्तृत जांच में यह सामने आया कि बच्चे महाराष्ट्र के मदरसों में शिक्षा प्राप्त करने जा रहे थे। अब इन सभी बच्चों को उनके गृह जिलों अररिया, सुपौल, किशनगंज और पूर्णिया वापस भेज दिया गया है। यह घटना करीब दो सप्ताह पहले पश्चिम मध्य रेलवे के कटनी स्टेशन पर हुई थी। गुरुवार-शुक्रवार की दरम्यानी रात लगभग 2 बजे प्रशासन ने एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया था। इस दौरान, बच्चों के साथ यात्रा कर रहे 8 शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी, क्योंकि पुलिस और बाल संरक्षण विभाग ने इसे मानव तस्करी से जुड़ा मामला माना था। 12 दिनों तक कराई गई सामाजिक जांच मामले की गंभीरता को देखते हुए, लगभग 12 दिनों तक सामाजिक जांच कराई गई। इस जांच प्रक्रिया में बच्चों, उनके अभिभावकों और संबंधित संस्थानों से गहन पूछताछ की गई। कुल 164 बच्चों में से 144 अररिया के, 16 सुपौल के, 1 किशनगंज का और 1 पूर्णिया का नाबालिग शामिल था। सामाजिक जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि बच्चों को किसी प्रकार की जबरदस्ती या बहला-फुसलाकर नहीं ले जाया जा रहा था। सभी बच्चे अपनी मर्जी से पढ़ाई के उद्देश्य से जा रहे थे और उनके माता-पिता की भी पूरी सहमति थी। रिपोर्ट में मानव तस्करी के आरोपों को निराधार पाया गया। जांच रिपोर्ट आने के बाद, प्रशासन ने बच्चों को सुरक्षित उनके गृह जिलों तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की। इन बच्चों को पहले किशनगंज लाया गया, जहां से उन्हें चाइल्ड हेल्पलाइन केंद्र पहुंचाया गया। काउंसिलिंग के बाद भेजा गया घर आवश्यक औपचारिकताएं, काउंसिलिंग, दस्तावेजों की जांच और अभिभावकों से संपर्क के बाद, उन्हें बसों के माध्यम से संबंधित जिलों अररिया, सुपौल और पूर्णिया के लिए रवाना किया गया। संबंधित विभाग पूरे मामले की निगरानी कर रहा है और बच्चों के परिवारों को भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इधर, बच्चों के परिजनों का कहना है कि उन्हें पढ़ाई के लिए भेजा गया था। एक अभिभावक ने बताया कि उनके भतीजे को महाराष्ट्र के अशरफी मदरसे में दाखिले के लिए भेजा गया था। वहीं, अन्य अभिभावकों ने भी सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर बच्चों को रिहा करने की अपील की है। फिलहाल प्रशासन सत्यापन और जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लेने की बात कह रहा है।

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