![]()
प्रखंड के सलाई गांव में मुरली लागुरी (15) नामक एक किशोर सर्पदंश का शिकार हो गया। लेकिन मामले में नया मोड़ तब आया, जब उसने इसकी जानकारी अपनी मां को दी। वह भयवश स्कूल चला गया। वहां उसने स्कूल के शिक्षक को जानकारी दी। उसके बाद शिक्षक ने उसे इलाज के लिए मनोहरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया। मामला शुक्रवार सुबह 6 बजे का है। जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार सुबह करीब छह बजे वह बकरी चराने गया था। इस दौरान वह बकरियों को खिलाने के लिए पेड़ से पत्ते तोड़ रहा था। इसी दौरान एक हरे रंग के सांप ने उसकी पीठ पर डंस लिया। उसके बाद वह भयवश घर के किसी भी सदस्य को घटना की जानकारी नहीं दी। समय होने पर वह स्कूल चला गया। वहां उसने इसकी जानकारी स्कूल के शिक्षक को दी। उसके बाद शिक्षक रोयन हेंब्रम उसे सुबह 10 बजे इलाज के लिए मनोहरपुर सीएचसी लेकर पहुंचे। बच्चा दोदारी गांव स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय में कक्षा 9वीं का छात्र है। हालांकि, बातचीत में उसने बताया कि यह बात सिर्फ अपनी मां को बताई थी। दूसरी ओर अस्पताल में इसकी जानकारी मिलने पर सीएचसी प्रभारी डॉ. अनिल कुमार भी हतप्रभ रह गए। उन्होंने इसे गंभीर चूक बताया। उन्होंने कहा कि इसी तरह की लापरवाही से मरीज की जिंदगी मुश्किल में पड़ जाती है। उन्होंने बताया कि बच्चा फिलहाल खतरे से बाहर है। लेकिन जिस तरह के सांप की बात उसने बताई है, वह ज्यादा जहरीला नहीं है। नोवामुंडी| पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी प्रखंड अंतर्गत कादाजामदा पंचायत में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। हाथियों के झुंड ने पंचायत के मुखिया हिरामन पूर्ति की करीब चार एकड़ में लगी खड़ी धान की फसल को पूरी तरह रौंदकर बर्बाद कर दिया। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से जंगल से सटे इलाके में हाथियों का झुंड घूम रहा है। इसलिए किसान रात-रात भर जागकर खेतों की पहरेदारी कर रहे हैं। इसके बावजूद गुरुवार की रात करीब 16-17 हाथियों का झुंड जंगल से निकलकर सीधे खेतों में घुस गया। किसानों ने ढोल-नगाड़े बजाकर और आग जलाकर हाथियों के झुंड को भगाने की कोशिश की, लेकिन हाथियों ने देखते ही देखते चार एकड़ में फैली फसल को पैरों से रौंद दिया। कादाजामदा पंचायत के मुखिया हिरामन पूर्ति ने बताया कि खेती ही गांव-इलाकों में रहने वाले परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन है। इस साल फसल अच्छी हुई थी, लेकिन हाथियों ने सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। सारंडा जंगल से सटे होने के कारण नोवामुंडी, कादाजामदा, बड़ाजामदा, कांतोड़ेया, परम बालजोड़ी, बड़ा बालजोड़ी, सिंदरीगौरी, दिरीबुरु, दुधबिला आदि इलाकों में हर साल धनकटनी के समय हाथियों के हमले की घटनाएं बढ़ जाती हैं। इधर बच्चे से मिली जानकारी और शिक्षक द्वारा उपलब्ध कराई गई सांप की तस्वीर से उक्त सांप के वाइपर प्रजाति के ग्रीन पिट वाइपर होने की संभावना है। भारत में इसे आमतौर पर बैम्बू पिट वाइपर कहा जाता है। स्थानीय भाषा में इसे डालडेगा भी कहते हैं। वन विभाग और अन्य सूत्रों ने भी इसकी पुष्टि की है। मिली जानकारी के अनुसार, ग्रीन पिट वाइपर का जहर मुख्य रूप से हेमोटॉक्सिक होता है। यह शरीर के खून और ऊतकों को प्रभावित करता है। इसके डंसने पर तीव्र दर्द, सूजन, और घाव के पास ब्लीडिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बिना इलाज के भी मरीज को दो-तीन दिन तक कोई खतरा नहीं होता।
कादाजामदा पंचायत में जंगली हाथियों ने चार एकड़ में मुखिया की लगी धान की फसल रौंदी
